2025 Bihar Legislative Assembly election के पहले चरण की वोटिंग हो रही है, जहाँ 121 सीटों पर मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इस अवसर पर राजनीतिक गतिविधियाँ चरम पर हैं — चल रही है बड़ी-बड़ी रैलियाँ, तीखी हमलावर बयानबाजी, तथा गठबंधन-रणनीति पर गहरी निगाहें।
मुख्यालय से बाहर निकलकर दीवारों पर पोस्टरों और बैनरों के बीच अब कब्ज़ा जमाना और वोट बैंक शांत नहीं रहने वाला विषय बन चुका है। मुख्य रूप से दो धड़े आपस में टकरा रहे हैं — एक तरफ है
National Democratic Alliance (एनडीए) जिसमें प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं नितीश कुमार के नेतृत्व में Janata Dal (United) (जेडीयू) एवं Bharatiya Janata Party (भाजपा)-वाले, दूसरी ओर है Rashtriya Janata Dal (आरजेडी)-सहयोगी Mahagathbandhan (महागठबंधन) जो नेतृत्व कर रहा है तेजस्वी यादव।
नितीश कुमार की रैली और वेदना
नितीश कुमार ने हाल-ही में मुसाफ़रपुर जिले के मिनापुर क्षेत्र में एक रोडशो-रैली की है, जहाँ उन्होंने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए पिछली सरकारों में पर्याप्त काम नहीं हुआ, जबकि उनकी सरकार ने महिला स्वरोजगार योजनाओं का विस्तार किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी जेडीयू-भाजपा वाली सरकार ने कानून-व्यवस्था को मजबूत किया है और ‘आतंक’ के माहौल को बदलने का दावा किया है। इस दौरान एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ जिसमें रैली में एक महिला प्रत्याशी को नितीश कुमार द्वारा गार्लैंड पहनाते समय थोड़ी असहज स्थिति देखी गई। विपक्ष ने इसे CM की सेहत पर सवाल उठाने का अवसर बनाया।
तेजस्वी यादव का मोर्चा
तेजस्वी यादव ने इस घटना को लेकर तुरंत हमला बोला और कहा कि यह सिर्फ चुनावी तकтика नहीं बल्कि राज्य के नेतृत्व के लिए बड़ी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री स्वस्थ हैं तो ऐसा व्यवहार क्यों दिखा?
साथ ही, महागठबंधन के अंदर सीट-बंटवारे और रणनीति को लेकर भी खींचतान दिखाई दे रही है।
आरजेडी द्वारा 243 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की संभावनाओं की खबर भी है, जिससे गठबंधन में दरार की आशंका बढ़ी है।
गठबंधन-रणनीति और सीट-कसर
वहीं, एनडीए की ओर से भी सक्रियता बढ़ी है। उम्मीदवारों का चयन जारी है और प्रचार तीव्र हो गया है। वोटिंग-तैयारी के मद्देनज़र अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था, बूथ-मॉनिटरिंग और पैथ-हीटर से पहले जांच-तैयारी सामने आई है।
महागठबंधन के अंदर, जैसा कि पूर्व में बताया गया है, सीट-बंटवारे को लेकर कम-उम्र दलों और सहयोगियों में असंतोष है—कुछ सीटों पर एक ही गठबंधन के भीतर प्रतियोगिता देखने को मिली है।
इस तरह की “दोहरी लड़ाई” (friendly fights) विपक्ष के लिए चिंताजनक कही जा रही है क्योंकि यह वोट विभाजन का कारण बन सकती है।
मतदान प्रक्रिया और माहौल
चुनावी माहौल पहले से अधिक संगठित दिख रहा है। चुनाव आयोग ने मॉडल-कोड-ऑफ-कंडक्ट को सख्ती से लागू किया है, शिकायत दर्ज करने और मॉनिटर करने की व्यवस्था बढ़ाई गई है।
मतदाता-रुझान, बूथ-स्तर पर हलचल, पार्टी एजेंट्स-प्रचारक सक्रिय हैं। विकास, कानून-व्यवस्था, बेरोज़गारी और घुमंतु-मूल विषय बन रहे हैं जो आम मतदाता की चिंता का हिस्सा हैं।
विशेष रूप से, महिलाओं-युवा मतदान को लेकर प्रचार अधिक है और दोनों प्रमुख राजनीतिक गुट इसे मुख्य फ़ोकस बना रहे हैं।
मुख्य चुनौतियाँ और राजनीतिक थ्रस्ट
नितीश कुमार ने यह दांव लगाया है कि उनकी सरकार ने महिलाओं-स्वरोजगार पर काम किया है, जबकि विपक्ष इसे पर्याप्त नहीं मान रहा।
तेजस्वी यादव की ओर से स्वास्थ्य-संबंधी टिप्पणी और नेतृत्व-क्षमता पर सवाल वोटरों में चर्चा का विषय बन चुकी है।
गठबंधन के टूटने या दरार के संकेत विपक्ष के पक्ष में नहीं जा रहे।
एनडीए-गुट ने विकास-और-गवर्नेंस को अपना ध्रुवीकरण बिंदु बनाई है, जैसा कि उन्हें दावा है।
आगे की दिशा
पहले चरण के मतदान के बाद अब राजनीतिक दलों की निगाहें अगले चरण की तैयारियों पर होंगी। आने वाले दिनों में प्रचार-रैलियों की संख्या बढ़ सकती है, नए घोषणापत्र सामने आ सकते हैं, और गठबंधन-समझौतों में मोड़ देखने को मिल सकता है।
मतगणना से पहले राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज होगी—किस सीट से कौन उठेगा, कौन पीछे रहेगा, यह सब आज के मतदान के बाद साफ दिखना शुरू होगा।
एक बात तय है: बिहार के इस चुनाव में चुनावी रणनीति-चक्र, गठबंधन-मसला, तथा सार्वजनिक मुद्दों का मिश्रण सर्वाधिक अहम होगा।
पहले चरण की वोटिंग सिर्फ मतदान का दिन भर नहीं है; यह राजनीतिक संदेश का पल है, तैयारियों का मंजर है और भविष्य की सरकार की दिशा तय करने का प्रारंभिक संकेत है। बिहार के मतदाता-शक्ति को इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभानी है और राजनीतिक दलों के लिए इस बहुचर्चित राज्य में जीत-चुनौती कहीं भी सरपट हो सकती है।
