By: Vikash Kumar (Vicky)
हिंदू धर्म में किसी भी कार्य की शुरुआत से पहले पंचांग देखना शुभ माना जाता है। पंचांग के माध्यम से तिथि, नक्षत्र, योग, करण और ग्रहों की स्थिति की सटीक जानकारी मिलती है। 10 जनवरी 2026, शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष है। इस दिन माघ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि रहेगी। साथ ही हस्त नक्षत्र से चित्रा नक्षत्र में प्रवेश और अतिगण्ड योग से सुकर्मा योग का निर्माण होगा। शनिवार होने के कारण शनि देव की पूजा और उपाय विशेष फलदायी माने गए हैं।

10 जनवरी 2026 का पंचांग संक्षेप
तिथि: माघ कृष्ण अष्टमी
वार: शनिवार
नक्षत्र: हस्त (दोपहर 03:40 तक), उसके बाद चित्रा
योग: अतिगण्ड (सायं 04:58 तक), उसके बाद सुकर्मा
करण: बव (सुबह 08:24 तक), उसके बाद कौलव
चंद्र राशि: कन्या
सूर्य की स्थिति: उत्तरायण, दक्षिण गोल
ऋतु: शिशिर
विक्रम संवत: 2082
शक संवत: 1947
राष्ट्रीय मिति: पौष 21
हिजरी संवत: 1447 (रज्जब 20)
तिथि और नक्षत्र का समय
सप्तमी तिथि समाप्त: सुबह 08:24 बजे
अष्टमी तिथि प्रारंभ: सुबह 08:24 बजे के बाद
हस्त नक्षत्र समाप्त: अपराह्न 03:40 बजे
चित्रा नक्षत्र प्रारंभ: अपराह्न 03:40 बजे के बाद
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
सूर्योदय: सुबह 07:15 बजे
सूर्यास्त: शाम 05:41 बजे
आज के शुभ मुहूर्त 10 जनवरी 2026
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:27 से 06:21 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:13 से 02:55 बजे तक
निशीथ काल: दोपहर 12:02 से 12:56 बजे तक
गोधूलि बेला: शाम 05:39 से 06:07 बजे तक
इन समयों में पूजा-पाठ, जप, दान, संकल्प और शुभ कार्य करना फलदायी माना जाता है।

आज के अशुभ मुहूर्त 10 जनवरी 2026
राहुकाल: सुबह 09:00 से 10:30 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 06:00 से 07:30 बजे तक
यमगंड: दोपहर 01:30 से 03:30 बजे तक
दुर्मुहूर्त: सुबह 07:15 से 07:57 बजे तक
अमृत काल: सुबह 08:33 से 09:52 बजे तक
राहुकाल और यमगंड में शुभ कार्य करने से बचना
चाहिए, जबकि अमृत काल को विशेष रूप से शुभ माना गया है।
माघ कृष्ण अष्टमी का धार्मिक महत्व
माघ माह को स्नान, दान और तप का महीना कहा गया है। कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान, तिल-दान और भगवान विष्णु व शनि देव की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्म जीवन के कष्टों को कम करते हैं और शनि दोष से राहत दिलाते हैं।
आज का विशेष उपाय
शनिवार और अष्टमी तिथि के संयोग में शनि रक्षा कवच का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है। इससे शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और अन्य अशुभ प्रभावों में कमी आती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
यह पंचांग वैदिक गणनाओं और सामान्य पंचांग आधारित जानकारियों पर आधारित है। तिथियों, नक्षत्रों और मुहूर्त में स्थान और पंचांग भेद के अनुसार अंतर संभव है। किसी भी विशेष पूजा या अनुष्ठान से पहले स्थानीय पंचांग या योग्य विद्वान से पुष्टि अवश्य करें।

