By: Vikash Kumar (Vicky)
Aaj Ka Panchang 12 October 2026: आज सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से भक्तों को धैर्य, संयम, तप और आत्मबल की प्रेरणा मिलती है। सोमवार का दिन भगवान शिव की पूजा के लिए भी विशेष माना जाता है। ऐसे में आज मां दुर्गा के साथ भगवान शिव का स्मरण करना भी श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। अगर आप आज व्रत रख रहे हैं या पूजा-पाठ की तैयारी कर रहे हैं, तो तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल और शुभ मुहूर्त की जानकारी जरूर जान लें। आइए जानते हैं आज का संपूर्ण पंचांग।

आज की तिथि और वार
आज 12 अक्टूबर 2026, दिन सोमवार है। पंचांग के अनुसार, आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। इसके बाद तृतीया तिथि शुरू होगी। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना करने की परंपरा है। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के आधार पर लोग धार्मिक अनुष्ठानों तथा शुभ कार्यों की योजना बनाते हैं। हालांकि, पंचांग के समय अलग-अलग शहरों और गणना पद्धतियों के अनुसार कुछ भिन्न हो सकते हैं।

नवरात्रि के दूसरे दिन होती है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी पूजा करने से भक्तों को कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके मां दुर्गा के सामने दीपक जलाएं। मां को फूल, अक्षत, फल और अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रसाद अर्पित करें। इसके बाद मां के मंत्रों का जाप करके परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करें।

मां ब्रह्मचारिणी का पूजा मंत्र
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप किया जाता है।
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप और प्रार्थना करने से मन को एकाग्र करने तथा आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने में मदद मिलती है।
12 अक्टूबर 2026 का संपूर्ण पंचांग
दिन: सोमवार
तारीख: 12 अक्टूबर 2026
मास: आश्विन
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: द्वितीया
इसके बाद: शुक्ल पक्ष की तृतीया
नक्षत्र: स्वाती, इसके बाद विशाखा
योग: विष्कम्भ, इसके बाद प्रीति
करण: बालव और कौलव
पर्व: शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन
पूजा: मां ब्रह्मचारिणी
संवत: विक्रम संवत 2083
शक संवत: 1948
नोट: तिथि, नक्षत्र, योग और करण के सटीक समय की पुष्टि स्थानीय पंचांग से करें।

आज का राहुकाल कब है?
सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को राहुकाल का समय स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार निर्धारित होगा। सामान्य पंचांग गणना के आधार पर इसे सुबह के समय माना जा सकता है, लेकिन सटीक समय शहर के अनुसार बदलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल में नए और महत्वपूर्ण शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, नियमित पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दैनिक धार्मिक गतिविधियां अपनी श्रद्धा के अनुसार की जा सकती हैं। यदि आप किसी विशेष मांगलिक कार्य, यात्रा या नए काम की शुरुआत करने जा रहे हैं, तो अपने शहर के स्थानीय पंचांग से राहुकाल का सही समय जरूर देख लें।

आज का अभिजीत मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त को हिंदू पंचांग में दिन के शुभ समयों में से एक माना जाता है। इस अवधि में कई लोग पूजा-पाठ, संकल्प और अन्य शुभ कार्य करना पसंद करते हैं। 12 अक्टूबर 2026 को अभिजीत मुहूर्त का सटीक समय स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त और पंचांग की गणना पर निर्भर करेगा। इसलिए किसी विशेष कार्य के लिए समय तय करने से पहले स्थानीय पंचांग देखना उचित रहेगा।
आज का ब्रह्म मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त को धार्मिक परंपराओं में ध्यान, योग, मंत्र जाप, प्रार्थना और अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समय वातावरण शांत रहने के कारण कई लोग अपनी दिनचर्या की शुरुआत आध्यात्मिक गतिविधियों से करते हैं। नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं। आप भी अपनी सुविधा के अनुसार सुबह का कुछ समय ध्यान, प्रार्थना और मंत्र जाप के लिए निर्धारित कर सकते हैं।

आज का नक्षत्र और योग
आज के पंचांग में स्वाती और विशाखा नक्षत्र का क्रम महत्वपूर्ण रहेगा। स्वाती नक्षत्र के बाद विशाखा नक्षत्र शुरू होता है। ज्योतिषीय परंपराओं में नक्षत्रों के आधार पर दिन के विभिन्न कार्यों के लिए समय का विचार किया जाता है। इसी तरह योग भी पंचांग के पांच प्रमुख अंगों में शामिल है। तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के आधार पर दैनिक पंचांग तैयार किया जाता है। किसी धार्मिक अनुष्ठान या मांगलिक कार्य के लिए इन सभी का विचार किया जा सकता है।

सोमवार को भगवान शिव की पूजा का महत्व
सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करके सुख-शांति की कामना करते हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के साथ भगवान शिव का स्मरण करना भी भक्तों के लिए आस्था का विषय है। आप अपनी श्रद्धा के अनुसार शिवजी की पूजा कर सकते हैं और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना कर सकते हैं।

नवरात्रि के दूसरे दिन क्या करें?
नवरात्रि के दूसरे दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करें। पूजा के दौरान दीपक जलाकर फूल, फल और प्रसाद अर्पित करें। इसके बाद मां के मंत्र का जाप करें और मन में सकारात्मक विचार रखें। यदि आपने नौ दिनों का व्रत रखा है, तो अपनी परंपरा के अनुसार सात्विक भोजन करें। पर्याप्त पानी पिएं और अपनी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखें। कमजोरी या किसी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। नवरात्रि में दान-पुण्य और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने की भी परंपरा है। अपनी क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद की मदद करना और परिवार के साथ समय बिताना इस पर्व को और भी विशेष बना सकता है।

आज के पंचांग का धार्मिक महत्व
12 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां का यह स्वरूप भक्तों को तप, संयम, धैर्य और दृढ़ संकल्प की प्रेरणा देता है। सोमवार होने के कारण भगवान शिव की आराधना भी की जा सकती है। आज पूजा-पाठ या किसी शुभ कार्य की योजना बनाते समय स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि, नक्षत्र, राहुकाल और शुभ मुहूर्त की जानकारी जरूर प्राप्त करें। इससे आपको अपने धार्मिक कार्यों की योजना बनाने में सुविधा होगी।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक पंचांग पद्धति पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, राहुकाल और शुभ मुहूर्त के समय में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है। सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग या योग्य पंडित से परामर्श लें।

