By: Vikash Kumar (Vicky)
आज 22 जनवरी 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। माघ माह में पड़ रही विनायक चतुर्थी के कारण आज का दिन भगवान गणेश की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। साथ ही यह समय गुप्त नवरात्रि 2026 से भी जुड़ा हुआ है, जिसके कारण साधना, जप और दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है। पंचांग के अनुसार, आज श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर विघ्नहर्ता गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

आज का पंचांग और तिथि का महत्व
पंचांग के अनुसार आज माघ माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जिसे विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन गणेश जी की पूजा करने से कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और बुद्धि, विवेक तथा समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। विशेष रूप से विद्यार्थियों और व्यापारियों के लिए यह तिथि शुभ मानी जाती है।
विनायक चतुर्थी पर पूजा का विशेष लाभ
विनायक चतुर्थी के दिन गणेश जी को दूर्वा, मोदक और लड्डू अर्पित करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर रुके हुए काम पूरे होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। साथ ही विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। मिष्ठान का दान करने से पुण्य में वृद्धि होती है।

आज के शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार आज का दिन पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अनुकूल है। सुबह का समय गणेश पूजन के लिए उत्तम माना गया है। अभिजीत मुहूर्त में किए गए कार्यों में सफलता की संभावना अधिक रहती है। अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ समय देखकर पूजा करना और भी फलदायी रहेगा।
गुप्त नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
माघ माह की गुप्त नवरात्रि साधना और तंत्र-मंत्र की सिद्धि के लिए जानी जाती है। इस दौरान देवी की उपासना गुप्त रूप से की जाती है। साधक इस समय मंत्र जप, ध्यान और व्रत के माध्यम से विशेष सिद्धि प्राप्त करते हैं। विनायक चतुर्थी का संयोग इस दिन को और भी प्रभावशाली बनाता है।

आज क्या करें और क्या न करें
आज के दिन गणेश जी की पूजा से पहले मन और शरीर की शुद्धि पर ध्यान दें। सात्विक भोजन करें और क्रोध व नकारात्मक विचारों से दूर रहें। जरूरतमंदों को दान करना शुभ फल देता है। बिना सोचे-समझे किसी से विवाद करने से बचें।
यह पंचांग और धार्मिक जानकारी सामान्य मान्यताओं व ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। तिथि, मुहूर्त और समय में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी भी विशेष पूजा या निर्णय से पहले अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान पंडित की सलाह अवश्य लें।

