By: Vikash Kumar (Vicky)
जोधपुर | केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजस्थान के जोधपुर में आयोजित महेश्वरी ग्लोबल कन्वेंशन को संबोधित करते हुए आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए स्वदेशी अपनाने और मातृभाषा में संवाद पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक देश अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं पर गर्व नहीं करेगा, तब तक आत्मनिर्भरता का सपना अधूरा रहेगा।

अमित शाह ने विशेष रूप से अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि बच्चों से घर के भीतर केवल मातृभाषा में संवाद होना चाहिए, ताकि वे अपनी जड़ों, संस्कृति और इतिहास से जुड़े रह सकें। उन्होंने इसे राष्ट्र निर्माण की बुनियाद बताया।
मातृभाषा से ही मजबूत होती है सोच और संस्कार
गृह मंत्री ने कहा कि मातृभाषा में सोचने और बोलने से बच्चों की रचनात्मक क्षमता, आत्मविश्वास और संस्कार मजबूत होते हैं। उन्होंने कहा,
“जो बच्चा अपनी भाषा में सोचता है, वही मौलिक और नवाचारी सोच विकसित कर सकता है। विदेशी भाषा ज्ञान का माध्यम हो सकती है, लेकिन मातृभाषा जीवन का आधार होती है।”
उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का जरिया नहीं, बल्कि संस्कृति और सभ्यता की वाहक होती है।
स्वदेशी से ही आत्मनिर्भर भारत का निर्माण संभव
अमित शाह ने स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि जब देशवासी स्वदेशी को प्राथमिकता देंगे, तभी भारत आर्थिक रूप से सशक्त बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश लोकल से ग्लोबल की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। गृह मंत्री ने कहा कि आज भारत न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि दुनिया के कई देशों को भी उत्पाद उपलब्ध करा रहा है। यह बदलाव स्वदेशी सोच और आत्मनिर्भरता का परिणाम है।
व्यापार और उद्योग में समाज की अहम भूमिका
महेश्वरी समाज की सराहना करते हुए अमित शाह ने कहा कि यह समाज सदियों से व्यापार, उद्योग और सामाजिक सेवा में अग्रणी रहा है। उन्होंने कहा कि समाज के व्यापारी और उद्योगपति यदि स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दें, तो भारत विश्व आर्थिक महाशक्ति बन सकता है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता की ओर आगे बढ़ें और रोजगार सृजन में भूमिका निभाएं।

संस्कृति और इतिहास से जुड़ाव जरूरी
अमित शाह ने कहा कि आज की पीढ़ी को अपनी संस्कृति और इतिहास से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता हजारों वर्ष पुरानी है और इसकी शक्ति संस्कार, परंपरा और संस्कृति में निहित है।
उन्होंने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा और संवाद से ही युवा अपनी पहचान को समझ पाएंगे और देश के लिए समर्पित होकर कार्य करेंगे।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का जिक्र
गृह मंत्री ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें मातृभाषा में शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है, जिससे बच्चों की समझ और सीखने की क्षमता बेहतर होगी।उन्होंने कहा कि यह नीति आने वाले वर्षों में भारत को ज्ञान आधारित महाशक्ति बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
भारत की वैश्विक पहचान मजबूत
अमित शाह ने कहा कि आज भारत दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना रहा है। चाहे तकनीक हो, अंतरिक्ष हो या रक्षा क्षेत्र—भारत आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यह तभी संभव हुआ है जब देश ने अपनी क्षमता और स्वदेशी ताकत पर भरोसा किया।
सम्मेलन में बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल
महेश्वरी ग्लोबल कन्वेंशन में देश-विदेश से आए समाज के प्रतिनिधि, उद्योगपति, युवा और महिलाएं बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक एकता, आर्थिक सशक्तिकरण और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।
राष्ट्र निर्माण में हर नागरिक की भूमिका अपने संबोधन के अंत में अमित शाह ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत केवल सरकार का सपना नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि जब घर में मातृभाषा, बाजार में स्वदेशी और सोच में राष्ट्र सर्वोपरि होगा, तभी भारत विश्वगुरु बनेगा।

