By: Vikash Kumar (Vicky)
Aaj Ka Panchang 16 October 2026: आज 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है। नवरात्रि की षष्ठी तिथि पर मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है। वहीं, आज सरस्वती आवाहन भी किया जाएगा, जो देवी सरस्वती की पूजा के पांच दिवसीय क्रम का पहला चरण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की आराधना से साहस, शक्ति और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है, जबकि मां सरस्वती की उपासना विद्या, बुद्धि और ज्ञान के लिए विशेष मानी जाती है। अगर आप आज पूजा-पाठ, व्रत या किसी शुभ कार्य की योजना बना रहे हैं, तो तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल और शुभ मुहूर्त की जानकारी जरूर जान लें। आइए जानते हैं 16 अक्टूबर 2026 का संपूर्ण पंचांग, मां कात्यायनी की पूजा का महत्व और सरस्वती आवाहन का समय।

Aaj Ka Panchang 16 October 2026: आज का पंचांग एक नजर में
दिन: शुक्रवार
तिथि: आश्विन शुक्ल पक्ष षष्ठी, 17 अक्टूबर की सुबह लगभग 5:54 बजे तक
पक्ष: शुक्ल पक्ष
मास: आश्विन
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1948
नक्षत्र: ज्येष्ठा सुबह लगभग 6:47 बजे तक, इसके बाद मूल नक्षत्र
योग: शोभन योग रात लगभग 10:06 बजे तक, इसके बाद अतिगण्ड योग
करण: कौलव, इसके बाद तैतिल
सूर्य राशि: कन्या
चंद्र राशि: सुबह लगभग 6:47 बजे तक वृश्चिक, इसके बाद धनु
ऋतु: शरद ऋतु
आज का पर्व: शारदीय नवरात्रि की षष्ठी, मां कात्यायनी पूजा और सरस्वती आवाहन।
पंचांग की गणना स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए अपने शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय देखना उचित रहेगा।

आज मां कात्यायनी की पूजा का क्या है महत्व?
शारदीय नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी शक्ति, साहस और धर्म की रक्षा का प्रतीक हैं। देवी का स्वरूप तेजस्वी माना गया है और उनका वाहन सिंह है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां कात्यायनी की पूजा करने से भक्तों को आत्मबल और सकारात्मकता प्राप्त होती है। विवाह संबंधी मनोकामनाओं के लिए भी मां कात्यायनी की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। नवरात्रि के छठे दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल की सफाई करने के बाद मां दुर्गा और मां कात्यायनी का ध्यान करें। देवी को फूल, फल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद मंत्र जाप और आरती करें।

मां कात्यायनी का मंत्र:
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।
धार्मिक आस्था के अनुसार, इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करके मां से सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।

आज सरस्वती आवाहन क्यों है खास?
नवरात्रि के दौरान देवी सरस्वती की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। कई परंपराओं में नवरात्रि के अंतिम दिनों में विद्या, ज्ञान, कला और बुद्धि की देवी मां सरस्वती की विशेष आराधना की जाती है। इसी पूजा क्रम की शुरुआत सरस्वती आवाहन से होती है। आवाहन का अर्थ है देवी को पूजा के लिए आमंत्रित करना। दक्षिण भारत सहित कई क्षेत्रों में सरस्वती आवाहन के दिन विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। विद्यार्थी, शिक्षक, कलाकार और ज्ञान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले श्रद्धालु मां सरस्वती का स्मरण करते हैं।इस वर्ष 16 अक्टूबर को सरस्वती आवाहन और 17 अक्टूबर को सरस्वती पूजा का दिन बताया गया है। हालांकि, पूजा की विधि और समय क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अलग हो सकते हैं। सरस्वती आवाहन के लिए दिल्ली-एनसीआर में दोपहर लगभग 3:33 बजे से शाम 5:51 बजे तक का समय बताया गया है। यह समय स्थानीय गणना पर आधारित है, इसलिए दूसरे शहरों में पूजा करने से पहले स्थानीय पंचांग से पुष्टि कर लें।

Aaj Ka Rahu Kaal 16 October 2026: आज राहुकाल कब है?
शुक्रवार को राहुकाल का समय विशेष रूप से देखा जाता है। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल में नए शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। आज 16 अक्टूबर 2026 को दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लिए राहुकाल सुबह लगभग 10:40 बजे से दोपहर 12:06 बजे तक बताया गया है। कुछ पंचांगों में इसकी गणना में थोड़ा अंतर मिल सकता है। यदि आप आज कोई नया कारोबार शुरू करने, महत्वपूर्ण समझौता करने या मांगलिक कार्य की शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं, तो स्थानीय पंचांग के अनुसार समय का चयन करें। राहुकाल को लेकर प्रचलित मान्यताएं धार्मिक परंपराओं का हिस्सा हैं।

आज के शुभ मुहूर्त 16 अक्टूबर 2026
आज के दिन पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्यों के लिए कुछ मुहूर्त इस प्रकार बताए गए हैं।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह लगभग 4:42 बजे से 5:32 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह लगभग 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर लगभग 2:01 बजे से 2:47 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम लगभग 5:51 बजे से 6:16 बजे तक।
निशिता मुहूर्त: रात लगभग 11:42 बजे से 17 अक्टूबर की रात 12:32 बजे तक।
ध्यान रखें कि ये समय दिल्ली-एनसीआर के लिए प्रकाशित पंचांग गणना पर आधारित हैं। अभिजीत मुहूर्त का कुछ हिस्सा राहुकाल से भी मेल खा सकता है। इसलिए किसी विशेष अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग या पुरोहित से समय की पुष्टि करना बेहतर होगा।

आज का सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
पंचांग में सूर्योदय और सूर्यास्त का विशेष महत्व होता है। व्रत, पूजा और दैनिक धार्मिक अनुष्ठानों के समय निर्धारण में इनका उपयोग किया जाता है। दिल्ली-एनसीआर के लिए आज सूर्योदय लगभग सुबह 6:22 से 6:26 बजे के बीच और सूर्यास्त लगभग शाम 5:47 से 5:51 बजे के बीच बताया गया है। अलग-अलग पंचांगों और गणना पद्धतियों के कारण समय में थोड़ा अंतर संभव है। यदि आप नवरात्रि का व्रत रख रहे हैं, तो व्रत और पारण से संबंधित निर्णय अपनी परंपरा तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार लें।
षष्ठी तिथि कब तक रहेगी?
आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। पंचांग के अनुसार, यह तिथि 17 अक्टूबर 2026 को सुबह लगभग 5:54 बजे तक रहेगी। इसके बाद सप्तमी तिथि शुरू होगी। इसलिए 16 अक्टूबर को दिनभर और शाम को नवरात्रि की षष्ठी तिथि रहेगी। तिथि का निर्धारण चंद्रमा की स्थिति के आधार पर होता है, इसलिए अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख और हिंदू तिथि का समय हमेशा एक जैसा नहीं होता।

शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा का महत्व
शुक्रवार का दिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी की आराधना के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मां लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी कहा जाता है। इस दिन श्रद्धालु घर की साफ-सफाई करते हैं, पूजा स्थल पर दीपक जलाते हैं और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। आप अपनी श्रद्धा के अनुसार मां लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी अच्छे कर्मों में शामिल माना जाता है। ध्यान रखें कि पूजा-पाठ का उद्देश्य श्रद्धा, आत्मिक शांति और सकारात्मकता है। आर्थिक समृद्धि के लिए मेहनत, बचत और सोच-समझकर लिए गए फैसले भी जरूरी हैं।

आज के पंचांग से जुड़ी जरूरी बातें
16 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि की षष्ठी तिथि है। आज मां कात्यायनी की पूजा की जाएगी और सरस्वती आवाहन का भी विशेष महत्व है। षष्ठी तिथि 17 अक्टूबर की सुबह लगभग 5:54 बजे तक रहेगी। राहुकाल का समय शहर के अनुसार बदल सकता है, इसलिए किसी भी विशेष पूजा या मांगलिक कार्य के लिए स्थानीय पंचांग देखना बेहतर रहेगा।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रकाशित पंचांग गणनाओं पर आधारित है। पूजा के मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय और अन्य समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। किसी विशेष अनुष्ठान से पहले स्थानीय पंचांग या योग्य पुरोहित से पुष्टि करें। इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भविष्यवाणी या निश्चित परिणाम की गारंटी न समझें।

