By: Vikash, Mala Mandal
धार्मिक महत्व और कालाष्टमी व्रत
10 अप्रैल 2026, शुक्रवार का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। आज कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है, जिसके कारण कालाष्टमी व्रत रखा जा रहा है। इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और भय, कष्ट व नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। आज का पंचांग कई महत्वपूर्ण ज्योतिषीय संकेत दे रहा है, जो शुभ और अशुभ कार्यों के निर्धारण में सहायक हो सकते हैं।

तिथि और व्रत का समय
पंचांग के अनुसार आज अष्टमी तिथि रात्रि तक प्रभावी रहेगी, इसके बाद नवमी तिथि का आरंभ होगा। इस कारण कालाष्टमी का व्रत और पूजन आज ही किया जाएगा। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान काल भैरव की पूजा करते हैं और रात्रि में विशेष आरती व भोग अर्पित करते हैं।

चंद्रमा का गोचर और प्रभाव
आज चंद्रमा धनु राशि में गोचर करते हुए दिन के दौरान मकर राशि में प्रवेश करेंगे। चंद्रमा का यह परिवर्तन कई राशियों के जीवन में मानसिक और व्यावसायिक बदलाव के संकेत दे सकता है। ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति के मन और भावनाओं को प्रभावित करती है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
सूर्योदय आज सुबह 06 बजकर 01 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 06 बजकर 44 मिनट पर होगा। दिन और रात की अवधि लगभग संतुलित रहेगी, जो साधना और पूजा के लिए अनुकूल मानी जाती है। चंद्रमा का उदय 11 अप्रैल को रात 02 बजकर 10 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त सुबह 11 बजकर 35 मिनट पर होगा।

राहुकाल और शुभ-अशुभ समय
अब बात करते हैं आज के शुभ और अशुभ समय की। शुक्रवार के दिन राहुकाल विशेष रूप से ध्यान देने योग्य होता है। इस दौरान किसी भी शुभ कार्य को करने से बचना चाहिए। वहीं अभिजीत मुहूर्त और अन्य शुभ समय में पूजा-पाठ, व्रत, दान और नए कार्यों की शुरुआत करना लाभकारी माना जाता है। कालाष्टमी के दिन विशेष रूप से रात्रि में पूजा का महत्व बताया गया है, इसलिए भक्तों को रात्रि के समय भगवान भैरव की आराधना करनी चाहिए।

योग और नक्षत्र का महत्व
आज का योग और नक्षत्र भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नक्षत्र की स्थिति के अनुसार किए गए कार्यों का फल अलग-अलग हो सकता है। इसलिए पंचांग देखकर ही किसी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत करना बेहतर माना जाता है। आज का दिन साधना, जप, तप और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है।

कालाष्टमी पर विशेष उपाय
कालाष्टमी के अवसर पर भक्त विशेष रूप से सरसों के तेल का दीपक जलाकर भगवान काल भैरव की पूजा करते हैं और उन्हें प्रसन्न करने के लिए भोग अर्पित करते हैं। इस दिन कुत्तों को भोजन कराना भी अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। ऐसा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

कालाष्टमी व्रत का आध्यात्मिक लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी का व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति को भय से मुक्ति मिलती है और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो जीवन में समस्याओं और बाधाओं से जूझ रहे हैं।
यह जानकारी ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ या पंडित की सलाह अवश्य लें।

