By: Vikash Kumar (Vicky)
पटना: बिहार सरकार ने 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए जमीन की रजिस्ट्री अब घर बैठे कराने की सुविधा शुरू करने का निर्णय लिया है। यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में लागू होगी। इस पहल का उद्देश्य बुजुर्गों को निबंधन कार्यालय के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाना और उन्हें सम्मानजनक व सहज सेवा उपलब्ध कराना है।

राज्य के निबंधन विभाग के अनुसार, बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। अब 80 साल से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को जमीन की खरीद-बिक्री या अन्य रजिस्ट्री कार्य के लिए कार्यालय में उपस्थित होने की अनिवार्यता नहीं रहेगी। विभाग की टीम तय समय पर उनके घर जाकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करेगी।

क्या है नई व्यवस्था?
नई व्यवस्था के तहत संबंधित बुजुर्ग या उनके परिजन ऑनलाइन या अधिकृत माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। आवेदन स्वीकृत होने के बाद निबंधन विभाग की विशेष टीम आवश्यक दस्तावेजों और बायोमेट्रिक उपकरणों के साथ आवेदक के घर पहुंचेगी। वहीं पर दस्तावेजों की जांच, हस्ताक्षर और बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
इस पहल से खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी, जहां निबंधन कार्यालय तक पहुंचना कठिन होता है।
क्यों जरूरी था यह फैसला?
बिहार में बड़ी संख्या में ऐसे बुजुर्ग हैं जो शारीरिक रूप से कमजोर हैं या चलने-फिरने में असमर्थ हैं। जमीन से जुड़े मामलों में अक्सर उनकी उपस्थिति अनिवार्य होती थी, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता था। कई बार स्वास्थ्य जोखिम के बावजूद उन्हें कार्यालय जाना पड़ता था। सरकार का मानना है कि डिजिटल और मोबाइल सेवा के जरिए पारदर्शिता बनाए रखते हुए वरिष्ठ नागरिकों को घर बैठे सेवा देना प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम है।

प्रक्रिया कैसे होगी?
80 वर्ष या उससे अधिक आयु का प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा।
संबंधित दस्तावेज पहले से तैयार रखने होंगे।
ऑनलाइन पोर्टल या अधिकृत सेवा केंद्र के माध्यम से आवेदन करना होगा।
विभागीय टीम निर्धारित तिथि पर घर जाकर सत्यापन करेगी।
बायोमेट्रिक और फोटो सत्यापन मौके पर ही किया जाएगा।
शुल्क भुगतान डिजिटल माध्यम से या निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होगा।
पारदर्शिता और सुरक्षा का ध्यान
निबंधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। मोबाइल बायोमेट्रिक डिवाइस और डिजिटल रिकॉर्डिंग के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी प्रकार की धोखाधड़ी न हो।
राज्य सरकार का कहना है कि इस सेवा से भ्रष्टाचार में कमी आएगी और बुजुर्गों को सम्मानजनक सुविधा मिलेगी।
ग्रामीण क्षेत्रों को होगा लाभ
ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सुविधा बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अक्सर उन्हें लंबी दूरी तय कर जिला मुख्यालय या प्रखंड कार्यालय जाना पड़ता था। नई व्यवस्था से समय, पैसा और शारीरिक श्रम—तीनों की बचत होगी।

1 अप्रैल 2026 से होगी शुरुआत
यह सुविधा 1 अप्रैल 2026 से पूरे बिहार में प्रभावी होगी। प्रारंभिक चरण में चयनित जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसे लागू किया जाएगा, जिसके बाद पूरे राज्य में विस्तार किया जाएगा।
प्रशासनिक सुधार की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल ‘ई-गवर्नेंस’ को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। डिजिटल सत्यापन और मोबाइल सेवा के जरिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है।
संभावित चुनौतियां
हालांकि इस योजना को लेकर उत्साह है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं—
तकनीकी दिक्कतें
दूरदराज इलाकों में नेटवर्क समस्या
दस्तावेजों की पूर्व तैयारी में देरी
सरकार का दावा है कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
बुजुर्गों के लिए सम्मान की पहल
यह कदम केवल सुविधा ही नहीं बल्कि वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान से भी जुड़ा है। उम्र के अंतिम पड़ाव पर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की मजबूरी खत्म करना सामाजिक दृष्टि से भी सराहनीय पहल मानी जा रही है।
बिहार सरकार की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी मॉडल साबित हो सकती है। यदि यह योजना सफल रहती है तो भविष्य में अन्य सेवाओं को भी घर-घर पहुंचाने की दिशा में काम किया जा सकता है।

