By: Vikash Kumar (Vicky)
नई दिल्ली। संसद के भीतर एक बार फिर आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा गूंजा, जब AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अपने भाषण में सरकार से कड़ा रुख अपनाने की मांग की। ओवैसी ने अपने संबोधन के दौरान वेनेजुएला का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर दुनिया के कुछ देश अपने नागरिकों और अपराधियों के खिलाफ सीमा पार कार्रवाई कर सकते हैं, तो भारत को भी अपने दुश्मनों के खिलाफ निर्णायक कदम उठाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से संसद में कहा कि भारत को “ऑपरेशन इंसाफ” जैसा अभियान चलाकर आतंकी सरगनाओं हाफिज सईद और मसूद अजहर को उनके ठिकानों से पकड़कर भारत लाना चाहिए।

ओवैसी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में आतंकवाद, सीमा पार साजिशों और आतंकी नेटवर्क को लेकर लगातार राजनीतिक और रणनीतिक बहस जारी है। संसद में दिए गए अपने वक्तव्य में उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आखिर कब तक भारत केवल कूटनीतिक विरोध दर्ज कराता रहेगा और कब वह ठोस कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए साहसिक निर्णय लेने होंगे।

वेनेजुएला का उदाहरण क्यों?
अपने भाषण में ओवैसी ने वेनेजुएला का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ देशों ने अपने नागरिकों या अपराधियों को वापस लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की परवाह किए बिना सख्त कदम उठाए हैं। उनका इशारा इस बात की ओर था कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होता है और जब देश की सुरक्षा का सवाल हो, तो सरकार को निर्णायक नीति अपनानी चाहिए। ओवैसी ने यह भी कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा नीति को और आक्रामक बनाने की जरूरत है।

‘ऑपरेशन इंसाफ’ की मांग
ओवैसी ने संसद में “ऑपरेशन इंसाफ” शब्द का प्रयोग करते हुए कहा कि भारत को एक ऐसा अभियान चलाना चाहिए जिसके तहत देश के दुश्मनों को उनके ठिकानों से पकड़कर न्याय के कटघरे में लाया जाए। उन्होंने विशेष रूप से मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर का नाम लिया और कहा कि ये दोनों खुलेआम भारत के खिलाफ साजिश रचते रहे हैं।

उन्होंने सरकार से पूछा कि जब इनके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इनका नाम आतंकी संगठनों से जुड़ा हुआ है, तो भारत को इन पर सीधी कार्रवाई करने से क्यों रोका जा रहा है। ओवैसी ने कहा कि यह केवल बयानबाजी का समय नहीं है, बल्कि ठोस कार्रवाई का वक्त है।

संसद में गूंजा राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा
ओवैसी के इस बयान के बाद संसद में हलचल देखी गई। कई सांसदों ने उनके बयान का समर्थन किया, तो कुछ ने इसे कूटनीतिक रूप से जटिल मुद्दा बताया। राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर इस तरह की मांग ने बहस को और तेज कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़ा हुआ है।

भारत की कूटनीतिक चुनौतियां
भारत लंबे समय से पाकिस्तान स्थित आतंकी सरगनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज उठाता रहा है। संयुक्त राष्ट्र, FATF और अन्य मंचों पर भारत ने इन संगठनों और उनके नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीतिक समीकरणों के चलते यह प्रक्रिया जटिल बनी रहती है। ओवैसी के बयान ने इस बहस को फिर से जीवंत कर दिया है कि क्या भारत को अपनी रणनीति में बदलाव करना चाहिए और अधिक आक्रामक रुख अपनाना चाहिए।

राजनीतिक प्रतिक्रिया
ओवैसी के बयान पर विभिन्न राजनीतिक दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ नेताओं ने इसे राष्ट्रहित में उठाया गया सवाल बताया, जबकि कुछ ने इसे भावनात्मक बयानबाजी करार दिया। हालांकि, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि उनके बयान ने संसद में आतंकवाद के मुद्दे को फिर से केंद्र में ला दिया है।

जनता के बीच चर्चा
सोशल मीडिया पर भी ओवैसी का यह बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। कई यूजर्स ने उनके बयान का समर्थन करते हुए सरकार से कड़ा कदम उठाने की मांग की है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को मुश्किल में डाल सकती है।

विशेषज्ञों की राय
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई करना आसान नहीं होता, क्योंकि इसमें अंतरराष्ट्रीय कानून, कूटनीति और सैन्य रणनीति शामिल होती है। हालांकि, वे यह भी मानते हैं कि आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति अपनाना समय की मांग है।

असदुद्दीन ओवैसी का संसद में दिया गया यह बयान केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर चर्चा का संकेत है। वेनेजुएला का उदाहरण देते हुए “ऑपरेशन इंसाफ” की मांग ने इस बहस को नई दिशा दे दी है कि भारत को अपने दुश्मनों के खिलाफ किस हद तक जाना चाहिए। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या यह बहस किसी ठोस नीति में बदलती है।
