
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों में बीजेपी ने अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी कर दी है। इस सूची में कुल 71 नाम शामिल हैं। पार्टी ने इस बार जातीय और सामाजिक समीकरण को साधने की पूरी रणनीति अपनाई है। यह कदम बीजेपी के मिशन ‘बिहार फतेह 2025’ के तहत लिया गया माना जा रहा है, जिसमें पिछड़े, दलित, महादलित और युवा वर्ग को खास तवज्जो दी गई है।
बीजेपी की पहली सूची में किन्हें मिला मौका
सूत्रों के अनुसार, बीजेपी ने उन सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की है, जहां पार्टी का पारंपरिक वोट बैंक मजबूत माना जाता है। इनमें से कई मौजूदा विधायकों को दोबारा टिकट दिया गया है, वहीं कुछ नए चेहरों को भी मौका मिला है।
पार्टी ने इस बार युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया है। करीब 20 प्रतिशत सीटें महिलाओं को दी गई हैं, जबकि लगभग 25 प्रतिशत उम्मीदवार युवा वर्ग से आते हैं। इसके अलावा, अति पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति समुदाय से भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया है।
जातीय समीकरण पर सटीक गणित
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी ने इस सूची के ज़रिए बिहार की जटिल जातीय राजनीति को ध्यान में रखकर संतुलन साधने की कोशिश की है। पार्टी ने ब्राह्मण, भूमिहार, राजपूत, कुर्मी, कोयरी, यादव, पासवान और दलित वर्ग के नेताओं को समान रूप से शामिल किया है ताकि हर क्षेत्र में सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
पार्टी के वरिष्ठ नेता ने बताया,
“बीजेपी अब केवल ‘हिंदुत्व’ या ‘मोदी लहर’ पर निर्भर नहीं है, बल्कि सामाजिक आधार को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह सूची उसी रणनीति का हिस्सा है।”
किस क्षेत्र से कौन उम्मीदवार
पार्टी की सूची में मगध, मिथिलांचल, सीमांचल और भोजपुर के क्षेत्र से बड़े नाम शामिल हैं।
पटना जिले की कई सीटों पर पुराने चेहरों को बरकरार रखा गया है।
गया, नालंदा, और मुजफ्फरपुर क्षेत्रों से नए चेहरों को मैदान में उतारा गया है।
सीमांचल के मुस्लिम बहुल इलाकों में भी बीजेपी ने रणनीतिक तौर पर ऐसे उम्मीदवार चुने हैं जो स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखते हैं।
चिराग पासवान और जदयू से तालमेल पर संकेत
बीजेपी ने अपनी पहली सूची जारी कर साफ कर दिया है कि वह सीट बंटवारे में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और जदयू के साथ सख्त रुख अपनाएगी। हालांकि अभी तक औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन बीजेपी के सूत्रों के अनुसार, सीट बंटवारे की बातचीत अंतिम चरण में है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह सूची यह भी दर्शाती है कि बीजेपी स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की भी तैयारी रखती है। पार्टी ने कई ऐसी सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए हैं, जहां पिछली बार गठबंधन सहयोगियों के प्रत्याशी थे।

वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रिया
सूची जारी होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर लिखा —
“बीजेपी बिहार में विकास, सुशासन और जनविश्वास की राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। पार्टी का हर कार्यकर्ता इस बार बिहार में बहुमत का नया इतिहास लिखेगा।”
वहीं प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा,
“यह सूची केवल उम्मीदवारों की घोषणा नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य की रूपरेखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बिहार में विकास की नई गाथा लिखी जाएगी।”
विपक्षी दलों ने साधा निशाना
बीजेपी की सूची जारी होते ही विपक्ष ने पार्टी पर निशाना साधा है।
राजद प्रवक्ता ने कहा कि,
“बीजेपी ने जातीय संतुलन के नाम पर केवल दिखावा किया है। जमीनी स्तर पर जनता अब इनके छलावे में नहीं आएगी।”
वहीं कांग्रेस ने भी आरोप लगाया कि बीजेपी विकास की बात छोड़ केवल चुनावी गणित में उलझी हुई है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर बीजेपी की इस सूची को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने पार्टी की सामाजिक विविधता की सराहना की, तो कुछ ने टिकट वितरण में स्थानीय नेताओं की उपेक्षा का आरोप लगाया।
पटना के एक युवा मतदाता ने कहा,
“बीजेपी ने इस बार युवाओं को मौका दिया है, लेकिन उम्मीद है कि ये केवल चुनावी दिखावा न हो।”
चुनाव अभियान का अगला चरण
पार्टी अब जल्द ही दूसरी और तीसरी सूची भी जारी करेगी। इसके साथ ही ‘मोदी का संकल्प — आत्मनिर्भर बिहार’ थीम पर आधारित प्रचार अभियान शुरू होने जा रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं को गांव-गांव तक जाकर प्रधानमंत्री की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया है।
विश्लेषण: बीजेपी की रणनीति कितनी कारगर?
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि बिहार में जातीय समीकरण हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। बीजेपी का यह संतुलित दांव उसे लाभ पहुंचा सकता है, खासकर तब जब विपक्ष अभी भी सीटों और उम्मीदवारों के बंटवारे में उलझा है।
हालांकि यह भी साफ है कि राज्य में मुकाबला त्रिकोणीय रहेगा — एनडीए, इंडिया गठबंधन और जनसुराज-एलजेपी जैसे तीसरे मोर्चे के बीच।

