भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि किसी भी स्वस्थ और मजबूत लोकतंत्र की बुनियाद एक पारदर्शी, शुद्ध और अद्यतन मतदाता सूची पर टिकी होती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मतदाता सूची में केवल भारतीय नागरिकों के नाम ही शामिल होने चाहिए और इसमें किसी भी तरह की त्रुटि या अपारदर्शिता लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर कर सकती है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह बात मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने जानकारी दी कि देश के 12 राज्यों में पहले से ही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य चल रहा है और अब इस प्रक्रिया को तेलंगाना में भी शुरू किया जा रहा है।

ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर योग्य भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची में हो और कोई भी अपात्र व्यक्ति इस सूची का हिस्सा न बने। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता केवल निष्पक्ष चुनावों के लिए ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए भी बेहद जरूरी है।
क्यों जरूरी है मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि समय के साथ मतदाता सूची में कई तरह की समस्याएं सामने आती हैं। इनमें मृत मतदाताओं के नाम, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके लोगों की एंट्री, डुप्लीकेट नाम और कभी-कभी गैर-नागरिकों के नाम शामिल होने जैसी गड़बड़ियां पाई जाती हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य इन्हीं सभी खामियों को दूर करना है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि हर वोट की पवित्रता बनी रहे। यदि मतदाता सूची में गलत नाम शामिल रहते हैं, तो इससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। यही कारण है कि आयोग समय-समय पर इस तरह के विशेष पुनरीक्षण अभियान चलाता है।
12 राज्यों में चल रहा है अभियान, तेलंगाना भी शामिल
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने जानकारी दी कि फिलहाल देश के 12 राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य चल रहा है। इन राज्यों में चुनाव आयोग की टीमें घर-घर जाकर सत्यापन कर रही हैं, दस्तावेजों की जांच की जा रही है और स्थानीय स्तर पर मतदाता सूची को अपडेट किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अब इसी कड़ी में तेलंगाना में भी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। तेलंगाना में आगामी चुनावों को देखते हुए यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है। आयोग का लक्ष्य है कि चुनाव से पहले राज्य की मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध, पारदर्शी और अद्यतन हो।
केवल भारतीय नागरिकों के नाम शामिल करने पर जोर
ज्ञानेश कुमार ने साफ कहा कि भारत के लोकतंत्र में मतदान का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को ही है। ऐसे में मतदाता सूची में किसी भी गैर-नागरिक का नाम होना कानून और संविधान दोनों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह सतर्क है और विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान नागरिकता से जुड़े पहलुओं की भी गंभीरता से जांच की जा रही है।
उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि यदि उन्हें मतदाता सूची में किसी तरह की गड़बड़ी नजर आती है, तो वे चुनाव आयोग को इसकी जानकारी दें। आयोग ने इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की शिकायत व्यवस्था उपलब्ध कराई है।
पारदर्शिता से बढ़ेगा जनता का भरोसा
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि पारदर्शी मतदाता सूची से ही जनता का चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा मजबूत होता है। जब लोगों को यह विश्वास होता है कि मतदाता सूची निष्पक्ष और सही है, तो वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में ज्यादा सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग तकनीक का अधिक से अधिक इस्तेमाल कर रहा है, ताकि मतदाता सूची को अपडेट करना आसान और पारदर्शी बनाया जा सके। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए मतदाता अपने नाम की जांच, सुधार और शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम
विशेष गहन पुनरीक्षण को लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मतदाता सूची शुद्ध और पारदर्शी होगी, तो चुनावों की विश्वसनीयता भी अपने आप बढ़ेगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस बयान से यह साफ हो गया है कि चुनाव आयोग आने वाले समय में मतदाता सूची की गुणवत्ता को लेकर कोई समझौता नहीं करने वाला है। तेलंगाना सहित देश के अन्य राज्यों में चल रहा यह अभियान लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
