पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक में दरारें साफ दिखाई देने लगी हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इस बार संकेत दिया है कि वह बिहार में गठबंधन का हिस्सा बनकर नहीं, बल्कि अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। JMM के इस फैसले ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जो पहले से ही सीट बंटवारे को लेकर अंदरूनी असहमति से जूझ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, JMM का मानना है कि बिहार के सीमावर्ती इलाकों — विशेषकर संथाल परगना और सीमांचल क्षेत्र — में उनकी पकड़ मजबूत है, और पार्टी स्वतंत्र रूप से अपने उम्मीदवार उतारकर जनाधार बढ़ाना चाहती है। वहीं RJD और कांग्रेस इस कदम को ‘INDIA ब्लॉक के साझा मकसद से भटकना’ मान रही हैं।
गठबंधन की एकता पर सवाल
INDIA ब्लॉक का गठन 2023 में बीजेपी के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा के रूप में किया गया था। लेकिन बिहार में यह एकता शुरू से ही कमजोर नजर आई। पहले RJD और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे पर तकरार हुई, फिर CPI(ML) और अन्य वाम दलों ने कई सीटों पर “फ्रेंडली फाइट” के संकेत दिए। अब JMM के पीछे हटने से यह सवाल और गहरा गया है कि क्या विपक्ष वास्तव में एकजुट होकर NDA को चुनौती दे पाएगा?
RJD की रणनीति पर प्रभाव
JMM के इस फैसले का सीधा असर RJD की चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है। तेजस्वी यादव लगातार विपक्षी एकता की बात करते रहे हैं, लेकिन अब उन्हें अपने सहयोगियों को साधने में अतिरिक्त मेहनत करनी होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि RJD का फोकस इस बार युवाओं, बेरोजगारी, और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर है। ऐसे में गठबंधन की कमजोरी इन मुद्दों की धार को कमजोर कर सकती है।
कांग्रेस की स्थिति और असमंजस
कांग्रेस पहले से ही बिहार में कमजोर संगठन के साथ मैदान में है। JMM के अलग होने से उसे सीमांचल और झारखंड सीमा के इलाकों में चुनावी सहयोग खोना पड़ सकता है। वहीं पार्टी के भीतर भी कई नेता यह मान रहे हैं कि INDIA ब्लॉक का लोकसभा चुनाव जैसा प्रभाव विधानसभा में नहीं दिख रहा।
NDA में बढ़ी खुशी
दूसरी ओर, NDA इस पूरे घटनाक्रम को अपने पक्ष में जाता देख रहा है। भाजपा और जदयू के नेताओं ने इसे विपक्षी खेमे की “विफल रणनीति” करार दिया है। NDA का दावा है कि विपक्ष की यह बिखरावट जनता के बीच यह संदेश दे रही है कि INDIA ब्लॉक केवल सत्ता के लिए बना एक अवसरवादी गठबंधन है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “तेजस्वी यादव और कांग्रेस केवल बयानबाजी करते हैं, लेकिन जब चुनाव आता है तो उनके सहयोगी ही उन पर भरोसा नहीं करते। NDA विकास और सुशासन की राजनीति में यकीन रखता है।”
जदयू के एक वरिष्ठ नेता ने जोड़ा कि “बिहार की जनता स्थिर सरकार चाहती है, न कि टूटे हुए गठबंधन।”
JMM की मंशा क्या है?
JMM के सूत्रों ने बताया कि पार्टी बिहार के आदिवासी और अल्पसंख्यक इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है। 2025 के चुनाव को वह “राजनीतिक विस्तार” के रूप में देख रही है। पार्टी प्रमुख हेमंत सोरेन ने हाल ही में कहा था कि “हम हर राज्य में अपनी पहचान के साथ खड़े होना चाहते हैं, गठबंधन से बाहर रहकर भी जनता के मुद्दे उठाएंगे।”
INDIA ब्लॉक में बढ़ता अविश्वास
विशेषज्ञों का कहना है कि INDIA ब्लॉक के भीतर संवाद की कमी और नेतृत्व पर असहमति ही इस टूट की मुख्य वजह है। दिल्ली और झारखंड के नेताओं के बीच हाल के हफ्तों में कई बैठकें हुईं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. संजय कुमार के अनुसार, “यदि यह स्थिति बनी रही, तो बिहार में विपक्षी मतों का बिखराव NDA को भारी बढ़त दिला सकता है।”
बिहार चुनाव 2025 अब केवल सत्ता का नहीं, बल्कि विपक्षी एकता की परीक्षा भी बन चुका है। JMM के कदम पीछे खींचने से INDIA ब्लॉक की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या तेजस्वी यादव, कांग्रेस और वाम दल इस संकट से उबरकर एक साझा रणनीति बना पाते हैं, या NDA इस विभाजन का पूरा फायदा उठा लेगा।

