By:Vikash Kumar (Vicky)
B.Ed D.El.Ed New Rule 2026:
शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों युवाओं के लिए साल 2026 बेहद अहम साबित होने वाला है। केंद्र सरकार और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने शिक्षक शिक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की घोषणा की है। नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत B.Ed और D.El.Ed जैसे पारंपरिक कोर्स अब पुराने स्वरूप में नहीं रहेंगे। सरकार का मकसद केवल डिग्री बांटना नहीं, बल्कि योग्य, प्रशिक्षित और आधुनिक सोच वाले शिक्षक तैयार करना है, जिससे देश की स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार हो सके।

B.Ed D.El.Ed New Rule 2026 क्या है और क्यों लाया गया
अब तक शिक्षक बनने के लिए ग्रेजुएशन के बाद दो साल का B.Ed कोर्स सबसे आम रास्ता था। लेकिन NCTE ने 2026-27 सत्र से इस व्यवस्था में बदलाव करने का फैसला लिया है। नए नियमों के तहत पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों के लिए एक साल का B.Ed कोर्स शुरू किया जाएगा, ताकि उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को कम समय में शिक्षक बनने का अवसर मिल सके। वहीं 12वीं पास छात्रों के लिए चार साल का इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) को शिक्षक बनने का मुख्य और प्राथमिक मार्ग बनाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि शुरू से ही शिक्षक बनने की ट्रेनिंग मिलने से छात्रों में पढ़ाने की समझ, व्यवहारिक ज्ञान और जिम्मेदारी बेहतर तरीके से विकसित होगी।

D.El.Ed और B.El.Ed को लेकर क्या बदलेगा
नए नियमों के अनुसार D.El.Ed और B.El.Ed जैसे कोर्स भी धीरे-धीरे इंटीग्रेटेड फ्रेमवर्क में शामिल किए जाएंगे। इसका मतलब यह है कि भविष्य में अलग-अलग डिप्लोमा और डिग्री की जगह एक सुव्यवस्थित और मानकीकृत सिस्टम होगा। प्राथमिक स्तर के शिक्षकों के लिए D.El.Ed या ITEP को ही मान्य माना जाएगा, जबकि केवल B.Ed के आधार पर कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने की अनुमति नहीं होगी। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है।

सिलेबस और ट्रेनिंग सिस्टम में बड़े बदलाव
B.Ed D.El.Ed New Rule 2026 के तहत सिलेबस को पूरी तरह आधुनिक बनाया जा रहा है। अब कोर्स में डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लासरूम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड लर्निंग, बाल मनोविज्ञान, नई पेडागॉजी, समावेशी शिक्षा और व्यवहारिक ट्रेनिंग पर खास जोर होगा। छात्रों को स्कूलों में ज्यादा समय तक इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग कराई जाएगी, ताकि वे वास्तविक कक्षा परिस्थितियों को समझ सकें।

कॉलेजों और संस्थानों पर भी होगी सख्ती
NCTE अब केवल उन्हीं कॉलेजों को मान्यता देगा, जो तय इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और गुणवत्ता मानकों को पूरा करेंगे। फर्जी और नाममात्र की ट्रेनिंग देने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इससे उन छात्रों को फायदा होगा जो मेहनत और योग्यता के बल पर शिक्षक बनना चाहते हैं।

नए नियमों से छात्रों और भर्तियों पर क्या असर पड़ेगा
इन बदलावों से शिक्षक बनने की प्रक्रिया ज्यादा प्रोफेशनल और पारदर्शी होगी। शुरुआत में प्रतिस्पर्धा जरूर बढ़ेगी, लेकिन लंबे समय में डिग्री की वैल्यू बढ़ेगी और रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। सरकारी शिक्षक भर्ती में भी गुणवत्ता को प्राथमिकता मिलेगी और स्कूलों को बेहतर प्रशिक्षित शिक्षक मिल सकेंगे। कुल मिलाकर यह नियम शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

किन छात्रों को सबसे ज्यादा फायदा होगा
12वीं के बाद शिक्षक बनने का लक्ष्य रखने वाले छात्रों के लिए ITEP एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरेगा। वहीं पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों के लिए एक साल का B.Ed समय और संसाधनों दोनों की बचत करेगा। योग्य और गंभीर छात्रों को इन नियमों से सीधा लाभ मिलेगा।

यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और आधिकारिक घोषणाओं पर आधारित है। नियमों में समय-समय पर बदलाव संभव है। किसी भी कोर्स में दाखिले या करियर से जुड़े निर्णय से पहले NCTE या संबंधित आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी अवश्य जांच लें।

