कटिहार/बारसोई। बिहार के कटिहार जिले से पुलिस की ‘दबंगई’ का एक शर्मनाक चेहरा सामने आया है। बारसोई थाना क्षेत्र में थानाध्यक्ष पर एक भाई-बहन के साथ रेस्टोरेंट में अभद्र व्यवहार और धमकाने का गंभीर आरोप लगा है। घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आम नागरिकों में आक्रोश फैल गया। लोगों ने पुलिस सिस्टम के रवैये पर सवाल खड़े किए और दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। घटना 24 अक्टूबर 2025 की बताई जा रही है, जब बारसोई के आरास चौक स्थित एक रेस्टोरेंट में कुछ युवक-युवती बैठे थे। इसी दौरान थानाध्यक्ष मौके पर पहुंचे और वहां बैठे एक युवक से पूछताछ शुरू कर दी। पूछताछ के दौरान पुलिस अधिकारी ने युवक की महिला साथी को लेकर संदिग्ध टिप्पणियाँ कीं। जब युवक ने स्पष्ट कहा — “बहन है मेरी”, तो अधिकारी आपा खो बैठे और अपने वर्दी के रौब में दबंगई दिखाने लगे।
गवाहों के अनुसार, अधिकारी ने न सिर्फ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया, बल्कि धमकाने और गलत तरीके से हिरासत में ले जाने का भी प्रयास किया। यह पूरा वाक्या वहीं लगे CCTV कैमरों में कैद हो गया। वीडियो वायरल होते ही क्षेत्र के नागरिकों में भारी रोष देखने को मिला। लोगों ने कहा कि वर्दी का ऐसा दुरुपयोग पुलिस व्यवस्था पर दाग है।
जांच में थानाध्यक्ष दोषी पाए गए
मामले की गंभीरता को देखते हुए कटिहार पुलिस अधीक्षक ने तुरंत संज्ञान लिया और जांच टीम गठित की। जांच रिपोर्ट में यह साफ हुआ कि थानाध्यक्ष ने अपने पद और अधिकार का दुरुपयोग करते हुए आम नागरिकों के साथ असंवैधानिक तथा अपमानजनक व्यवहार किया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, अधिकारी का व्यवहार पुलिस एक्ट और सर्विस कंडक्ट नियमों का खुला उल्लंघन था।
जांच रिपोर्ट के आधार पर थानाध्यक्ष को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही विभागीय कार्रवाई भी जारी है, जिसके बाद आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
स्थानीय लोगों में आक्रोश, इंसाफ की मांग
घटना के बाद पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने साफ कहा कि:
आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए जो वर्दी पहनते हैं
वही जब भय और अपमान का कारण बन जाए
तो इस पर सरकार को कठोर कदम उठाना चाहिए।
लोगों ने कहा कि CCTV वीडियो ही इस बात का प्रमाण है कि अधिकारी ने कानून की सीमा लांघते हुए व्यवहार किया।
वायरल वीडियो ने उठाए कई सवाल
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आते ही लगातार प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। युवा वर्ग से लेकर सामाजिक संगठनों तक कई लोग पुलिस सुधार और संवेदनशीलता की मांग उठा रहे हैं।
इस केस ने इन सवालों को फिर ताजा कर दिया है—
क्या पुलिस वर्दी का इस्तेमाल दबाव और भय फैलाने के लिए हो रहा है?
क्या पुलिस कर्मियों को मानवाधिकार प्रशिक्षण की ज़रूरत है?
क्या ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और मॉनिटरिंग सिस्टम होना चाहिए?
मानवाधिकार व कानूनी विशेषज्ञों की राय
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि पुलिस ऐसे मामलों में पीड़ितों के साथ संवेदनशील तरीके से पेश आए।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार:
यह कृत्य धारा 166(A) (पद का दुरुपयोग) के तहत संज्ञान योग्य अपराध हो सकता है
पीड़ित परिवार चाहे तो FIR दर्ज कर न्याय की मांग कर सकता है
क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी?
पुलिस विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया:
“किसी भी अधिकारी द्वारा गलत व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस की छवि को धूमिल करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।”
यह बयान आम जनता को आश्वस्त करने और पुलिस की विश्वसनीयता बनाए रखने की ओर एक कदम माना जा रहा है।

