By: Vikash Kumar (Vicky)

1 अप्रैल 2026, बुधवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। इस दिन चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है, जो हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपने पूर्ण स्वरूप में दिखाई देता है, जिसका प्रभाव मन, भावनाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा पर पड़ता है। इस दिन व्रत, दान और भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार पूर्णिमा के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है, जो किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है। इसके साथ ही अमृतकाल भी रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए बेहद लाभकारी समय होता है। ऐसे में यह दिन पूजा-पाठ, दान-पुण्य और नए कार्यों की शुरुआत के लिए विशेष रूप से फलदायी रहेगा।

1 अप्रैल 2026 का पंचांग
तिथि: चैत्र शुक्ल पूर्णिमा
वार: बुधवार
नक्षत्र: चित्रा (संभावित)
योग: सर्वार्थ सिद्धि योग
करण: वणिज और विष्टि
सूर्योदय: प्रातः लगभग 5:55 बजे
सूर्यास्त: सायं लगभग 6:20 बजे
शुभ मुहूर्त और अमृतकाल
अमृतकाल: सुबह से दोपहर के बीच विशेष शुभ समय (लगभग)
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:50 बजे से 12:40 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:30 बजे से 5:15 बजे तक
यह सभी समय पूजा, जप, तप और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं।

राहुकाल और अशुभ समय
राहुकाल: दोपहर 12:30 बजे से 2:00 बजे तक
यमगंड काल: सुबह 7:30 बजे से 9:00 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 10:30 बजे से 12:00 बजे तक
इन समयों में किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य को करने से बचना चाहिए।
पूर्णिमा व्रत और महत्व
पूर्णिमा का व्रत रखने से व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है। साथ ही चंद्र देव की आराधना करने से मन की अशांति दूर होती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन स्नान-दान करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्टों का निवारण होता है। गंगा स्नान या किसी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। यदि संभव न हो तो घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।
क्या करें और क्या न करें
पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें। व्रत रखें और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें। इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करें और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

इस दिन क्रोध, झूठ और विवाद से बचना चाहिए। किसी का अपमान न करें और अपशब्दों का प्रयोग न करें।
यह पंचांग और दी गई जानकारी सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं एवं धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। समय और तिथि में स्थान अनुसार परिवर्तन संभव है। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से पहले संबंधित विशेषज्ञ या पंडित की सलाह अवश्य लें।

