
पटना. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर हम पार्टी (Hindustani Awam Morcha – HAM) ने अपनी पहली उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की इस पार्टी ने कुल 6 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है। इस लिस्ट में पार्टी ने सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों का पूरा ध्यान रखा है।
पार्टी की ओर से जारी बयान के मुताबिक, ये उम्मीदवार राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों से चुने गए हैं ताकि हर वर्ग को प्रतिनिधित्व मिल सके। मांझी ने कहा कि “हमारी पार्टी जनता के मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में उतरेगी, हमारा लक्ष्य सत्ता नहीं बल्कि सेवा है।”
HAM पार्टी की पहली सूची में शामिल उम्मीदवारों के नाम
1. गया टाउन सीट – राजेश मांझी
2. औरंगाबाद – प्रमोद कुमार सिंह
3. जहानाबाद – सुनीता देवी
4. नवादा – अमरजीत यादव
5. सासाराम – मुकेश चौधरी
6. मधुबनी – डॉ. कमलेश ठाकुर
सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने इन प्रत्याशियों के चयन में जातीय और स्थानीय समीकरणों को प्राथमिकता दी है। जहां गया और जहानाबाद जैसी सीटों पर दलित और अति पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को मौका दिया गया है, वहीं सासाराम और मधुबनी सीटों पर पार्टी ने शिक्षित और युवा चेहरों पर भरोसा जताया है।
जीतन राम मांझी बोले – “जनता तय करेगी बिहार की दिशा”
सूची जारी करने के बाद जीतन राम मांझी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बिहार में आज भी शिक्षा, रोजगार और विकास के मुद्दे सबसे अहम हैं। उन्होंने कहा —
“हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति या पार्टी से नहीं, बल्कि अन्याय और असमानता से है। हमने उम्मीदवारों का चयन पूरी पारदर्शिता के साथ किया है और हर वर्ग का ध्यान रखा है।”
मांझी ने यह भी कहा कि आगामी दिनों में दूसरी और तीसरी सूची भी जारी की जाएगी। पार्टी जल्द ही अपना घोषणापत्र (Manifesto) भी जारी करेगी, जिसमें युवाओं, किसानों और गरीबों के हित में कई अहम वादे किए जाएंगे।
NDA और INDIA गठबंधन के बीच अपनी पहचान बनाने की कोशिश
बिहार में इस बार चुनावी समीकरण बेहद दिलचस्प बन चुके हैं। एक ओर जहां बीजेपी, जेडीयू और एलजेपी (रामविलास) जैसे दल NDA में शामिल हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस, राजद और वाम दल INDIA गठबंधन के हिस्से हैं।
ऐसे में HAM पार्टी अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। पार्टी ने फिलहाल किसी गठबंधन की पुष्टि नहीं की है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि वह चुनाव के बाद समर्थन की रणनीति पर विचार कर सकती है।

सामाजिक समीकरण और वोट बैंक पर नजर
HAM पार्टी का मुख्य वोट बैंक दलित और महादलित समुदाय है। 2015 और 2020 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने सीमित सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन कई जगहों पर उसका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मांझी अपने पुराने वोट बैंक को फिर से सक्रिय करने की कोशिश में हैं, खासकर गया, जहानाबाद, औरंगाबाद और सासाराम जैसे इलाकों में जहां उनकी पार्टी का पारंपरिक प्रभाव रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. संजय कुमार का कहना है कि “HAM पार्टी का उद्देश्य अपनी राजनीतिक उपस्थिति को मजबूत करना है। अगर पार्टी 10 से 15 सीटों पर प्रभाव दिखा पाती है तो यह चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है।”
वहीं, कुछ जानकारों का मानना है कि यदि मांझी की पार्टी किसी बड़े गठबंधन के साथ जाती है तो उसका फायदा दोनों पक्षों को हो सकता है।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
राजद प्रवक्ता ने कहा कि “HAM की अपनी सीमित पकड़ है, लेकिन मांझी जी का अनुभव राजनीति के लिए हमेशा अहम रहा है।”
वहीं, बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि “HAM के उम्मीदवारों का चुनाव पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि जनता इस बार विकास के मुद्दे पर वोट करेगी।”
अगले चरण की तैयारी में जुटी HAM पार्टी
पार्टी के प्रवक्ता ने बताया कि आने वाले हफ्तों में बिहार के सभी जिलों में जनसंवाद यात्राएं और छोटे जनसभाएं आयोजित की जाएंगी। इसके माध्यम से पार्टी अपने प्रत्याशियों को जनता के बीच ले जाएगी।
मांझी खुद कई जिलों का दौरा करेंगे और जनता से सीधा संवाद करेंगे।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अब अंतिम मोड़ पर है और सभी पार्टियां मैदान में उतर चुकी हैं। ऐसे में HAM पार्टी की 6 उम्मीदवारों की पहली सूची से यह साफ है कि मांझी का फोकस दलित, पिछड़ा और ग्रामीण वोटरों पर रहेगा।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता उन्हें कितना समर्थन देती है और क्या वे बिहार की सियासत में कोई नया समीकरण बना पाते हैं या नहीं।

