By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर की पावन धरती पर इस वर्ष होली का पर्व आस्था, परंपरा और ज्योतिषीय संयोग के अद्भुत मेल के साथ मनाया जाएगा। मलमास और चंद्रग्रहण के विशेष योग के कारण सोमवार, दो मार्च को बाबा बैद्यनाथ मंदिर का पट पूरी रात श्रद्धालुओं के लिए खुला रहेगा। यह दुर्लभ संयोग वर्षों बाद बना है, जिसे लेकर बाबा नगरी में उत्साह और उमंग का माहौल है।
मंदिर के ईस्टेट पुरोहित श्रीनाथ पंडित ने औपचारिक घोषणा करते हुए बताया कि उनके जीवनकाल में पहली बार ऐसा विशेष संयोग बना है, जब होली के अवसर पर मंदिर पूरी रात खुला रहेगा। हालांकि, शाम चार बजे के बाद श्रद्धालु बाबा को स्पर्श नहीं कर सकेंगे। वे गर्भगृह के प्रवेश द्वार से बाबा पर गुलाल अर्पित करते हुए दर्शन करेंगे।

तीन दिनों तक चलेगा होली महोत्सव
तिथि गणना के अनुसार देशभर में तीन और चार मार्च को होली मनाई जाएगी, लेकिन बाबा नगरी देवघर में दो से चार मार्च तक लगातार तीन दिनों तक होली का उत्सव मनाया जाएगा। परंपरा के अनुसार पांच मार्च को बासी होली भी धूमधाम से मनाई जाएगी।
सोमवार को सुखी होली की शुरुआत बाबा को गुलाल अर्पित करने के साथ होगी। दिनभर जलार्पण के बाद अपराह्न साढ़े तीन बजे बाबा का पट बंद कर दिया जाएगा और शाम चार बजे पुनः खोला जाएगा। मंदिर के महंत सरदार पंडा श्रीश्री गुलाब नंद ओझा विधि-विधान से बाबा पर गुलाल अर्पित कर सुखी होली का शुभारंभ करेंगे।

चंद्रग्रहण के बीच बदलेगा पूजा का क्रम
तीन मार्च को शाम 5:47 बजे से 6:48 बजे तक चंद्रग्रहण का विशेष योग बन रहा है। इस कारण मंदिर का पट शाम चार बजे ही बंद कर दिया जाएगा। ईस्टेट पुरोहित के अनुसार, बाबा के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान होने से यहां सूतक काल का प्रभाव नहीं माना जाता है।
चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर की शुद्धि और स्नान प्रक्रिया पूरी कर शाम करीब साढ़े सात बजे शृंगार पूजा के लिए कपाट पुनः खोले जाएंगे। इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना संपन्न होगी। श्रद्धालु इस ऐतिहासिक और दुर्लभ संयोग के साक्षी बनने को उत्सुक हैं।

तड़के होगा होलिका दहन, फिर हरिहर मिलन
शास्त्रों के अनुसार सूर्योदय तक रात्रि का प्रभाव माना जाता है। इसी आधार पर तीन मार्च, मंगलवार की सुबह 5:11 बजे विधि-विधान से होलिका दहन किया जाएगा। इसके बाद डोली में विराजमान राधा-कृष्ण को हरिहर मिलन के लिए बाबा मंदिर लाया जाएगा।
सुबह छह बजे भगवान कृष्ण को गर्भगृह में ले जाकर हरिहर मिलन की परंपरा संपन्न कराई जाएगी। इस दौरान जयकारों के बीच श्रद्धालु गुलाल अर्पित करेंगे। परंपरा के बाद मंदिर की सफाई कर सुबह 6:15 बजे बाबा का शृंगार पूजन कर पट बंद किया जाएगा।
भीतरखंड स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में विशेष पूजा और छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा। सुबह नौ बजे मंदिर का पट फिर खोला जाएगा और कांचाजल चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी। दैनिक सरकारी पूजा के बाद सुबह दस बजे से आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण प्रारंभ होगा।

स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है हरिहर मिलन
बाबा नगरी में हरिहर मिलन को बाबा बैद्यनाथ के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। बारह ज्योतिर्लिंगों में यह परंपरा केवल बाबा बैद्यनाथ मंदिर में ही प्रचलित है।
पुराणों और शास्त्रों के अनुसार, जब रावण शिवलिंग को लंका ले जा रहा था, तब फाल्गुन पूर्णिमा के दिन उसे लघुशंका का आभास हुआ। इसी दौरान भगवान विष्णु ने मनुष्य रूप में प्रकट होकर शिवलिंग को अपने हाथों में लिया और उसे धरती पर स्थापित कर दिया। उसी स्थान पर बाबा बैद्यनाथ की स्थापना हुई। इस पावन प्रसंग को हरि (विष्णु) और हर (महादेव) के मिलन के रूप में ‘हरिहर मिलन’ कहा जाता है।

इस अवसर पर राधा-कृष्ण की डोली शोभायात्रा के रूप में आजाद चौक स्थित दोल मंच तक ले जाई जाएगी। ढोल-नगाड़ों के बीच निकाली जाने वाली इस शोभायात्रा में मार्ग के विभिन्न चौक-चौराहों पर भगवान को मालपुआ का भोग लगाया जाएगा। दोल मंच पर राधा-कृष्ण को झुलाने की परंपरा निभाई जाएगी।
हरिहर मिलन तक पूरी रात मंदिर का पट खुला रहेगा, जिससे श्रद्धालु रात्रि भर दर्शन कर सकेंगे।
आस्था, परंपरा और ज्योतिषीय संयोग का संगम
मलमास, चंद्रग्रहण और फाल्गुन पूर्णिमा का यह दुर्लभ संयोग देवघर में ऐतिहासिक होली का साक्षी बनेगा। श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष है, बल्कि परंपरा और संस्कृति के जीवंत स्वरूप को देखने का भी अनूठा अवसर है।
बाबा नगरी इन दिनों पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूबी हुई है। देशभर से श्रद्धालु इस दिव्य होली और हरिहर मिलन के साक्षी बनने देवघर पहुंच रहे हैं।

