By: Vikash Kumar (Vicky)
बिहार — उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राज्य में बुलडोज़र के ज़रिये जारी अतिक्रमण उन्मूलन अभियान ने जहां कई स्थानों पर अवैध निर्माणों को धराशायी किया है, वहीं विपक्षी दल और आम जनता अब कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण के मुद्दे पर सवाल उठा रहे हैं।

राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श के केंद्र में यह मुद्दा तब तब आया जब पटना, सीवान, फुलवारी सहित राज्य के कई हिस्सों में अपराध-सम्बन्धी घटनाओं और अपहरण की खबरें आने लगीं। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि बुलडोज़र जैसे दिखावे के कदमों से अधिक, बिहार को अपराध नियंत्रण में ठोस और मापनीय परिणाम की आवश्यकता है।

सम्राट चौधरी के गृह मंत्री बनने के बाद से बुलडोज़र एक्शन बिहार में व्यापक रूप से चर्चा में है। अधिकारियों ने अवैध अतिक्रमण हटाने के कई ऑपरेशन चलाये हैं, जिससे सार्वजनिक जमीन और फुटपाथों पर अतिक्रमण करने वालों को हटाया गया। पटना में इस अभियान का उद्देश्य सड़क पारगमन बेहतर बनाना और सार्वजनिक दीक्षा के उपयोग को सुरक्षित करना बताया गया है।

हालांकि, कानून-व्यवस्था विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अतिक्रमण हटाना पर्याप्त नहीं है; नागरिकों को सुरक्षा दिलाने और अपराध के मूल कारणों को रोकने के लिए पुलिसिंग में सुधार, त्वरित न्याय और सामाजिक आंदोलन की आवश्यकता है।
राजद के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने विधान परिषद की कार्यवाही में सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि बढ़ते अपराध, अपहरण और लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति पर जवाब देना राज्य के नेतृत्व की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में स्थिति इतनी गंभीर है कि लोग “जंगलराज” और “मंगलराज” की तुलना में बेहतर व्यवस्था की बात करने लगे हैं।

इस सैद्धांतिक बयानबाज़ी के बीच, आम लोग अपने दैनिक जीवन में अक्सर असुरक्षा का सामना करते हैं। कई परिवारों ने बताया कि चूंकि उनमें से कुछ सदस्यों को अपराध की घटना के बाद न्याय तक पहुँचने में महीनों लग जाते हैं, इसलिए उन्हें लगता है कि सरकार को अपराध नियंत्रण को प्राथमिकता देना चाहिए, प्रदर्शन से पहले परिणामों पर ध्यान देना चाहिए।
सम्राट चौधरी ने मीडिया में अपने बयान में स्पष्ट किया है कि बिहार में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है और पुलिस को अपराध रोकने के लिए पूरी स्वतंत्रता दी गई है। उन्होंने कहा कि लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति मजबूत रहेगी और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अभियानों में बुलडोज़र का उपयोग, अतिक्रमण हटाने के लिए एक कड़ा कदम हो सकता है, लेकिन जनता तब अधिक आश्वस्त होगी जब अपराध की दर में गिरावट आने लगे और त्वरित न्याय मिलने लगे। इससे न केवल कानून की प्रतिष्ठा बढ़ेगी, बल्कि आम नागरिकों में भी विश्वास जमेगा।
पुलिस विभाग ने 2025 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में हत्या की संख्या में थोड़ी गिरावट देखी है, लेकिन अब भी निजी दुश्मनी, ज़मीन विवाद और पारिवारिक झगड़े जैसे कारण आम अपराधों के मुख्य उत्प्रेरक हैं।

राज्य सरकार ने सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उपायों जैसे एंटी-रोमियो स्क्वाड और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की घोषणाएं की हैं, लेकिन इन नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और रणनीतिक निगरानी के अभाव में लोगों का विश्वास पूरी तरह से बहाल नहीं हो पाया है।

विशेष रूप से विपक्षी दलों का मानना है कि बुलडोज़र जैसे दिखावे के कदम जिलों में प्रत्यक्ष रूप से अपराध को कम नहीं कर रहे हैं, वर्ना अपराध दर में स्थिर गिरावट दिखनी चाहिए थी। वहीं सरकार का दावा है कि कानून व्यवस्था के सुधार के लिए कई स्तरों पर योजना बनाई जा रही है और इसके लिए पुलिस और प्रशासन दोनों ही जवाबदेह हैं।

बिहार के लिए अब समय आ गया है कि वह न केवल अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफ कड़े कदम उठाए, बल्कि अपराध नियंत्रण और सामाजिक सुरक्षा में असली, परिणाम-उन्मुख प्रगति दिखाये। जनता भी केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षित और न्यायसंगत सामाजिक व्यवस्था की मांग कर रही है, जो अंततः राज्य की समग्र प्रगति का आधार बनें।


