By: Vikash Kumar (Vicky)
भारत के एविएशन सेक्टर में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। देश के प्रमुख औद्योगिक समूह अदाणी ग्रुप और ब्राजील की दिग्गज विमान निर्माता कंपनी एम्ब्रेयर (Embraer) के बीच एक बड़ी रणनीतिक साझेदारी हुई है। इस समझौते के तहत अब भारत में ही रीजनल पैसेंजर विमान बनाए जाएंगे, जिससे न केवल देश की एविएशन इंडस्ट्री को मजबूती मिलेगी, बल्कि आम यात्रियों के लिए हवाई सफर भी सस्ता और सुलभ हो सकेगा।

‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगी नई उड़ान
यह साझेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को एक नई ऊंचाई देने वाली मानी जा रही है। अब तक भारत को रीजनल जेट विमानों के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन इस डील के बाद देश में ही विमानों का निर्माण, असेंबली और मेंटेनेंस संभव हो पाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, इससे भारत एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में रीजनल एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब बन सकता है।
कौन-से विमान बनेंगे भारत में?
एम्ब्रेयर दुनिया भर में अपने रीजनल जेट विमानों के लिए जाना जाता है, खासकर 70 से 130 सीटों वाले पैसेंजर एयरक्राफ्ट के लिए। साझेदारी के तहत भारत में इन विमानों के प्रमुख मॉडल्स का निर्माण किया जा सकता है, जो छोटे और मझोले शहरों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगे।

ये विमान कम ईंधन खपत, कम ऑपरेटिंग कॉस्ट और छोटी रनवे पर उड़ान भरने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं, जो भारत जैसे विशाल और विविध भौगोलिक देश के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगे।
उड़ान योजना को मिलेगी मजबूती
भारत सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘उड़ान’ के तहत छोटे शहरों और कस्बों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन अब तक विमानों की उपलब्धता और लागत एक बड़ी चुनौती रही है। भारत में ही विमानों के निर्माण से यह समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है।

स्थानीय स्तर पर बने विमान एयरलाइंस को कम कीमत पर उपलब्ध होंगे, जिससे नई एयरलाइंस को बाजार में उतरने का मौका मिलेगा और मौजूदा कंपनियां भी छोटे रूट्स पर ज्यादा उड़ानें शुरू कर सकेंगी।
हवाई सफर होगा सस्ता
एविएशन इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस साझेदारी का सबसे बड़ा फायदा आम यात्रियों को मिलेगा। विमानों की लागत कम होने, मेंटेनेंस आसान होने और ऑपरेशनल खर्च घटने से टिकट की कीमतों में कमी आने की संभावना है।

इसका सीधा असर छोटे शहरों से महानगरों की यात्रा पर पड़ेगा, जहां अभी हवाई टिकट महंगे होने के कारण लोग ट्रेन या बस का सहारा लेते हैं।
रोजगार और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा
अदाणी-एम्ब्रेयर साझेदारी से भारत में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। विमान निर्माण, इंजीनियरिंग, सप्लाई चेन, मेंटेनेंस और ग्राउंड सपोर्ट से जुड़े क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नौकरियां सृजित होंगी।

इसके साथ ही भारतीय युवाओं को एडवांस एविएशन टेक्नोलॉजी में ट्रेनिंग मिलने का रास्ता भी खुलेगा, जिससे देश का स्किल इकोसिस्टम और मजबूत होगा।
रक्षा और कार्गो सेक्टर में भी अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी केवल पैसेंजर विमानों तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में डिफेंस एविएशन, मिलिट्री ट्रांसपोर्ट और कार्गो एयरक्राफ्ट के निर्माण में भी सहयोग की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। भारत पहले ही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है और यह डील उस लक्ष्य को भी समर्थन दे सकती है।

वैश्विक एविएशन मैप पर भारत की मजबूत मौजूदगी
इस साझेदारी से भारत वैश्विक एविएशन सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बन सकता है। आज जहां अमेरिका, यूरोप और ब्राजील विमान निर्माण के बड़े केंद्र हैं, वहीं भारत भी इस सूची में मजबूती से अपनी जगह बना सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में भारत से बने रीजनल विमान दुनिया के अन्य देशों में भी एक्सपोर्ट किए जा सकते हैं।

अदाणी ग्रुप और एम्ब्रेयर की यह साझेदारी भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। इससे न केवल ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि हवाई सफर सस्ता, आसान और ज्यादा लोगों की पहुंच में होगा।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह साझेदारी भारत के आसमान में कितनी ऊंची उड़ान भरती है।

