बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण से ठीक पहले राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरम हो गया है। महागठबंधन की ओर से चुनाव प्रचार की कमान संभाल रहे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि 20 साल की सत्ता ने बिहार को विकास नहीं, बल्कि पिछड़ेपन की ओर धकेला है।

“बिहार में गरीबी, बेरोजगारी और पलायन बढ़ा” – तेजस्वी यादव का बयान
तेजस्वी यादव ने रविवार को पटना, समस्तीपुर और जहानाबाद की चुनावी रैलियों में कहा,
“बीते 20 सालों में बिहार में गरीबी बढ़ी है, बेरोजगारी चरम पर है, और लाखों नौजवान रोज़गार के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं। एनडीए सरकार ने सिर्फ नारे दिए, लेकिन धरातल पर कोई उद्योग नहीं लगाया। आज भी बिहार देश के सबसे पिछड़े राज्यों में गिना जाता है।”
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार की नीतियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तीनों क्षेत्रों को कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार की युवा आबादी आज भी अवसरों से वंचित है, जबकि दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र में बिहार के लोग मजदूरी करने को मजबूर हैं।
महागठबंधन की सरकार बनेगी तो हर जिले में रोजगार मिशन – तेजस्वी
आरजेडी नेता ने कहा कि अगर महागठबंधन की सरकार बनती है तो “हर जिले में रोजगार मिशन” शुरू किया जाएगा, ताकि युवाओं को अपने ही राज्य में काम के अवसर मिल सकें।
उन्होंने कहा —
“हमारी सरकार बनी तो सबसे पहले खाली पड़े लाखों सरकारी पदों पर नियुक्तियां होंगी। युवाओं को अब दिल्ली या पंजाब नहीं जाना पड़ेगा।”
तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि महागठबंधन की प्राथमिकता शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों की आय बढ़ाने पर होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए ने सिर्फ “घोषणाओं की राजनीति” की, लेकिन बिहार में कोई ठोस काम नहीं हुआ।
“विकास का ढोल पीटने वाले बताएं – उद्योग कहां है?”
तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में उद्योग लगाने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा,
“20 साल से एनडीए बिहार में सत्ता में है। अगर सब कुछ अच्छा हुआ है, तो लोग अब भी पलायन क्यों कर रहे हैं? युवाओं के पास नौकरी क्यों नहीं है? उद्योग कहां है? अस्पतालों की हालत क्यों खराब है?”
तेजस्वी ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सिर्फ कुर्सी बचाने में लगे हैं, जबकि जनता महंगाई और बेरोजगारी से परेशान है।
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने भी बिहार की उपेक्षा की है और विशेष राज्य का दर्जा अब तक नहीं दिया गया।
एनडीए की ओर से पलटवार – “तेजस्वी को जवाब देना चाहिए लालू राज की यादों का”
तेजस्वी यादव के बयान पर एनडीए नेताओं ने तीखा पलटवार किया। भाजपा प्रवक्ता संजय जायसवाल ने कहा कि तेजस्वी यादव को पहले अपने पिता लालू प्रसाद के शासनकाल को याद करना चाहिए, जब बिहार “अपराध और अराजकता” का पर्याय बन गया था।
उन्होंने कहा —
“आज बिहार में सड़कें हैं, बिजली है, कानून का राज है। तेजस्वी को बताना चाहिए कि उन्होंने डेप्युटी सीएम रहते हुए क्या किया था।”
जदयू नेताओं ने भी कहा कि तेजस्वी युवाओं को भ्रमित कर रहे हैं, जबकि एनडीए ने बिहार में शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण पर काम किया है।
जनता के मुद्दे केंद्र में: पलायन, बेरोजगारी और महंगाई पर बढ़ी बहस
बिहार चुनाव के इस चरण में पलायन, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दे केंद्र में हैं।
तेजस्वी यादव लगातार युवा मतदाताओं को साधने की कोशिश में हैं, वहीं एनडीए सरकार अपने “विकास कार्यों” का हवाला देकर वोट मांग रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में सत्ता विरोधी लहर (anti-incumbency) का असर इस बार साफ दिख सकता है।
दूसरे चरण में जिन सीटों पर मतदान होना है, वहां आरजेडी और जदयू के बीच सीधा मुकाबला है।
तेजस्वी का चुनावी एजेंडा: रोजगार, शिक्षा और उद्योग
तेजस्वी यादव ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में कहा है कि
10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की योजना बनेगी
हर जिले में नया औद्योगिक केंद्र विकसित किया जाएगा
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति होगी
किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद की गारंटी दी जाएगी
उनका कहना है कि “बिहार के युवाओं को अब दिल्ली-मुंबई नहीं जाना होगा, रोजगार यहीं मिलेगा।”
दूसरे चरण से पहले सियासी टकराव तेज
जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, तेजस्वी यादव और एनडीए के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है।
एक ओर तेजस्वी “परिवर्तन” की बात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर एनडीए “विकास के निरंतरता” की अपील कर रही है।
अब देखना होगा कि जनता 20 साल के शासन के बाद किसे मौका देती है – तेजस्वी का नया वादा या नीतीश का अनुभव।

