By: Vikash Kumar (Vicky)
पीठ दर्द के कारण: आजकल पीठ दर्द की समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। कम उम्र के लोगों में भी लंबे समय तक बैठकर काम करने, गलत तरीके से उठने-बैठने, शारीरिक गतिविधियों की कमी और मांसपेशियों पर दबाव पड़ने के कारण पीठ दर्द की शिकायत बढ़ रही है। शुरुआत में लोग इसे सामान्य थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन जब दर्द कई दिनों तक बना रहता है या बार-बार लौटकर आता है, तो इसके पीछे कोई दूसरी समस्या भी हो सकती है। पीठ दर्द हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। कई बार आराम की कमी, मांसपेशियों में खिंचाव या गलत पोस्चर इसकी वजह बनते हैं। हालांकि, लगातार दर्द, रात में बढ़ने वाला दर्द, पैरों में झनझनाहट या कमजोरी जैसी परेशानियों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। कुछ मामलों में रीढ़ की हड्डी, नसों, किडनी या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी पीठ में दर्द हो सकता है।
ऐसे में जरूरी है कि दर्द के कारण को समझा जाए और समय रहते उचित कदम उठाए जाएं। आइए जानते हैं कि लगातार पीठ दर्द किन स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हो सकता है, किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए और दर्द से बचाव के लिए क्या उपाय अपनाए जा सकते हैं।

लगातार पीठ दर्द होने के क्या कारण हो सकते हैं?
पीठ दर्द के कई कारण हो सकते हैं। इसकी सही वजह दर्द की जगह, अवधि, तीव्रता और साथ में दिखाई देने वाले दूसरे लक्षणों पर निर्भर करती है। बिना जांच के केवल दर्द के आधार पर किसी बीमारी का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।
1. मांसपेशियों में खिंचाव
पीठ दर्द का सबसे आम कारण मांसपेशियों या लिगामेंट में खिंचाव होना है। भारी सामान उठाने, अचानक झुकने, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने या जरूरत से ज्यादा शारीरिक मेहनत करने से पीठ की मांसपेशियों पर दबाव पड़ सकता है। इस स्थिति में पीठ में अकड़न, उठने-बैठने में परेशानी और झुकते समय दर्द महसूस हो सकता है। कई बार आराम और हल्की गतिविधियों से सुधार होता है। यदि दर्द लगातार बना रहे या बढ़ता जाए, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
2. रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं
रीढ़ की हड्डी शरीर को सहारा देने और सही मुद्रा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रीढ़ की हड्डी या उसके आसपास के जोड़ों में समस्या होने पर पीठ दर्द हो सकता है। उम्र बढ़ने के साथ रीढ़ की डिस्क में बदलाव, जोड़ों में घिसाव या दूसरी समस्याएं विकसित हो सकती हैं। कुछ लोगों में डिस्क के बाहर उभरने या नस पर दबाव पड़ने से पीठ के साथ पैरों में भी दर्द, झनझनाहट या सुन्नपन हो सकता है। यदि पीठ दर्द के साथ पैरों में कमजोरी महसूस हो रही है या चलने में परेशानी बढ़ रही है, तो चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी न करें।

3. स्लिप डिस्क की समस्या
स्लिप डिस्क को आम बोलचाल में कहा जाता है, जब रीढ़ की हड्डी के बीच मौजूद डिस्क का हिस्सा बाहर की ओर उभरकर आसपास की नस पर दबाव डाल सकता है। इससे कमर या पीठ में दर्द होने के साथ दर्द नितंबों और पैरों तक भी जा सकता है। कुछ लोगों को लंबे समय तक बैठने, झुकने, खांसने या छींकने पर दर्द बढ़ता हुआ महसूस हो सकता है। हालांकि, ऐसे लक्षण दूसरी समस्याओं में भी हो सकते हैं। इसलिए सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की जांच जरूरी है।
4. किडनी से जुड़ी परेशानी
पीठ के दोनों ओर या पसलियों के नीचे, खासकर कमर के ऊपरी हिस्से में दर्द होने के कुछ कारण किडनी से जुड़ी समस्याएं भी हो सकते हैं। किडनी में पथरी या संक्रमण होने पर पीठ अथवा बगल में दर्द महसूस हो सकता है। यदि पीठ दर्द के साथ बुखार, ठंड लगना, पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आना, पेशाब में खून या उल्टी जैसी परेशानी हो, तो इसे सामान्य मांसपेशियों का दर्द मानकर नजरअंदाज न करें। ऐसे लक्षण होने पर जल्द चिकित्सकीय जांच कराएं। तेज दर्द, बुखार या पेशाब में खून आने की स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

5. ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों का कमजोर होना
ऑस्टियोपोरोसिस ऐसी स्थिति है जिसमें हड्डियों की मजबूती कम हो जाती है और उनके टूटने का जोखिम बढ़ सकता है। इस समस्या में रीढ़ की हड्डी में मामूली चोट या कभी-कभी सामान्य गतिविधियों के दौरान भी फ्रैक्चर हो सकता है। अचानक तेज पीठ दर्द, कद में कमी या पीठ का झुकना कुछ लोगों में रीढ़ की हड्डी के फ्रैक्चर से जुड़ा हो सकता है। उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम बढ़ता है, लेकिन अन्य कारणों से कम उम्र में भी हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। यदि हल्की चोट के बाद भी तेज दर्द हो या हड्डियों के कमजोर होने का जोखिम हो, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
6. लंबे समयतक गलत पोस्चर में बैठना
आजकल मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर पर लंबे समय तक काम करने की आदत के कारण कई लोगों को पीठ दर्द की शिकायत होने लगी है। लगातार झुककर बैठना, कुर्सी पर सही सहारा न मिलना और लंबे समय तक एक ही स्थिति में बने रहना मांसपेशियों पर दबाव बढ़ा सकता है। ऐसी स्थिति में गर्दन, कंधों और पीठ के आसपास दर्द या अकड़न हो सकती है। बैठने की मुद्रा सुधारना, बीच-बीच में उठकर चलना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना इस परेशानी को कम करने में मदद कर सकता है।

7. गठिया और जोड़ों से जुड़ी समस्याएं
कुछ प्रकार के गठिया में रीढ़ की हड्डी और उसके आसपास के जोड़ों में दर्द तथा अकड़न हो सकती है। उदाहरण के लिए, एंकायलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस नामक बीमारी में पीठ के निचले हिस्से और कूल्हों के आसपास दर्द हो सकता है। इसमें कुछ लोगों को सुबह उठने के बाद अधिक अकड़न महसूस होती है, जो गतिविधि करने से कम हो सकती है। यदि लंबे समय से पीठ दर्द बना हुआ है और सुबह की अकड़न भी होती है, तो डॉक्टर से सलाह लें। समय पर पहचान होने से उचित उपचार शुरू किया जा सकता है।
8. कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं
लगातार पीठ दर्द के पीछे कभी-कभी संक्रमण, चोट या दूसरी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। बहुत कम मामलों में रीढ़ की हड्डी से जुड़ी गंभीर बीमारी या कैंसर भी इसका कारण बन सकता है।हालांकि, केवल पीठ दर्द होने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को गंभीर बीमारी है। लेकिन बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना, लगातार बुखार, रात में बढ़ने वाला दर्द या पहले कैंसर की बीमारी रह चुकी हो, तो डॉक्टर को इन बातों की जानकारी जरूर दें।

पीठ दर्द के साथ इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
पीठ दर्द के साथ कुछ लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी हो सकता है।
– अचानक बहुत तेज दर्द शुरू होना या किसी गंभीर चोट के बाद दर्द होना।
– दोनों पैरों में कमजोरी, सुन्नपन या झनझनाहट बढ़ना।
– पेशाब या मल पर नियंत्रण खोना।
– जांघों के बीच या जननांगों के आसपास सुन्नपन महसूस होना।
– पीठ दर्द के साथ बुखार, ठंड लगना या बहुत अस्वस्थ महसूस करना।
– बिना कारण वजन कम होना या दर्द का लगातार बढ़ते जाना।
विशेष रूप से पेशाब-मल पर नियंत्रण में बदलाव, जननांगों के आसपास सुन्नपन या तेजी से बढ़ती पैरों की कमजोरी रीढ़ की नसों पर गंभीर दबाव का संकेत हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।

डॉक्टर के अनुसार पीठ दर्द से बचाव के लिए क्या करें?
पीठ दर्द से बचाव और सामान्य मांसपेशियों के दर्द को कम करने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव करना फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, अगर दर्द किसी बीमारी के कारण हो रहा है, तो केवल घरेलू उपाय पर्याप्त नहीं होंगे।
1. बैठने और उठने का तरीका सुधारें
कुर्सी पर बैठते समय पीठ को उचित सहारा दें और पैरों को जमीन पर टिकाकर रखें। मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करते समय लगातार आगे की ओर झुकने से बचें। लंबे समय तक बैठकर काम करने पर हर 30 से 60 मिनट में थोड़ी देर उठकर चलें या शरीर को आराम दें।
2. नियमित रूप से पैदल चलें
यदि दर्द हल्का है और चलने में परेशानी नहीं हो रही, तो अपनी क्षमता के अनुसार नियमित पैदल चलना उपयोगी हो सकता है। धीरे-धीरे गतिविधि बढ़ाएं और ऐसी हरकतों से बचें जिनसे दर्द बढ़ता हो।बहुत ज्यादा आराम करते हुए लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहना सामान्य पीठ दर्द में ठीक होने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है। इसलिए दर्द सहन करने की सीमा में सामान्य गतिविधियां जारी रखना अक्सर बेहतर होता है।

3. भारी सामान उठाते समय सावधानी रखें
भारी सामान उठाते समय अचानक कमर से झुकने या शरीर को मोड़ने से बचें। सामान को शरीर के पास रखें और घुटनों को मोड़कर सावधानी से उठाएं। यदि वजन बहुत अधिक है, तो अकेले उठाने की कोशिश न करें।
4. गर्म सिकाई से मिल सकती है राहत
मांसपेशियों में खिंचाव या अकड़न होने पर गर्म सिकाई से कुछ लोगों को आराम मिल सकता है। इसके लिए गर्म पानी की थैली को तौलिए में लपेटकर प्रभावित हिस्से पर थोड़ी देर रखें। बहुत गर्म थैली सीधे त्वचा पर न लगाएं और सिकाई करते समय सो न जाएं। यदि प्रभावित जगह पर संवेदना कम है या त्वचा की समस्या है, तो विशेष सावधानी बरतें।
5. हल्की स्ट्रेचिंग और व्यायाम करें
पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और लचीलापन बनाए रखने के लिए उचित व्यायाम मददगार हो सकते हैं। लेकिन हर व्यायाम सभी लोगों के लिए सही नहीं होता।यदि पीठ दर्द लंबे समय से है, स्लिप डिस्क की आशंका है या दर्द पैरों तक जा रहा है, तो व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लें। दर्द बढ़ने पर व्यायाम रोक दें।

6. सोने की मुद्रा और गद्दे पर ध्यान दें
ऐसी स्थिति में सोएं जिसमें पीठ को आराम मिले। करवट लेकर सोते समय घुटनों के बीच छोटा तकिया रखने से कुछ लोगों को आराम मिल सकता है। पीठ के बल सोने पर घुटनों के नीचे तकिया रखने से भी सहारा मिल सकता है। बहुत नरम या असुविधाजनक गद्दे पर सोने से परेशानी बढ़ सकती है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए एक ही प्रकार का गद्दा सबसे अच्छा हो, यह जरूरी नहीं है।
7. वजन और खानपान का ध्यान रखें
स्वस्थ वजन बनाए रखना, संतुलित भोजन करना और नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाना पीठ की सेहत के लिए उपयोगी है। भोजन में प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन डी के उचित स्रोत शामिल करें। यदि हड्डियों की कमजोरी या विटामिन की कमी का संदेह हो, तो डॉक्टर से सलाह लें। बिना जांच के कैल्शियम या विटामिन डी की अधिक मात्रा वाली दवाएं शुरू न करें।

कितने दिनों तक पीठ दर्द रहने पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
यदि पीठ दर्द हल्का है और मांसपेशियों में खिंचाव के कारण हुआ है, तो कुछ दिनों में सुधार हो सकता है। लेकिन दर्द लगातार बना रहे, बार-बार लौटे या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी पैदा करे, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।यदि दर्द कुछ सप्ताह तक बना रहता है या घरेलू उपायों से सुधार नहीं होता, तो चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है। वहीं, तेज दर्द, गंभीर चोट, बुखार, पैरों में कमजोरी या पेशाब-मल पर नियंत्रण में बदलाव होने पर इंतजार नहीं करना चाहिए।डॉक्टर जरूरत के अनुसार शारीरिक जांच और अन्य परीक्षणों की सलाह दे सकते हैं। हर पीठ दर्द में एक्स-रे या एमआरआई की जरूरत नहीं होती। जांच का निर्णय लक्षणों और चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है।
कई दिनों तक पीठ दर्द बने रहने के पीछे मांसपेशियों में खिंचाव, गलत पोस्चर, रीढ़ की समस्या या कुछ अन्य स्वास्थ्य कारण हो सकते हैं। ज्यादातर मामलों में पीठ दर्द गंभीर नहीं होता, लेकिन दर्द के साथ दिखाई देने वाले दूसरे लक्षणों को समझना जरूरी है।
नियमित शारीरिक गतिविधि, सही तरीके से बैठना, भारी सामान उठाते समय सावधानी और संतुलित खानपान पीठ को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। यदि दर्द लगातार बना हुआ है या उसके साथ कोई चेतावनी वाला लक्षण दिखाई दे रहा है, तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी डॉक्टर की जांच, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। पीठ दर्द का सही कारण जानने और उचित इलाज के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श लें। गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।

