By: Vikash Kumar (Vicky)

Aaj Ka Panchang 17 October 2026: आज 17 अक्टूबर 2026, शनिवार का दिन है। शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि की उपासना करने से भक्तों को भय और नकारात्मकता से मुक्ति पाने का आशीर्वाद मिलता है। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर भक्त विधि-विधान से माता की पूजा करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले पंचांग देखना महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के माध्यम से तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, शुभ मुहूर्त और राहुकाल की जानकारी मिलती है। यदि आप आज पूजा-पाठ, व्रत, दान या किसी शुभ कार्य की योजना बना रहे हैं, तो यहां जानिए 17 अक्टूबर 2026 का पंचांग, मां कालरात्रि की पूजा का महत्व, शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय।
आज का पंचांग 17 अक्टूबर 2026
आज शनिवार है और हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। आज का दिन मां कालरात्रि की आराधना और शनिदेव के स्मरण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
– दिन: शनिवार
– तिथि: शुक्ल पक्ष सप्तमी
– मास: आश्विन
– पक्ष: शुक्ल पक्ष
– नक्षत्र: मूल, इसके बाद पूर्वाषाढ़ा
– योग: अतिगण्ड, इसके बाद सुकर्मा
– करण: गर, इसके बाद वणिज
– विक्रम संवत: 2083
– देवी आराधना: मां कालरात्रि
– सूर्योदय: सुबह लगभग 5:48 बजे
– सूर्यास्त: शाम लगभग 5:19 बजे
पंचांग की गणना स्थान के अनुसार बदल सकती है। ऊपर दिए गए सूर्योदय और सूर्यास्त के समय बिहार के मुजफ्फरपुर क्षेत्र के अनुसार हैं।

मां कालरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त
शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। माता का स्वरूप अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि उनकी आराधना से भक्तों को साहस, शक्ति और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है।
आज मुजफ्फरपुर क्षेत्र के स्थानीय पंचांग के अनुसार अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:10 बजे से 11:56 बजे तक रह सकता है। यह समय सामान्य शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मां कालरात्रि की पूजा के लिए अपने घर की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार समय निर्धारित करना उचित रहेगा।
नवरात्रि में सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ करके माता की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। माता को पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती या मां कालरात्रि के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक पाठ कर सकते हैं।

आज राहुकाल का समय क्या है?
हिंदू पंचांग में राहुकाल को ऐसा समय माना जाता है, जिसमें परंपरागत रूप से नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। आज शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को मुजफ्फरपुर क्षेत्र के अनुसार राहुकाल सुबह 8:41 बजे से 10:07 बजे तक रह सकता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचा जाता है। हालांकि, नियमित पूजा-पाठ, जप और पहले से चल रहे दैनिक धार्मिक कार्य अपनी परंपरा के अनुसार किए जा सकते हैं।

आज के प्रमुख मुहूर्त और काल
– ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:12 बजे से 5:00 बजे तक
– अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:10 बजे से 11:56 बजे तक
– राहुकाल: सुबह 8:41 बजे से 10:07 बजे तक
– यमगण्ड: दोपहर 1:00 बजे से 2:26 बजे तक
– गुलिक काल: सुबह 5:48 बजे से 7:14 बजे तक
ये समय मुजफ्फरपुर के स्थानीय पंचांग पर आधारित हैं। देवघर, गोड्डा या किसी अन्य शहर में सूर्योदय और स्थानीय गणना के कारण समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।

मां कालरात्रि की पूजा क्यों की जाती है?
मां कालरात्रि मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में सातवां स्वरूप हैं। उनका स्वरूप भक्तों को यह संदेश देता है कि जीवन में आने वाली कठिनाइयों और भय का सामना साहस के साथ करना चाहिए। माता को अज्ञान, भय और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उन्हें संकटों से लड़ने की शक्ति प्रदान करती हैं। नवरात्रि के सातवें दिन माता की पूजा करने वाले भक्त परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।
मां कालरात्रि को क्या भोग लगाएं?
धार्मिक परंपराओं में मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार फल, मिठाई और अन्य सात्विक नैवेद्य भी चढ़ा सकते हैं।

भोग लगाने से पहले पूजा स्थल को स्वच्छ रखें और माता के सामने श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटा जा सकता है। यदि आप व्रत कर रहे हैं, तो अपनी सेहत और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार खानपान रखें।
मां कालरात्रि का मंत्र
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना करते समय इस मंत्र का जाप किया जा सकता है:
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः।
मान्यता है कि श्रद्धा और एकाग्रता के साथ मंत्र जाप करने से मन को शांति मिलती है और भक्तों में सकारात्मक भाव विकसित होता है। आप अपनी सुविधा के अनुसार मंत्र का जाप कर सकते हैं।

शनिवार को शनिदेव की पूजा का महत्व
आज शनिवार होने के कारण शनिदेव की पूजा और स्मरण का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनिदेव न्याय और कर्म के प्रतीक हैं। इस दिन जरूरतमंदों की सहायता करना, बुजुर्गों का सम्मान करना और अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाना अच्छे कर्मों में गिना जाता है।
भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार शनिदेव के सामने दीपक जला सकते हैं और जरूरतमंदों को भोजन या आवश्यक वस्तुएं दान कर सकते हैं। किसी भी धार्मिक उपाय को अपनी आस्था और सामर्थ्य के अनुसार ही अपनाना चाहिए।

आज के दिन किन बातों का रखें ध्यान?
नवरात्रि के सातवें दिन पूजा-पाठ करते समय स्वच्छता और श्रद्धा का ध्यान रखें। घर में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखें और किसी के प्रति कटु वचन बोलने से बचें। व्रत रखने वाले लोग अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए ही उपवास करें। यदि किसी को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है, तो कठोर उपवास करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित होगा।

किसी नए काम, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय के लिए शुभ मुहूर्त देखते समय अपने शहर के पंचांग की जानकारी अवश्य जांच लें। धार्मिक मान्यताओं के साथ व्यावहारिक परिस्थितियों को भी महत्व देना जरूरी है।
इस लेख में दी गई पंचांग संबंधी जानकारी धार्मिक मान्यताओं और उपलब्ध स्थानीय पंचांग गणनाओं पर आधारित है। शुभ मुहूर्त, राहुकाल और अन्य समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। किसी विशेष पूजा या अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग अथवा योग्य पंडित से पुष्टि कर लें। यह लेख केवल सामान्य धार्मिक जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।
