पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ता जा रहा है। चुनाव प्रचार के बीच केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के शीर्ष रणनीतिकार अमित शाह ने एक बड़ा बयान देकर सियासी हलचल मचा दी है। शाह ने दावा किया है कि आगामी 14 नवंबर को जब नतीजे आएंगे, तब एनडीए गठबंधन 160 से ज्यादा सीटों पर शानदार जीत हासिल करेगा और दोबारा बिहार में सरकार बनाएगा।
अमित शाह ने मंगलवार को पटना और गया की जनसभाओं को संबोधित करते हुए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अब विकास, रोजगार और सुशासन चाहती है, न कि परिवारवाद और भ्रष्टाचार की राजनीति।
अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री_
“बिहार की जनता ने मन बना लिया है। 14 नवंबर को जब परिणाम आएंगे, तो नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में एनडीए 160 से अधिक सीटों के साथ प्रचंड बहुमत से सरकार बनाएगा।”
विपक्ष पर हमला
अमित शाह ने अपने भाषण में आरजेडी और महागठबंधन पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जो लोग “परिवार नहीं संभाल पाए, वो बिहार क्या संभालेंगे?” शाह ने कहा कि जनता ने 15 साल जंगलराज देखा है, अब वो दौर लौटकर नहीं आने वाला।
उन्होंने कहा कि बीजेपी और जेडीयू गठबंधन ने बिहार को बिजली, सड़क, शिक्षा और कानून व्यवस्था में नई दिशा दी है, जबकि विपक्ष ने केवल जातिवाद और तुष्टिकरण की राजनीति की।

विकास के मुद्दे पर एनडीए का फोकस
अमित शाह ने कहा कि केंद्र और राज्य मिलकर बिहार को विकास के पथ पर आगे बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बिहार को हर क्षेत्र में प्राथमिकता दी जा रही है — चाहे वह रेल, सड़क, उद्योग, कृषि या रोजगार का क्षेत्र हो।
उन्होंने यह भी कहा कि एनडीए सरकार ने गरीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना, किसानों के लिए पीएम किसान सम्मान निधि, और युवाओं के लिए स्टार्टअप योजना के जरिए नए अवसर पैदा किए हैं।
शाह ने कहा कि अगले कार्यकाल में बिहार को “पूर्वी भारत का औद्योगिक हब” बनाया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने पहले ही कई औद्योगिक गलियारे और बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
बिहार की जनता में एनडीए को लेकर विश्वास
अमित शाह ने दावा किया कि बिहार की जनता इस बार विकास बनाम भ्रष्टाचार के एजेंडे पर वोट करेगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी ने देशभर में गरीबों और किसानों के लिए योजनाएं चलाई हैं, उसी तरह नीतीश कुमार ने भी बिहार में शिक्षा, सड़क और महिला सुरक्षा पर काम किया है।
शाह ने कहा कि जनता इस बार विपक्ष के झूठे वादों में नहीं फंसेगी। “महागठबंधन केवल वोट बैंक की राजनीति करता है, जबकि एनडीए बिहार के भविष्य की सोचता है,” उन्होंने कहा।
चुनावी गणित पर शाह का भरोसा
शाह ने स्पष्ट कहा कि एनडीए का वोट बैंक पहले से ज्यादा मजबूत हुआ है। बीजेपी, जेडीयू, हम और लोजपा(रा) मिलकर हर क्षेत्र में विपक्ष को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहले चरण में हुई वोटिंग में जनता ने एनडीए को भरपूर समर्थन दिया है और दूसरे चरण में यह समर्थन लहर में बदल जाएगा।
अमित शाह_
“हमने गरीबों के घर बिजली पहुंचाई, महिलाओं को गैस सिलेंडर दिया और युवाओं को रोजगार दिया। बिहार में हमारी सरकार विकास की गारंटी है।”
विपक्ष की प्रतिक्रिया
अमित शाह के इस बयान पर आरजेडी और कांग्रेस ने पलटवार किया है। आरजेडी प्रवक्ता ने कहा कि “अमित शाह के पास आंकड़ों का कोई आधार नहीं है, वे सिर्फ हवा में बातें करते हैं।”
वहीं, कांग्रेस ने कहा कि बिहार की जनता इस बार “बदलाव” चाहती है और एनडीए की नीतियों से नाराज है। महागठबंधन नेताओं का कहना है कि इस बार जनता “रोजगार और महंगाई” के मुद्दों पर वोट करेगी।
चुनाव का माहौल गरमाया
जैसे-जैसे चुनाव परिणाम की तारीख नजदीक आ रही है, बिहार की सियासत और तेज होती जा रही है। सभी दल अपनी-अपनी रणनीति में जुटे हैं। अमित शाह के इस बयान के बाद एनडीए कार्यकर्ताओं में जोश देखने को मिला है। वहीं, महागठबंधन के नेता अपने प्रत्याशियों के समर्थन में क्षेत्रीय स्तर पर प्रचार तेज कर रहे हैं।
जनता का मूड
ग्राउंड रिपोर्ट्स के अनुसार, बिहार के कई जिलों में चुनावी माहौल अब दो ध्रुवों में बंट चुका है — एक ओर एनडीए की विकास और स्थिरता की बात, दूसरी ओर विपक्ष की परिवर्तन और बेरोजगारी की बात।
कई क्षेत्रों में युवाओं और महिलाओं के बीच प्रधानमंत्री मोदी की योजनाओं का असर देखने को मिल रहा है, जबकि ग्रामीण इलाकों में आरजेडी का पारंपरिक वोट बैंक अभी भी प्रभावी है।
नतीजों से पहले सस्पेंस बरकरार
बिहार के नतीजे 14 नवंबर को आएंगे, लेकिन उससे पहले ही अमित शाह का यह “160+ सीटों का दावा” सियासी हलचल बढ़ा चुका है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या एनडीए वाकई शाह के दावे को हकीकत में बदल पाता है, या महागठबंधन कोई बड़ा उलटफेर कर दिखाता है।
बिहार चुनाव 2025 में अमित शाह का यह बयान बीजेपी और एनडीए के आत्मविश्वास को दर्शाता है। चुनाव प्रचार के आखिरी चरण में यह दांव एनडीए कार्यकर्ताओं के मनोबल को जरूर बढ़ाएगा। लेकिन जनता क्या फैसला करती है, यह तो 14 नवंबर के नतीजे ही बताएंगे।

