By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर| धर्म और आध्यात्मिक आस्था की नगरी देवघर एक बार फिर ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन का साक्षी बनने जा रही है। झारखंड के प्रसिद्ध तीर्थस्थल देवघर में देश का दूसरा बहुचरा माता मंदिर बनकर तैयार हो चुका है, जहां आगामी 7 मार्च से 9 मार्च 2026 तक कलश यात्रा, वेदी पूजन एवं प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह मंदिर गुजरात के बाद देश का दूसरा प्रमुख बहुचरा माता मंदिर माना जा रहा है, जिससे धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से देवघर की पहचान और अधिक मजबूत होगी।

इस संबंध में जानकारी देते हुए झारखंड की पहली किन्नर महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी ने बताया कि बहुचरा माता किन्नर समाज की कुलदेवी मानी जाती हैं और उनकी विशेष कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। उन्होंने कहा कि देवघर में माता की प्राण प्रतिष्ठा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक बनेगा।
गुजरात के बाद देवघर बना बहुचरा माता की आराधना का प्रमुख केंद्र
बहुचरा माता का प्रमुख मंदिर गुजरात में स्थित है, जहां वर्षों से देशभर के श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। अब देवघर में इस मंदिर के निर्माण से पूर्वी भारत के श्रद्धालुओं को भी माता के दर्शन का अवसर मिलेगा। आयोजकों के अनुसार यह मंदिर विशेष रूप से किन्नर समाज की आस्था का केंद्र रहेगा, लेकिन सभी धर्म और समुदाय के लोग यहां पूजा-अर्चना कर सकेंगे।

महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी ने बताया कि बहुचरा माता को शक्ति, सम्मान और आत्मस्वीकृति की देवी माना जाता है। किन्नर समाज में माता की पूजा का विशेष महत्व है और हर वर्ष हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए गुजरात जाते हैं। देवघर में मंदिर बनने से अब श्रद्धालुओं को स्थानीय स्तर पर ही यह आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होगा।
तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम का विस्तृत आयोजन
प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं, जिसमें देशभर से संत-महात्मा और श्रद्धालु भाग लेंगे।
कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार है —
7 मार्च 2026 :
भव्य कलश यात्रा
नगर भ्रमण एवं धार्मिक शोभायात्रा
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन प्रारंभ

8 मार्च 2026 :
वेदी पूजन एवं यज्ञ अनुष्ठान
संत सम्मेलन और आध्यात्मिक प्रवचन
भक्तिमय सांस्कृतिक कार्यक्रम
9 मार्च 2026 :
बहुचरा माता की प्राण प्रतिष्ठा
महाआरती एवं प्रसाद वितरण
भक्तों के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था
आयोजन समिति के अनुसार कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। प्रशासनिक स्तर पर भी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है।

किन्नर अखाड़ा की प्रमुख लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी होंगी मुख्य अतिथि
इस भव्य आयोजन में किन्नर अखाड़ा की प्रमुख और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध आध्यात्मिक व्यक्तित्व लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। उनके आगमन को लेकर किन्नर समाज सहित श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
आयोजकों ने बताया कि इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों से कई संत, महंत और महामंडलेश्वर भी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए देवघर पहुंचेंगे। धार्मिक प्रवचन, भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक संवाद कार्यक्रम की विशेष आकर्षण होंगे।
मंगलामुखी धाम में होगा प्राण प्रतिष्ठा आयोजन
बहुचरा माता मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा देवघर के बांध स्थित मंगलामुखी धाम परिसर में संपन्न होगी। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है।
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि मंदिर का निर्माण पारंपरिक शिल्प शैली और धार्मिक वास्तु सिद्धांतों के अनुसार किया गया है। मंदिर परिसर में ध्यान स्थल, यज्ञ मंडप और भक्तों के लिए विश्राम स्थल भी विकसित किए जा रहे हैं।

सामाजिक समावेश और आध्यात्मिक संदेश का केंद्र बनेगा मंदिर
धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं बल्कि सामाजिक समावेश का प्रतीक बनेगा। किन्नर समाज को सम्मान और आध्यात्मिक पहचान देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी ने कहा कि समाज में समानता और स्वीकार्यता का संदेश देना इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है। बहुचरा माता की आराधना सभी वर्गों को जोड़ने का कार्य करेगी और देवघर की धार्मिक परंपरा को नई पहचान देगी।
देवघर की धार्मिक पर्यटन पहचान को मिलेगा नया आयाम
देवघर पहले से ही बाबा बैद्यनाथ धाम के कारण विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। अब बहुचरा माता मंदिर बनने से यहां धार्मिक पर्यटन को नया विस्तार मिलने की संभावना जताई जा रही है। स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग और पर्यटन गतिविधियों को भी इससे बढ़ावा मिलेगा। श्रद्धालुओं का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह मंदिर पूर्वी भारत का प्रमुख शक्ति पीठ बन सकता है और देवघर आध्यात्मिक पर्यटन के मानचित्र पर और मजबूत स्थान प्राप्त करेगा।
श्रद्धालुओं से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील
आयोजन समिति और संत समाज ने देशभर के श्रद्धालुओं से कार्यक्रम में शामिल होकर माता का आशीर्वाद लेने की अपील की है। तीन दिवसीय इस महोत्सव को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी अंतिम चरण में है। देवघर में होने जा रहा यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सामाजिक एकता, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

