By: Vikash Kumar (Vicky)
अमेरिका में टैरिफ को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले के बाद यूनाइटेड स्टेट्स कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए कुछ टैरिफ प्रावधानों को समाप्त करने का एलान किया है। इस फैसले को ट्रंप की व्यापार नीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। साथ ही भारत समेत कई देशों के निर्यातकों को राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।

क्या है पूरा मामला?
ट्रंप प्रशासन के दौरान ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत कई देशों पर अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लगाए गए थे। इन टैरिफ का उद्देश्य अमेरिकी उद्योगों को बढ़ावा देना और व्यापार घाटा कम करना बताया गया था। हालांकि, कई उद्योग संगठनों और आयातकों ने इन टैरिफ को अदालत में चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि इन शुल्कों से आयात लागत बढ़ी और उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ पड़ा।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने टैरिफ लागू करने की प्रक्रिया और राष्ट्रपति के अधिकारों की व्याख्या पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत के फैसले के बाद CBP ने आधिकारिक रूप से कुछ टैरिफ आदेशों को खत्म करने की घोषणा कर दी।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत से फार्मास्यूटिकल्स, आईटी सेवाएं, इंजीनियरिंग उत्पाद, स्टील और टेक्सटाइल जैसे सामान अमेरिका निर्यात किए जाते हैं।
टैरिफ हटने से भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सकता है। विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) क्षेत्र को राहत मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत-अमेरिका व्यापार में और तेजी आ सकती है।

अमेरिकी उद्योगों की प्रतिक्रिया
अमेरिका के कई व्यापारिक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अतिरिक्त टैरिफ से लागत बढ़ गई थी, जिससे अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं दोनों पर असर पड़ा। वहीं कुछ घरेलू विनिर्माण संगठनों ने चिंता जताई है कि टैरिफ हटने से विदेशी प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
राजनीतिक मायने
यह फैसला राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। ट्रंप की व्यापार नीति उनके समर्थकों के बीच लोकप्रिय रही है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट और CBP का यह कदम राजनीतिक बहस को तेज कर सकता है। यह निर्णय कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के संतुलन को भी दर्शाता है।
भारत-अमेरिका व्यापार के आंकड़े
हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 190 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है। भारत से अमेरिका को प्रमुख निर्यात में दवाइयां, रत्न-आभूषण, आईटी सेवाएं और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं। वहीं अमेरिका से भारत को कच्चा तेल, रक्षा उपकरण और विमानन तकनीक का आयात होता है।

आगे की राह
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिकी प्रशासन इस फैसले के बाद नई व्यापार नीति को किस दिशा में ले जाता है। यदि टैरिफ पूरी तरह समाप्त होते हैं तो वैश्विक बाजार में स्थिरता आ सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद CBP द्वारा ट्रंप टैरिफ समाप्त करने की घोषणा ने वैश्विक व्यापार जगत में नई बहस छेड़ दी है। भारत के लिए यह राहत की खबर हो सकती है, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका भविष्य में व्यापार नीति को किस दिशा में ले जाता है।

