देवघर। हिंदू पंचांग के अनुसार पौष महीने को खरमास कहा जाता है। आम धारणा है कि इस अवधि में सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है, जिसके कारण विवाह, उपनयन संस्कार, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। देश के अधिकांश हिस्सों में खरमास के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता, लेकिन द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक शिव-शक्ति के पावन धाम बाबा बैद्यनाथ मंदिर, देवघर में इस नियम का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

यहाँ पौष माह में भी न केवल पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं, बल्कि शादी-विवाह, उपनयन संस्कार, मुंडन संस्कार जैसे मांगलिक कार्य भी पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न कराए जाते हैं। यह परंपरा कोई नई नहीं, बल्कि सदियों पुरानी धार्मिक मान्यता और आस्था से जुड़ी हुई है।
क्यों नहीं लगता देवघर में खरमास का दोष?
बाबा बैद्यनाथ मंदिर के वरिष्ठ पुरोहित लंबोदर महाराज बताते हैं कि देवघर धाम की महिमा अन्य तीर्थों से अलग है।
उनका कहना है कि —
“यहाँ स्वयं भगवान शिव और माता शक्ति एक साथ विराजमान हैं। बाबा बैद्यनाथ मनोकामना लिंग हैं, इसलिए यहाँ किसी भी प्रकार का काल-दोष, ग्रह-दोष या खरमास का दोष प्रभावी नहीं होता।”
शास्त्रों के अनुसार जहाँ शिव और शक्ति दोनों की उपस्थिति होती है, वहाँ समय और ग्रहों का बंधन समाप्त हो जाता है। यही कारण है कि देवघर धाम में पौष महीने के दौरान भी शुभ कार्यों की अनुमति है।
शिव-शक्ति की संयुक्त उपासना का अद्भुत केंद्र
बैद्यनाथ धाम को केवल ज्योतिर्लिंग ही नहीं, बल्कि शिव-शक्ति के संयुक्त स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ भगवान शिव स्वयं वैद्य के रूप में विराजमान हैं और माता पार्वती शक्ति स्वरूपा के रूप में पूजित होती हैं। इसी कारण इसे कामना पूर्ण करने वाला धाम कहा जाता है।
यही धार्मिक मान्यता देवघर को अन्य ज्योतिर्लिंगों से अलग बनाती है। देशभर से श्रद्धालु यहाँ विवाह, संतान प्राप्ति, स्वास्थ्य लाभ और पारिवारिक सुख-शांति की कामना लेकर पहुँचते हैं।
पौष महीने में भी गूंजते हैं मंगल गीत
स्थानीय पंडितों के अनुसार पौष माह के दौरान भी देवघर में प्रतिदिन कई शुभ संस्कार संपन्न कराए जाते हैं। मंदिर परिसर और आसपास के धर्मशालाओं में वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और मंगल गीत सुनाई देते हैं।
विशेष रूप से —
उपनयन संस्कार
मुंडन संस्कार
विवाह अनुष्ठान
रुद्राभिषेक
विशेष पूजा-पाठ
इन सभी कार्यों के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से देवघर पहुँचते हैं।
सदियों से चली आ रही परंपरा
इतिहासकारों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देवघर में खरमास के दौरान मंगल कार्य करने की परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। स्थानीय समाज ने इसे कभी वर्जित नहीं माना। यही कारण है कि आज भी देवघर में पौष माह के दौरान विवाह के मुहूर्त निकलवाए जाते हैं और सफलतापूर्वक संपन्न कराए जाते हैं।
लंबोदर महाराज के अनुसार —
“देवघर में विवाह करने से दांपत्य जीवन सुखमय होता है। यहाँ बाबा स्वयं साक्षी बनते हैं।”
श्रद्धालुओं की आस्था बनी हुई है अटूट
पौष महीने में भी बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या कम नहीं होती। सुबह से लेकर देर रात तक जलार्पण और दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहती हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस महीने में किए गए अनुष्ठान शीघ्र फलदायी होते हैं।
धार्मिक पर्यटन को भी मिलता है बढ़ावा
खरमास के दौरान भी मांगलिक आयोजनों के चलते देवघर में होटल, धर्मशाला, पंडा समाज और स्थानीय व्यवसायों को भी लाभ मिलता है। यह धार्मिक परंपरा न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी मजबूती प्रदान करती है।
जहाँ एक ओर देश के अधिकांश हिस्सों में पौष महीने को शुभ कार्यों के लिए निषिद्ध माना जाता है, वहीं बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर इस मान्यता से परे आस्था और विश्वास का प्रतीक बना हुआ है। शिव-शक्ति की संयुक्त उपस्थिति, मनोकामना लिंग की महिमा और सदियों पुरानी परंपरा के कारण देवघर में खरमास का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
यही कारण है कि आज भी देवघर धाम श्रद्धालुओं के लिए मंगलकारी तीर्थ बना हुआ है।
