By: Vikash Kumar (Vicky)
अयोध्या से एक अहम प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। अयोध्या में तैनात जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार ने अपना त्यागपत्र वापस लेते हुए एक बार फिर से नौकरी ज्वाइन कर ली है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफा वापस लिया है और उन पर किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं था।

प्रशांत कुमार ने कुछ दिन पहले अपने पद से इस्तीफा दिया था। उनका यह फैसला उस समय सामने आया जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई कथित अभद्र टिप्पणी से वे आहत हो गए थे। इस टिप्पणी से नाराज़ होकर उन्होंने नैतिक आधार पर अपने पद से हटने का निर्णय लिया था।
इस्तीफे के बाद यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया था। कई लोग इसे एक अधिकारी की व्यक्तिगत आस्था और भावनात्मक प्रतिक्रिया से जोड़कर देख रहे थे, वहीं कुछ लोगों ने इसे प्रशासनिक सेवा आचरण से जोड़कर सवाल भी उठाए थे।

अब इस पूरे प्रकरण पर स्थिति साफ करते हुए प्रशांत कुमार ने कहा कि उन्होंने अपने त्यागपत्र पर पुनर्विचार किया और उसे वापस लेने का फैसला किया। उन्होंने कहा, “मैंने अपना इस्तीफा स्वेच्छा से वापस लिया है। मुझ पर किसी भी स्तर से कोई दबाव नहीं बनाया गया। यह मेरा व्यक्तिगत निर्णय है।”
डिप्टी कमिश्नर ने यह भी कहा कि एक संवैधानिक पद पर रहते हुए अधिकारी को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को सर्वोपरि रखना चाहिए। उन्होंने माना कि भावनात्मक क्षणों में लिया गया फैसला हमेशा व्यावहारिक नहीं होता और इसी कारण उन्होंने अपने निर्णय पर दोबारा विचार किया।

प्रशांत कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक सेवा में रहते हुए सभी अधिकारियों को नियमों और मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता अब पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना है।
इसी दौरान उनसे फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र से जुड़े एक पुराने मामले को लेकर भी सवाल पूछे गए। इस पर उन्होंने कहा कि इस विषय पर पहले ही संबंधित विभाग द्वारा आवश्यक जांच की जा चुकी है और जो भी तथ्य सामने आए थे, वे रिकॉर्ड पर मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी तरह की भ्रामक जानकारी फैलाना उचित नहीं है।

डिप्टी कमिश्नर के अनुसार, प्रशासनिक सेवा में रहते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है और वे इन मूल्यों के साथ काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी छवि को लेकर जो भी सवाल उठाए जा रहे हैं, उनका जवाब तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर दिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, इस्तीफा वापस लेने के बाद प्रशांत कुमार ने अपने कार्यालय में नियमित रूप से कामकाज संभाल लिया है। विभागीय स्तर पर भी उनके इस्तीफे को वापस लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ लोगों का मानना है कि एक अधिकारी का भावनात्मक रूप से इस्तीफा देना और फिर उसे वापस लेना यह दिखाता है कि प्रशासनिक सेवा में निर्णय कितने संवेदनशील होते हैं। वहीं कुछ लोगों ने इसे एक सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि अनुभव से सीख लेकर आगे बढ़ना ही बेहतर होता है।
फिलहाल, अयोध्या जीएसटी विभाग में कामकाज सामान्य रूप से जारी है और प्रशांत कुमार अपने पद पर बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में वे केवल अपने कर्तव्यों पर ध्यान केंद्रित करेंगे और किसी भी तरह के विवाद से दूर रहकर सेवा करेंगे।

यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे अधिकारियों के व्यक्तिगत विचार और भावनाएं किस हद तक उनके पेशेवर फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, प्रशांत कुमार द्वारा इस्तीफा वापस लेना यह भी दर्शाता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में आत्ममंथन और सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है।
