बिहार चुनाव 2025 के लिए सियासी सरगर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने बुधवार को अपने 101 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। इस सूची में पार्टी ने सामाजिक समीकरण को साधने की पूरी कोशिश की है। सबसे ज्यादा टिकट पिछड़ा वर्ग (OBC) के प्रत्याशियों को दिए गए हैं, जबकि सवर्ण, अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और अल्पसंख्यक वर्ग को भी उचित प्रतिनिधित्व मिला है।
OBC पर जदयू का सबसे बड़ा दांव
इस बार जदयू ने अपने सामाजिक समीकरण की बुनियाद पिछड़े वर्गों पर रखी है। जारी सूची में 37 OBC उम्मीदवारों को टिकट मिला है। यह स्पष्ट संकेत है कि नीतीश कुमार की पार्टी 2025 के विधानसभा चुनाव में पिछड़े वर्गों को अपने वोट बैंक के रूप में मजबूती से साधना चाहती है। पार्टी मानती है कि बिहार की राजनीति में यह वर्ग निर्णायक भूमिका निभाता है।
अति पिछड़ा वर्ग और दलितों को भी मिला सम्मान
OBC के बाद, पार्टी ने अति पिछड़ा वर्ग (EBC) को भी खास तरजीह दी है। करीब 25 उम्मीदवार इस श्रेणी से हैं, जबकि दलित वर्ग से 18 प्रत्याशियों को टिकट दिया गया है। जदयू हमेशा से EBC कार्ड को अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत मानती आई है, और इस बार भी नीतीश कुमार ने उसी रणनीति पर काम किया है।
सवर्णों और अल्पसंख्यकों का भी रखा ख्याल
जातीय समीकरण को संतुलित रखने के लिए पार्टी ने सवर्ण वर्ग से 12 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। इनमें ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार और कायस्थ वर्गों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके अलावा, 9 मुस्लिम उम्मीदवारों को भी टिकट दिया गया है, जिससे पार्टी ने अल्पसंख्यक वोट बैंक को भी साधने की कोशिश की है।
महिला प्रत्याशियों की संख्या बढ़ी
इस बार जदयू ने महिलाओं को भी अधिक अवसर देने की कोशिश की है। कुल उम्मीदवारों में से 15 महिलाएं हैं, जिनमें से कई पहली बार चुनावी मैदान में उतरेंगी। पार्टी के अंदर इसे नीतीश कुमार के “नारी सशक्तिकरण” अभियान की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।
सीट बंटवारे में संतुलन की नीति
सूत्रों के अनुसार, जदयू ने सूची जारी करने से पहले अपने गठबंधन सहयोगियों से भी विचार-विमर्श किया। पार्टी ने उन सीटों पर फोकस किया है जहां 2020 के विधानसभा चुनाव में या तो वह दूसरे स्थान पर रही थी या मुकाबला कड़ा था। कई सीटों पर पुराने उम्मीदवारों को दोबारा मौका दिया गया है, जबकि लगभग 40 नए चेहरों को भी मौका मिला है।
नीतीश कुमार की रणनीति साफ – हर वर्ग को जोड़ना
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार इस चुनाव में किसी भी वर्ग को नाराज नहीं करना चाहते। जदयू की यह लिस्ट सामाजिक प्रतिनिधित्व का एक सटीक मिश्रण मानी जा रही है। पार्टी का मकसद है कि “सबका साथ, सबका विकास” के संदेश के साथ जातीय सीमाओं को पाटते हुए हर वर्ग में पैठ बनाई जाए।
विपक्ष पर सीधा वार
जदयू के प्रवक्ताओं ने इस लिस्ट के माध्यम से विपक्ष पर भी निशाना साधा है। उनका कहना है कि “कुछ पार्टियां सिर्फ जाति की राजनीति करती हैं, जबकि जदयू हर वर्ग के लोगों को प्रतिनिधित्व देने में विश्वास रखती है।” उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA एक बार फिर सरकार बनाएगा।
जनता में मिला मिश्रित रिएक्शन
लिस्ट जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोगों ने इसे “समावेशी कदम” बताया, जबकि कुछ ने कहा कि टिकट वितरण में पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई है। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह लिस्ट चुनावी समीकरणों के लिहाज से नीतीश कुमार की सोच-समझकर बनाई गई रणनीति को दर्शाती है।
बिहार की सियासत हमेशा से जातीय संतुलन पर निर्भर रही है, और जदयू ने इसे एक बार फिर केंद्र में रखकर चुनावी समर में उतरने की तैयारी कर ली है। 101 उम्मीदवारों की यह सूची बताती है कि पार्टी न सिर्फ अपने परंपरागत वोट बैंक को मजबूत कर रही है बल्कि नए समीकरण भी साधने की कोशिश में है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस लिस्ट का चुनावी असर कितना गहरा पड़ता है।

