By: Vikash Kumar (Vicky)

Aaj Ka Panchang 25 October 2026: आज रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को शरद पूर्णिमा और कोजागरी पूर्णिमा का पावन अवसर है। हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें अमृत के समान गुणकारी होती हैं। इसी कारण कई स्थानों पर लोग रात में खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखते हैं और चंद्रमा की रोशनी में पूजा-अर्चना करते हैं।
आज के पंचांग में हर्षण योग, रेवती नक्षत्र और पूर्णिमा तिथि से जुड़े विशेष संयोग महत्वपूर्ण हैं। शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी की पूजा, चंद्रदेव को अर्घ्य देने और रात्रि जागरण की परंपरा से भी जोड़ा जाता है। हालांकि, पंचांग के समय अलग-अलग शहरों में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।
अगर आप भी आज पूजा-पाठ, व्रत या किसी शुभ कार्य की योजना बना रहे हैं, तो आइए जानते हैं 25 अक्टूबर 2026 का संपूर्ण पंचांग, तिथि, नक्षत्र, योग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, चंद्रोदय का समय और शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व।

आज का पंचांग 25 अक्टूबर 2026
आज का दिन रविवार है और हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह समाप्त होकर पूर्णिमा तिथि में प्रवेश करेगी। इस दिन शरद पूर्णिमा और कोजागरी पूजा का पर्व मनाया जा रहा है।
दिन: रविवार
तिथि: शुक्ल पक्ष चतुर्दशी सुबह 11:55 बजे तक, इसके बाद पूर्णिमा तिथि
हिंदू मास: आश्विन
पक्ष: शुक्ल पक्ष
विक्रम संवत: 2083
नक्षत्र: रेवती शाम 7:22 बजे तक, इसके बाद अश्विनी
योग: हर्षण योग शाम 5:22 बजे तक, इसके बाद वज्र योग
करण: वणिज सुबह 11:55 बजे तक, इसके बाद विष्टि करण रात 10:52 बजे तक

वार: रविवार
पर्व: शरद पूर्णिमा, कोजागरी पूजा और आश्विन पूर्णिमा व्रत
ये समय पटना के पंचांग पर आधारित हैं। अन्य शहरों में सूर्योदय, चंद्रोदय और मुहूर्त के समय में अंतर हो सकता है।
शरद पूर्णिमा 2026: आज कब से शुरू होगी पूर्णिमा तिथि?
शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म के प्रमुख पूर्णिमा पर्वों में से एक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण माना जाता है। इस अवसर पर चंद्रदेव की पूजा और मां लक्ष्मी की आराधना करने की परंपरा है।
पंचांग के अनुसार, 25 अक्टूबर 2026 को सुबह लगभग 11:55 बजे पूर्णिमा तिथि शुरू होगी। यह तिथि 26 अक्टूबर 2026 को सुबह लगभग 9:41 बजे तक रहेगी।

इस दिन श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार व्रत रख सकते हैं और शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद पूजा-अर्चना कर सकते हैं। शरद पूर्णिमा की पूजा के लिए स्थानीय चंद्रोदय और तिथि के समय को ध्यान में रखना चाहिए।
हर्षण योग 2026: कब तक रहेगा यह योग?
25 अक्टूबर को हर्षण योग का विशेष उल्लेख किया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, हर्षण योग शाम लगभग 5:22 बजे तक रहेगा। इसके बाद वज्र योग शुरू होगा।
ज्योतिषीय मान्यताओं में हर्षण योग को प्रसन्नता, उत्साह और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। इस दौरान लोग पूजा-पाठ, धार्मिक कार्यों और अपने नियमित कार्यों के लिए शुभ समय का विचार करते हैं।
हालांकि, किसी विशेष कार्य के लिए मुहूर्त तय करते समय केवल योग ही नहीं, बल्कि तिथि, नक्षत्र, करण और स्थानीय पंचांग को भी ध्यान में रखना चाहिए।

आज का नक्षत्र: रेवती के बाद शुरू होगा अश्विनी नक्षत्र
आज चंद्रमा रेवती नक्षत्र में रहेंगे। पंचांग के अनुसार, रेवती नक्षत्र शाम लगभग 7:22 बजे तक रहेगा। इसके बाद अश्विनी नक्षत्र शुरू होगा।
ज्योतिषीय मान्यताओं में रेवती नक्षत्र को यात्रा, संवेदनशीलता और कार्यों को व्यवस्थित करने से जोड़ा जाता है। वहीं अश्विनी नक्षत्र को ऊर्जा, शुरुआत और सक्रियता का प्रतीक माना जाता है।
यदि आप आज कोई महत्वपूर्ण काम करने की योजना बना रहे हैं, तो अपनी आवश्यकता के अनुसार शुभ मुहूर्त और स्थानीय पंचांग देख सकते हैं।
आज सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय
शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व होता है। इसी वजह से श्रद्धालु आज चंद्रोदय के समय को जानना चाहते हैं।
पटना के लिए उपलब्ध पंचांग के अनुसार आज सूर्योदय सुबह 5:53 बजे और सूर्यास्त शाम 5:13 बजे होगा। चंद्रोदय का समय शाम लगभग 4:31 बजे बताया गया है। चंद्रमा अगले दिन 26 अक्टूबर को सुबह लगभग 5:45 बजे अस्त होंगे।

सूर्योदय: सुबह 5:53 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:13 बजे
चंद्रोदय: शाम 4:31 बजे
चंद्रास्त: 26 अक्टूबर को सुबह 5:45 बजे
ध्यान दें कि चंद्रोदय का समय स्थान के अनुसार बदलता है। अपने शहर में चंद्रमा के दर्शन और पूजा का सही समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग देखें।
आज के शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं में शुभ मुहूर्त को महत्वपूर्ण माना जाता है। लोग पूजा-पाठ, मंत्र जाप और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभ समय का चयन करते हैं।

25 अक्टूबर 2026 को पटना के पंचांग के अनुसार प्रमुख शुभ समय इस प्रकार हैं।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:12 बजे से 5:02 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:10 बजे से 11:56 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:26 बजे से 2:12 बजे तक
अमृत काल: शाम 5:05 बजे से 6:36 बजे तक
इन मुहूर्तों का समय अलग-अलग पंचांगों में गणना और स्थान के कारण कुछ भिन्न हो सकता है। शरद पूर्णिमा की विशेष पूजा के लिए स्थानीय समय और पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दें।

आज का राहुकाल कब रहेगा?
हिंदू पंचांग में राहुकाल को अशुभ समय माना जाता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में नए मांगलिक कार्यों की शुरुआत करने से बचा जाता है। हालांकि, नियमित पूजा-पाठ और दैनिक कार्यों के संबंध में परंपराएं अलग-अलग हो सकती हैं।
पटना के लिए 25 अक्टूबर 2026 को राहुकाल का समय दोपहर बाद लगभग 3:48 बजे से शाम 5:13 बजे तक रहेगा।
राहुकाल: दोपहर 3:48 बजे से शाम 5:13 बजे तक
यमगण्ड: सुबह 11:33 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 2:23 बजे से 3:48 बजे तक
वर्ज्य काल: सुबह 7:57 बजे से 9:28 बजे तक
शुभ कार्यों की योजना बनाते समय इन समयों के साथ स्थानीय पंचांग में दिए गए अन्य विवरण भी देख लें।

शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा का महत्व
शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। कई क्षेत्रों में इस पर्व को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागरण करने वाले भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं।
इसी मान्यता के कारण कई परिवारों में रात को मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। भक्त घर की साफ-सफाई करते हैं, दीपक जलाते हैं, फल-फूल अर्पित करते हैं और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।
कुछ क्षेत्रों में कोजागरी व्रत के दौरान रात में जागने और विशेष पूजा करने की परंपरा है। हालांकि, पूजा की विधि और समय क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार अलग हो सकते हैं।
शरद पूर्णिमा की रात खीर रखने की परंपरा क्यों है?
शरद पूर्णिमा पर खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा कई भारतीय परिवारों में प्रचलित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात चंद्रमा की किरणें विशेष महत्व रखती हैं। इसी विश्वास के आधार पर लोग खीर को कुछ समय के लिए खुले आसमान के नीचे रखते हैं और बाद में प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
कुछ लोग इसे अमृत वर्षा से जुड़ी मान्यता के रूप में देखते हैं। हालांकि, चांदनी में रखी खीर के किसी विशेष चिकित्सकीय लाभ का दावा वैज्ञानिक प्रमाण के बिना नहीं करना चाहिए। खीर को खुले में रखते समय साफ-सफाई और भोजन की सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है।
यदि आप इस परंपरा का पालन करना चाहते हैं, तो खीर को ढककर रखें और धूल, कीड़ों तथा अन्य बाहरी दूषित पदार्थों से बचाएं।
शरद पूर्णिमा पर कैसे करें चंद्रदेव की पूजा?
शरद पूर्णिमा पर श्रद्धालु अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार चंद्रदेव की पूजा करते हैं। पूजा के लिए सबसे पहले घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई कर लें। इसके बाद शाम को चंद्रमा के दर्शन होने पर श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है।
चंद्रदेव को जल अर्पित करने की परंपरा है। पूजा के दौरान फल, फूल और मिठाई चढ़ाई जा सकती है। इसके बाद परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।

जो लोग पूर्णिमा का व्रत रखते हैं, उन्हें अपनी परंपरा के अनुसार व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर कठिन उपवास रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
शरद पूर्णिमा पर किन बातों का रखें ध्यान?
शरद पूर्णिमा के दिन धार्मिक कार्यों के साथ-साथ अपनी दिनचर्या और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। यदि आप व्रत रख रहे हैं, तो अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार नियम अपनाएं।
पूजा के दौरान साफ-सफाई बनाए रखें। खीर या अन्य प्रसाद को खुले में लंबे समय तक रखने से बचें। पूजा के लिए चंद्रोदय का सही समय अपने शहर के अनुसार देखें, क्योंकि अलग-अलग स्थानों पर चंद्रमा निकलने का समय अलग हो सकता है।
धार्मिक मान्यताओं का पालन श्रद्धा और अपनी परंपरा के अनुसार करें। किसी भी शुभ कार्य का निर्णय लेते समय व्यावहारिक परिस्थितियों और जरूरी तथ्यों को भी ध्यान में रखें।
आज का पंचांग 25 अक्टूबर 2026: जानें दिन का धार्मिक महत्व
आज शरद पूर्णिमा के अवसर पर हर्षण योग, रेवती नक्षत्र और पूर्णिमा तिथि से जुड़े ज्योतिषीय विवरण विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। श्रद्धालु मां लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा करके सुख-समृद्धि की कामना कर सकते हैं।
आज पूर्णिमा तिथि सुबह लगभग 11:55 बजे शुरू होगी और 26 अक्टूबर को सुबह लगभग 9:41 बजे तक रहेगी। पटना के लिए चंद्रोदय का समय शाम लगभग 4:31 बजे है। हर्षण योग शाम लगभग 5:22 बजे तक रहेगा।
पंचांग के सभी समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं, इसलिए पूजा या किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान से पहले अपने शहर का पंचांग जरूर देख लें।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पारंपरिक पंचांग विवरण और सामान्य ज्योतिषीय जानकारियों पर आधारित है। पंचांग के समय शहर, स्थान और गणना पद्धति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। पूजा-पाठ और व्रत से संबंधित निर्णय अपनी पारिवारिक परंपरा तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार लें। यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित किया जा रहा है।
