By: Mala Mandal
देवघर। झारखंड से बाहर दूसरे राज्यों में रोजगार की तलाश में जाने वाले श्रमिकों की सुरक्षा और उनके आश्रितों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार की ओर से संचालित योजनाओं के तहत लाभ दिया जा रहा है। इसी कड़ी में देवघर जिले के सारवां प्रखंड अंतर्गत बैजुकुरा गांव निवासी स्वर्गीय पुष्पेंद्र कुमार साह की पत्नी हिना कुमारी को मुख्यमंत्री झारखंड प्रवासी श्रमिक दुर्घटना कोष के तहत 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को श्रम अधीक्षक देवघर शैलेन्द्र कुमार साह ने उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवानियां के निर्देश पर लाभुक को चेक सौंपा। इस सहायता राशि से दुर्घटना में अपने पति को खो चुकी महिला को आर्थिक संबल देने का प्रयास किया गया है। घटना के बाद परिवार के सामने उत्पन्न आर्थिक चुनौतियों के बीच सरकारी सहायता मिलने से आश्रित परिवार को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

महाराष्ट्र में काम करने के दौरान हुई थी श्रमिक की मौत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैजुकुरा गांव निवासी पुष्पेंद्र कुमार साह रोजगार के सिलसिले में महाराष्ट्र गए थे। वहां वह एक किचन में काम कर रहे थे। इसी दौरान 19 सितंबर 2026 को दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पति की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी हिना कुमारी ने सरकारी सहायता प्राप्त करने के लिए संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवेदन दिया। परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए हिना कुमारी ने सारवां के प्रखंड विकास पदाधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन की जांच और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद इसे श्रम अधीक्षक, देवघर के पास भेजा गया। इसके बाद श्रम विभाग की ओर से मामले में त्वरित कार्रवाई की गई।

जांच और अनुमोदन के बाद सौंपा गया चेक
आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानियां के अनुमोदन से मुख्यमंत्री झारखंड प्रवासी श्रमिक दुर्घटना कोष के तहत 50 हजार रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई। शनिवार को श्रम अधीक्षक शैलेन्द्र कुमार साह ने मृतक की आश्रित पत्नी हिना कुमारी को चेक के माध्यम से राशि प्रदान की। इस दौरान संबंधित पंचायत की मुखिया भी उपस्थित रहीं। इस पहल के माध्यम से श्रम विभाग ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि दूसरे राज्यों में काम करने के दौरान किसी श्रमिक की मृत्यु होने पर पात्र आश्रितों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के लिए विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जाती है। हालांकि, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए श्रमिकों का निबंधन और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना महत्वपूर्ण है।

श्रमाधान पोर्टल पर निबंधन कराने की अपील
चेक सौंपने के दौरान श्रम अधीक्षक शैलेन्द्र कुमार साह ने बैजुकुरा पंचायत की मुखिया को राज्य से बाहर रोजगार के लिए जाने वाले श्रमिकों के निबंधन और उनके लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने पंचायत स्तर पर अधिक से अधिक श्रमिकों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया। श्रम अधीक्षक ने पंचायत में जागरूकता शिविर आयोजित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की, ताकि प्रवासी श्रमिकों की पहचान कर उनका निबंधन कराया जा सके और उन्हें सरकार की ओर से मिलने वाले लाभों के बारे में बताया जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। ऐसे में योजनाओं की जानकारी और समय पर निबंधन उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

दुर्घटना में मृत्यु होने पर पंजीकृत श्रमिक के आश्रित को दो लाख रुपये
श्रम विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, झारखंड राज्य से बाहर काम करने जाने वाले श्रमिकों को श्रमाधान पोर्टल पर अपना निबंधन अवश्य कराना चाहिए। विभाग ने बताया कि संबंधित योजना के तहत दुर्घटना अथवा प्राकृतिक आपदा में श्रमिक की मृत्यु होने पर पंजीकृत कर्मकार के आश्रित को दो लाख रुपये की सहायता राशि दिए जाने का प्रावधान है। वहीं, अपंजीकृत कर्मकार के आश्रितों के लिए देय सहायता राशि डेढ़ लाख रुपये बताई गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य श्रमिकों के परिवारों को संकट की स्थिति में आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना है। रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने वाले श्रमिकों को यात्रा शुरू करने से पहले अपने निबंधन की स्थिति और योजना की पात्रता की जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।

दोनों आंखों या दोनों अंगों की क्षति पर भी सहायता
श्रम विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, दुर्घटना में किसी पंजीकृत कर्मकार की दोनों आंखों या दोनों अंगों की हानि होने पर दो लाख रुपये की सहायता राशि का प्रावधान है। वहीं, अपंजीकृत कर्मकार के लिए इस श्रेणी में डेढ़ लाख रुपये की सहायता राशि निर्धारित बताई गई है। इसी तरह, दुर्घटना में एक आंख या एक अंग की हानि होने पर पंजीकृत कर्मकार को एक लाख रुपये तथा अपंजीकृत कर्मकार को 75 हजार रुपये की सहायता दिए जाने की जानकारी दी गई है। इन प्रावधानों का लाभ निर्धारित नियमों, पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर दिया जाता है।

मृत श्रमिक के शव को पैतृक आवास तक लाने के लिए 50 हजार रुपये तक की सहायता
श्रम विभाग के अनुसार, सामान्य मृत्यु की स्थिति में मृत श्रमिक के शव को पैतृक आवास तक लाने के लिए अधिकतम 50 हजार रुपये की सहायता राशि का प्रावधान भी है। विभाग की जानकारी के मुताबिक, यह लाभ पंजीकृत और अपंजीकृत दोनों श्रेणियों के मृत श्रमिकों के आश्रितों को नियमानुसार दिया जाता है। यह प्रावधान उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके सदस्य रोजगार के सिलसिले में अपने गृह राज्य से दूर रहते हैं। दूसरे राज्य में मृत्यु होने पर शव को घर तक लाने में परिवार को आर्थिक और अन्य कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में सरकारी सहायता परिवार को आवश्यक सहयोग प्रदान कर सकती है।

प्रवासी श्रमिकों को जागरूक करने पर जोर
देवघर जिला प्रशासन और श्रम विभाग की इस पहल के माध्यम से प्रवासी श्रमिकों के निबंधन और कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। पंचायत प्रतिनिधियों से भी अपेक्षा की गई है कि वे अपने क्षेत्र के श्रमिकों को योजनाओं की जानकारी दें और निबंधन के लिए प्रेरित करें।

श्रम विभाग की अपील है कि झारखंड से बाहर काम करने जाने वाले श्रमिक अपना निबंधन श्रमाधान पोर्टल पर जरूर कराएं। इससे दुर्घटना, मृत्यु या अन्य पात्र परिस्थितियों में सरकारी योजनाओं के तहत सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया में मदद मिल सकती है। श्रमिकों और उनके परिवारों को योजना की शर्तों, जरूरी दस्तावेजों तथा आवेदन प्रक्रिया की जानकारी संबंधित श्रम कार्यालय से प्राप्त करनी चाहिए।

मुख्य संदेश: रोजगार के लिए दूसरे राज्य जाने से पहले श्रमिक अपना निबंधन अवश्य कराएं, ताकि जरूरत के समय वे और उनके आश्रित सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए पात्रता के अनुसार आवेदन कर सकें।

