By: Vikash Mala Mandal
मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत में भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ने के कारण देश के कई हिस्सों में एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कमी देखने को मिल रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि कई शहरों में लोगों को समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा, जिससे घरेलू जीवन प्रभावित हो रहा है।

जानकारी के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल आपूर्ति बाधित होने के चलते भारत में एलपीजी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया है। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है, खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कई शहरों में गैस की किल्लत
देश के कई बड़े शहरों और छोटे कस्बों में एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। उत्तर भारत, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के कई इलाकों से गैस सिलेंडर की कमी की खबरें सामने आई हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि बुकिंग के बाद भी सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहा है।
कुछ जगहों पर तो स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि लोगों को 7 से 10 दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, खासकर उन परिवारों में जहां खाना बनाने का एकमात्र साधन गैस सिलेंडर ही है।

कालाबाजारी ने बढ़ाई परेशानी
एलपीजी संकट के बीच कालाबाजारी की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। कई जगहों पर सिलेंडर ब्लैक में ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं। जहां एक तरफ सरकारी दर पर सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो रहा, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इसका फायदा उठाकर अधिक कीमत वसूल रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि गैस एजेंसियों और बिचौलियों की मिलीभगत से यह कालाबाजारी हो रही है। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि उन्हें मजबूरी में 200 से 500 रुपये तक अधिक देकर सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है।

विरोध प्रदर्शन तेज
गैस संकट और कालाबाजारी से परेशान लोगों ने कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिया है। झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में उपभोक्ताओं ने गैस एजेंसियों के खिलाफ प्रदर्शन किया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देना चाहिए और आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करना चाहिए। साथ ही कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

सरकार और तेल कंपनियों की प्रतिक्रिया
सरकार और तेल कंपनियों की ओर से कहा गया है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जल्द ही आपूर्ति सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण अस्थायी दिक्कतें आई हैं, जिन्हें जल्द ही दूर कर लिया जाएगा।
इसके साथ ही सरकार ने राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्ती से नजर रखें और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।

आम जनता पर असर
एलपीजी संकट का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। रसोई गैस की कमी के कारण कई परिवारों को वैकल्पिक ईंधन जैसे लकड़ी या कोयले का सहारा लेना पड़ रहा है, जो न केवल महंगा है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है।
महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है क्योंकि खाना बनाने की जिम्मेदारी उन्हीं पर होती है। इसके अलावा छोटे होटल, ढाबे और फूड व्यवसाय भी इस संकट से प्रभावित हो रहे हैं।

आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो भारत में एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति पर और अधिक दबाव पड़ सकता है। इससे कीमतों में भी बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि सरकार स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही है, लेकिन अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो आम जनता की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के आम नागरिकों तक पहुंच चुका है। एलपीजी संकट और कालाबाजारी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार और संबंधित एजेंसियां मिलकर जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान निकालें, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

