By: Vikash Kumar (Vicky)
बिहार — बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और विपक्षी विधायकों को कड़ी फटकार लगाई, सदन में अनुशासन बनाए रखने और सत्ताधारी सरकार के विकास एजेंडा को रेखांकित किया।
सत्र के दौरान विपक्ष ने राज्यपाल के अभिभाषण और सरकार के फैसलों पर तीखी प्रतिक्रियाएँ दीं, जिसका जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने विपक्षी टिप्पणियों पर तीखे कटाक्ष किए। विपक्ष के हंगामे और बार-बार प्रश्नों के उठने पर मुख्यमंत्री ने कई बार सदस्यों को व्यवस्थित होने और मुद्दों पर केंद्रित बहस करने के लिए कहा।

नीतीश कुमार ने कहा कि विधानसभा सदन वह स्थान है जहाँ लोकतांत्रिक बहस होती है, न कि व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप का मंच। उन्होंने विपक्ष को याद दिलाया कि बजट सत्र का उद्देश्य विकास योजनाओं पर चर्चा करना है, बजटary प्रावधानों पर पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, और नीति निर्माण को सुचारू रूप से आगे बढ़ाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में महिलाओं के रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सरकार ने कई महत्वाकांक्षी योजना लागू की हैं। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को तथ्यों के आधार पर बहस करनी चाहिए, बजाय कि केवल राजनीतिक आरोप लगाने के।

तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया
वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए कि राज्यपाल के अभिभाषण में वास्तविक मुद्दों जैसे बेरोज़गारी, अधूरे विकास कार्य, अव्यवस्थित कानून-व्यवस्था और शिक्षा प्रणाली की चुनौतियों को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की समस्याओं को हल करने में असफल रही है और जनता का विश्वास खो रही है। तेजस्वी ने खास तौर पर कहा कि बजट सत्र में लोगों को सीधे प्रभावित करने वाले मुद्दों जैसे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, पुलिस व्यवस्था की मजबूती, और शिक्षा प्रणाली के नवाचारों पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। विपक्षी दलों ने बजट दस्तावेज़ों पर सवाल उठाया और सरकार से जवाब-तलब किया कि विकास के प्रमुख क्षेत्रों में क्यों पर्याप्त संसाधन नहीं लाए गए। इस दौरान सदन में विपक्ष द्वारा जोरदार हंगामा हुआ और उच्च वाद-विवाद के बाद सदन की कार्यवाही में भारी आवाज़ें उठीं।

सदन की कार्यवाही और स्थिति
सदस्य अक्सर बजट सत्र के दौरान अपनी बात रखने के लिए उठते रहे, जिसमें विपक्षी विधायकों ने सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए और प्रमुख योजनाओं पर जवाब मांगा। मुख्यमंत्री ने कई बार सदन को व्यवस्थित रखते हुए विपक्ष से कहा कि लोकतांत्रिक बहस का सम्मान किया जाए।
सीएम ने यह भी चेतावनी दी कि जो भी सदस्य नियमों का उल्लंघन करेगा या व्यक्तिगत गतिविधियों के लिए सदन को बाधित करेगा, उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इससे सदन के कुछ हिस्सों में विपक्षी सदस्यों को सख्त फटकार का सामना करना पड़ा। हालांकि बहस कई मुद्दों पर तीखी रही, लेकिन सत्र का मुख्य उद्देश्य — बजट अनुमोदन और विभिन्न योजनाओं का विश्लेषण — पर ध्यान केंद्रित करते हुए सभी राजनीतिक दलों से संयम बरतने की अपील की गई।

राजनीतिक पृष्ठभूमि
बिहार के इस बजट सत्र का राजनीतिक परिदृश्य किसी भी चुनावी साल की तरह ही गर्म रहा है। 2025 विधानसभा चुनावों के परिणाम और नए नतीजों के बाद, जब एनडीए ने प्रबल बहुमत के साथ सरकार बनाई थी और नीतीश कुमार ने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तत्त्कालीन विपक्षी दलों की कोशिशें बढ़-चढ़कर सुनी जा रही हैं। अब सरकार का ध्यान विकास योजनाओं और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में है, जबकि विपक्ष इन नीतियों में नीतिगत कमियों और प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रहा है।

बजट सत्र के दौरान विधानसभा में हुई बहस ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि राजनीति में मतभेद लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन सदन में अनुशासन और आदर्श व्यवहार का पालन करना भी आवश्यक है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा विपक्ष पर की गई टिप्पणियाँ और उन्हें फटकारना, विपक्ष की तीखी प्रतिक्रियाएँ, और सदन में उठे हंगामे — यह सब राज्य की राजनीतिक धार को दर्शाते हैं। विधानसभा का यह सत्र न केवल बजटary निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण था, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरण और विकास एजेंडा पर चल रही बहस को भी उजागर करता है।

