By:vikash kumar (vicky)

तेहरान: ईरान की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किए जाने की खबरें सामने आई हैं। माना जा रहा है कि ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के समर्थन और सत्ता के अंदर मजबूत पकड़ के कारण उन्हें यह पद मिला है।

अयातुल्ला अली खामेनेई पिछले कई दशकों से ईरान की राजनीति और शासन व्यवस्था के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति रहे हैं। 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के निधन के बाद उन्होंने सुप्रीम लीडर का पद संभाला था और तब से ही देश की विदेश नीति, रक्षा नीति और धार्मिक व्यवस्था पर उनका अंतिम अधिकार रहा।

उनकी मौत के बाद ईरान में नए सुप्रीम लीडर को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। ईरान के संविधान के मुताबिक सुप्रीम लीडर का चयन विशेषज्ञों की असेंबली यानी ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ करती है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वास्तविक शक्ति देश के प्रभावशाली धार्मिक और सैन्य समूहों के हाथ में होती है, जिनकी सहमति के बिना यह फैसला संभव नहीं होता।

इसी बीच मोजतबा खामेनेई का नाम सबसे आगे आने लगा। मोजतबा खामेनेई लंबे समय से ईरान की सत्ता के गलियारों में सक्रिय माने जाते रहे हैं। हालांकि उन्होंने कभी कोई औपचारिक सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन राजनीतिक हलकों में उनकी गहरी पकड़ और प्रभाव की चर्चा अक्सर होती रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स यानी IRGC का समर्थन मोजतबा खामेनेई के लिए सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ। IRGC ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य और आर्थिक संस्था मानी जाती है, जिसका देश की राजनीति और सुरक्षा नीतियों पर व्यापक प्रभाव है।

कुछ रिपोर्टों के मुताबिक पिछले कई वर्षों से मोजतबा खामेनेई पर्दे के पीछे रहकर कई अहम राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों में भूमिका निभाते रहे हैं। खासकर 2009 के विवादित राष्ट्रपति चुनावों के दौरान भी उनका नाम काफी चर्चा में आया था।
हालांकि मोजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर बनाए जाने को लेकर ईरान के अंदर और बाहर दोनों जगह बहस शुरू हो गई है। आलोचकों का कहना है कि अगर यह फैसला औपचारिक रूप से होता है तो यह ईरान की इस्लामिक व्यवस्था को एक तरह से ‘वंशवादी शासन’ की ओर ले जा सकता है, जबकि ईरान की क्रांति का मूल उद्देश्य राजशाही व्यवस्था को खत्म करना था।

दूसरी ओर समर्थकों का कहना है कि मोजतबा खामेनेई लंबे समय से धार्मिक और राजनीतिक मामलों में सक्रिय रहे हैं और उन्हें देश की नीतियों और व्यवस्था की गहरी समझ है। उनका मानना है कि मौजूदा वैश्विक तनाव और मध्य पूर्व की जटिल परिस्थितियों में अनुभव और निरंतरता ईरान के लिए महत्वपूर्ण है।
मध्य पूर्व के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर मोजतबा खामेनेई वास्तव में सुप्रीम लीडर बनते हैं तो इसका असर सिर्फ ईरान की राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की भू-राजनीति पर पड़ सकता है।

ईरान पहले से ही अमेरिका, इजराइल और पश्चिमी देशों के साथ कई मुद्दों पर तनावपूर्ण संबंधों का सामना कर रहा है। ऐसे में नए सुप्रीम लीडर की नीतियां यह तय करेंगी कि आने वाले समय में ईरान की विदेश नीति किस दिशा में जाएगी।
इसके अलावा परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सहयोग और मध्य पूर्व के कई संघर्षों में ईरान की भूमिका भी नए नेतृत्व के साथ बदल सकती है। इसलिए दुनिया भर की निगाहें अब तेहरान की राजनीति पर टिकी हुई हैं।
हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर कई प्रक्रियाएं पूरी होना बाकी मानी जा रही हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर सत्ता प्रतिष्ठान का समर्थन जारी रहा तो मोजतबा खामेनेई का सुप्रीम लीडर बनना लगभग तय माना जा रहा है।
ईरान की राजनीति में यह बदलाव आने वाले समय में देश की आंतरिक और बाहरी नीतियों को किस तरह प्रभावित करेगा, यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा।
