By: Vikash Kumar (Vicky)
मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। हिंदुओं की घटती आबादी को लेकर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को जनसंख्या के मुद्दे पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि “हिंदू चार बच्चे पैदा करें” और शादी के बाद खुद भी आबादी बढ़ाने की बात कही।
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। समर्थक इसे हिंदू समाज को जागरूक करने वाला बयान बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे जनसंख्या और सामाजिक संतुलन के लिहाज से विवादित टिप्पणी मान रहे हैं।

क्या कहा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने?
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने प्रवचन के दौरान कहा कि हिंदुओं की आबादी लगातार घट रही है और यदि समय रहते समाज ने ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में स्थिति बदल सकती है। उन्होंने हिंदू परिवारों से अपील की कि वे कम से कम चार बच्चे पैदा करें।
उन्होंने यह भी कहा कि शादी के बाद वे स्वयं भी इस दिशा में उदाहरण प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा उन्होंने अजमेर शरीफ दरगाह जाने वाले हिंदुओं को सलाह दी कि वे सनातन धर्म का पालन करें और अपनी आस्था व परंपराओं के प्रति सजग रहें।

जनसंख्या बहस और सामाजिक संदर्भ
भारत में जनसंख्या का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का हिस्सा रहा है। अलग-अलग राज्यों में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर चर्चा होती रही है। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर अभी तक कोई सख्त दो-बच्चा नीति लागू नहीं है।
विशेषज्ञों का कहना है कि देश में कुल प्रजनन दर (TFR) पिछले वर्षों में घटकर प्रतिस्थापन स्तर के आसपास पहुंच चुकी है। ऐसे में “चार बच्चे” जैसी अपील को कई लोग जनसंख्या संतुलन के व्यापक आंकड़ों से अलग मानते हैं।
दूसरी ओर, शास्त्री के समर्थकों का तर्क है कि उनका बयान सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के संरक्षण की भावना से जुड़ा हुआ है, न कि किसी के खिलाफ।

अजमेर शरीफ को लेकर दी गई सलाह
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अजमेर शरीफ जाने वाले हिंदुओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपनी धार्मिक पहचान को न भूलें और सनातन परंपराओं का पालन करें। उनका कहना था कि आस्था व्यक्तिगत विषय है, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़े रहना जरूरी है।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से जोड़ा, तो कुछ ने इसे धार्मिक ध्रुवीकरण की दिशा में कदम बताया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
हालांकि इस बयान पर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विपक्षी नेताओं ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बताया है। उनका कहना है कि जनसंख्या जैसे संवेदनशील विषय पर सार्वजनिक मंच से इस तरह की अपील समाज में भ्रम पैदा कर सकती है।
वहीं, कुछ हिंदू संगठनों ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान का समर्थन किया है और इसे “जनसंख्या जागरूकता अभियान” का हिस्सा बताया है।

समाजशास्त्रियों की राय
समाजशास्त्रियों का मानना है कि किसी भी समुदाय की जनसंख्या में बदलाव कई सामाजिक-आर्थिक कारकों पर निर्भर करता है—जैसे शिक्षा, शहरीकरण, महिलाओं की भागीदारी और आर्थिक स्थिति। केवल धार्मिक अपील से जनसंख्या के आंकड़ों में बड़ा बदलाव संभव नहीं होता। वे यह भी कहते हैं कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में धार्मिक सौहार्द और सामाजिक संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का “हिंदू चार बच्चे पैदा करें” वाला बयान निश्चित रूप से बहस का विषय बन गया है। एक ओर इसे धार्मिक पहचान की चिंता से जोड़कर देखा जा रहा है, तो दूसरी ओर इसे सामाजिक और जनसंख्या नीति के संदर्भ में परखा जा रहा है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान पर राजनीतिक दल, धार्मिक संगठन और आम जनता किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं। फिलहाल इतना तय है कि जनसंख्या और धर्म जैसे मुद्दे भारतीय समाज में हमेशा संवेदनशील और चर्चा के केंद्र में रहने वाले विषय हैं।

