By: Mala Mandal
Shukra Pradosh Vrat 2026 Date: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने की परंपरा है। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों को सुख-समृद्धि, शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। नवंबर 2026 का पहला प्रदोष व्रत बेहद खास रहने वाला है, क्योंकि इस बार धनतेरस के दिन ही शुक्र प्रदोष का संयोग बन रहा है। शुक्रवार का दिन होने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा। धनतेरस का त्योहार भी मां लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और कुबेर की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। ऐसे में एक ही दिन धनतेरस और प्रदोष व्रत पड़ने से धार्मिक दृष्टि से इस दिन का महत्व और बढ़ गया है। अगर आप भी नवंबर महीने में प्रदोष व्रत रखने की तैयारी कर रहे हैं, तो आइए जानते हैं इसकी सही तारीख, त्रयोदशी तिथि, पूजा मुहूर्त, व्रत विधि, पूजा सामग्री और धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से।

कब है नवंबर का पहला प्रदोष व्रत 2026?
हिंदू पंचांग के अनुसार नवंबर 2026 का पहला प्रदोष व्रत 6 नवंबर, शुक्रवार को रखा जाएगा। इस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रहेगी। शुक्रवार को पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है।
खास बात यह है कि 6 नवंबर को ही धनतेरस का पर्व भी मनाया जाएगा। ऐसे में इस दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती और धनतेरस पर माता लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व रहेगा।
प्रदोष व्रत की तारीख: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार
व्रत का नाम: शुक्र प्रदोष व्रत
पक्ष: कार्तिक कृष्ण पक्ष
तिथि: त्रयोदशी
विशेष संयोग: धनतेरस और शुक्र प्रदोष व्रत

शुक्र प्रदोष व्रत 2026: त्रयोदशी तिथि कब शुरू होगी?
प्रदोष व्रत प्रत्येक महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन सूर्यास्त के आसपास भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व है।
पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर 2026 को सुबह लगभग 10 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 7 नवंबर 2026 को सुबह लगभग 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी।
इसलिए प्रदोष व्रत 6 नवंबर को रखा जाएगा। हालांकि, पूजा के समय की गणना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार करनी चाहिए।
शुक्र प्रदोष व्रत 2026 पूजा मुहूर्त
प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में करना विशेष फलदायी माना जाता है। प्रदोष काल सूर्यास्त के आसपास का समय होता है। इस दौरान शिव परिवार की पूजा, मंत्र जाप और आरती की जाती है।
दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार 6 नवंबर 2026 को प्रदोष पूजा का समय लगभग शाम 5 बजकर 33 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा।

प्रदोष पूजा मुहूर्त: शाम 5:33 बजे से रात 7:57 बजे तक।
ध्यान दें कि यह समय दिल्ली की गणना के अनुसार है। देवघर, झारखंड समेत अन्य शहरों में सूर्यास्त के अंतर के कारण प्रदोष काल का समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय जरूर देख लें।
शुक्रवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत का क्या है महत्व?
हिंदू धर्म में सप्ताह के अलग-अलग दिनों में पड़ने वाले प्रदोष व्रत को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। सोमवार को सोम प्रदोष, मंगलवार को भौम प्रदोष, गुरुवार को गुरु प्रदोष और शुक्रवार को शुक्र प्रदोष कहा जाता है।
शुक्रवार का संबंध माता लक्ष्मी और सुख-सौभाग्य से भी माना जाता है। वहीं प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है।
ऐसी धार्मिक मान्यता है कि शुक्र प्रदोष का व्रत रखने और श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति, पारिवारिक समृद्धि और सौभाग्य की कामना पूरी होती है।
इस दिन भक्त भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, फूल और धतूरा अर्पित करते हैं। साथ ही माता पार्वती की पूजा करके परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

धनतेरस और शुक्र प्रदोष का एक साथ पड़ना क्यों है खास?
धनतेरस को दीपावली पर्व की शुरुआत का महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। लोग सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
वहीं प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित होता है। इस बार 6 नवंबर को धनतेरस और शुक्र प्रदोष एक साथ पड़ने के कारण भक्तों को एक ही दिन दो महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों पर पूजा करने का मौका मिलेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की पूजा करने के साथ माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है।
हालांकि, दोनों पूजाओं के लिए अलग-अलग धार्मिक विधियां और मुहूर्त हो सकते हैं। इसलिए धनतेरस की लक्ष्मी पूजा और प्रदोष काल की शिव पूजा के समय को अलग-अलग ध्यान में रखना चाहिए।

शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा विधि: ऐसे करें भगवान शिव की आराधना
प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें।
पूजा की विधि इस प्रकार है।
1. सुबह स्नान करने के बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और भगवान शिव के सामने दीपक जलाएं।
2. भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करके शुक्र प्रदोष व्रत रखने का संकल्प लें।
3. दिनभर अपनी सामर्थ्य और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत रखें। फलाहार या जल ग्रहण करने की परंपरा का पालन कर सकते हैं।
4. शाम को प्रदोष काल में दोबारा स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
5. भगवान शिव का जल और पंचामृत से अभिषेक करें। यदि शिवलिंग पर अभिषेक संभव न हो, तो घर में स्थापित शिव परिवार की प्रतिमा के सामने पूजा कर सकते हैं।
6. भगवान शिव को बेलपत्र, सफेद फूल, धतूरा और फल अर्पित करें।
7. माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री और पुष्प अर्पित करें।
8. भगवान शिव के मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें और प्रदोष व्रत की कथा सुनें।
9. अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें तथा परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करें।

शुक्र प्रदोष व्रत में किन चीजों का रखें ध्यान?
प्रदोष व्रत के दौरान धार्मिक नियमों और अपनी स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान रखना जरूरी है।
– व्रत के दिन मन और व्यवहार में शुद्धता बनाए रखने का प्रयास करें।
– किसी के प्रति गलत भावना या क्रोध रखने से बचें।
– पूजा में स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखें।
– भगवान शिव को तुलसी दल अर्पित करने की बजाय बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा का पालन करें।
– व्रत के दौरान अपनी सेहत के अनुसार फलाहार करें।
– यदि आपको डायबिटीज, गर्भावस्था या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो बिना चिकित्सकीय सलाह के निर्जला व्रत न रखें।

नवंबर 2026 में दूसरा प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा?
नवंबर महीने में पहला प्रदोष व्रत 6 नवंबर को धनतेरस के दिन रखा जाएगा। इसके बाद दूसरा प्रदोष व्रत 22 नवंबर 2026, रविवार को पड़ेगा।
रविवार को पड़ने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि रहेगी।
इस प्रकार नवंबर महीने में भक्तों को दो बार भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का अवसर मिलेगा।
नवंबर 2026 के प्रदोष व्रत की तारीखें एक नजर में
पहला प्रदोष व्रत: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार
प्रदोष का नाम: शुक्र प्रदोष
विशेष अवसर: धनतेरस
दूसरा प्रदोष व्रत: 22 नवंबर 2026, रविवार
प्रदोष का नाम: रवि प्रदोष

नवंबर 2026 का पहला प्रदोष व्रत 6 नवंबर, शुक्रवार को धनतेरस के दिन रखा जाएगा। शुक्रवार को पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष कहा जाएगा। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के साथ धनतेरस के अवसर पर माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की आराधना का भी विशेष महत्व रहेगा।

अगर आप भी इस दिन व्रत रखने वाले हैं, तो त्रयोदशी तिथि और प्रदोष काल का समय पहले से नोट कर लें। पूजा के दौरान श्रद्धा और नियमों का पालन करें तथा अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि जरूर करें।

इस लेख में दी गई जानकारी हिंदू पंचांग और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और पंचांगों में तिथि तथा पूजा मुहूर्त के समय में अंतर हो सकता है। किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग या योग्य पुरोहित से सलाह लें।

