By: Vikash Kumar (Vicky)
पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव अपने चरम पर पहुंचता नजर आ रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। हालिया घटनाक्रमों के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए ईरान छोड़ने की सलाह दी है। इससे क्षेत्र में संभावित सैन्य टकराव की आशंका को और बल मिला है।

सूत्रों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच पिछले कुछ दिनों से तीखी बयानबाजी और सैन्य गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक जहाजों की गतिविधियां बढ़ी हैं, वहीं ईरान ने भी अपने रक्षा तंत्र को सतर्क कर दिया है। इस बीच, किसी संभावित हमले की अटकलें तेज हो गई हैं, हालांकि दोनों देशों की ओर से आधिकारिक रूप से युद्ध की घोषणा नहीं की गई है।
Ministry of External Affairs की ओर से जारी परामर्श में कहा गया है कि ईरान में रह रहे भारतीय नागरिक, विशेषकर छात्र, व्यापारी और कामकाजी लोग, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्थायी रूप से देश छोड़ने पर विचार करें। भारतीय दूतावास लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और आपातकालीन संपर्क नंबर भी जारी किए गए हैं।

भारत के लिए यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि ईरान में हजारों भारतीय नागरिक रहते हैं। इनमें बड़ी संख्या छात्रों और मेडिकल प्रोफेशनल्स की है। किसी भी सैन्य संघर्ष की स्थिति में उनके फंसने का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव नया नहीं है। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और प्रतिबंधों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। पूर्व में भी कई बार हालात युद्ध जैसे बने, लेकिन कूटनीतिक प्रयासों से टकराव टलता रहा है।
हालांकि, हालिया सैन्य गतिविधियां सामान्य से अधिक मानी जा रही हैं। खुफिया रिपोर्ट्स के हवाले से कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने दावा किया है कि अमेरिका संभावित जवाबी कार्रवाई की तैयारी में है। वहीं ईरान ने भी चेतावनी दी है कि किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

अगर अमेरिका और ईरान के बीच सीधा सैन्य संघर्ष होता है, तो इसका असर सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतों में उछाल, शेयर बाजार में गिरावट और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर काफी हद तक निर्भर है।
ईरान में रह रहे भारतीयों के बीच भी चिंता का माहौल है। सोशल मीडिया पर कई भारतीय छात्रों ने अपनी चिंता जाहिर की है और सरकार से सुरक्षित निकासी की योजना स्पष्ट करने की मांग की है। कुछ लोग स्वयं टिकट बुक कर भारत लौटने की तैयारी में हैं।
दूतावास की ओर से कहा गया है कि फिलहाल एयरस्पेस खुला है और व्यावसायिक उड़ानें संचालित हो रही हैं, इसलिए नागरिक जल्द से जल्द सुरक्षित वापसी की योजना बनाएं। आवश्यकता पड़ने पर विशेष उड़ानों की व्यवस्था भी की जा सकती है।
तनाव के बीच कई देश मध्यस्थता की कोशिशों में जुटे हैं। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम समय तक कूटनीतिक समाधान की कोशिश जारी रहेगी, क्योंकि खुला युद्ध किसी के हित में नहीं है।

भारत ने भी संतुलित रुख अपनाते हुए शांति और संवाद पर जोर दिया है। भारत के ईरान और अमेरिका दोनों से रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं, इसलिए नई दिल्ली किसी भी प्रकार के टकराव से बचने की कोशिश में है।
फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है। हालांकि सैन्य गतिविधियों की बढ़ती रफ्तार और बयानबाजी से आशंकाएं बनी हुई हैं। आने वाले कुछ दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम बनता जा रहा है। भारत द्वारा अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह इस बात का संकेत है कि स्थिति को हल्के में नहीं लिया जा सकता। हालांकि अभी तक किसी आधिकारिक हमले की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एहतियात के तौर पर उठाए गए कदम संभावित खतरे की गंभीरता को दर्शाते हैं।

