बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी सरगर्मी तेज होती जा रही है। एक ओर जहां सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन चुनावी मैदान में उतरने की रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी इंडिया गठबंधन (INDIA Bloc) में सीट बंटवारे को लेकर गहराई खींचतान जारी है। सूत्रों के मुताबिक, 8 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस, राजद और वाम दलों के बीच मतभेद चरम पर हैं, और यही मतभेद गठबंधन के लिए मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।
8 सीटों पर सस्पेंस बरकरार
इंडिया गठबंधन के घटक दलों में पटना में हुई बैठक में 230 से अधिक सीटों पर लगभग सहमति बन गई है, लेकिन 8 सीटों पर अब भी विवाद थम नहीं रहा है। इनमें पटना, गया, मधुबनी, सीवान, भागलपुर, सासाराम, कटिहार और समस्तीपुर की सीटें प्रमुख हैं।
इनमें से ज्यादातर सीटों पर कांग्रेस और राजद दोनों दावा कर रहे हैं, जबकि वाम दल भी कुछ सीटों पर अपने जनाधार के आधार पर हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं। राजद का तर्क है कि इन सीटों पर उसका पारंपरिक वोट बैंक मजबूत है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि 2020 में इन इलाकों में उनके उम्मीदवारों का प्रदर्शन बेहतर रहा था। इसी वजह से दोनों के बीच सीटों की अदला-बदली पर सहमति नहीं बन पा रही है।
राजद-कांग्रेस में टकराव का कारण
सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस नेतृत्व 50 से ज्यादा सीटों की मांग कर रहा है, जबकि राजद इसे 40 से अधिक देने के पक्ष में नहीं है।
राजद का कहना है कि 2020 में कांग्रेस को 70 सीटें दी गई थीं, लेकिन पार्टी केवल 19 सीटें जीत सकी थी। वहीं, कांग्रेस का तर्क है कि उस चुनाव में कई सीटों पर उन्हें “वोट ट्रांसफर” नहीं मिला।
इस बीच, वाम दलों—सीपीआई(एम), सीपीआई और सीपीएम—ने 20 सीटों की मांग रखी है, जिसमें से राजद 15 देने को तैयार है। गठबंधन के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि यदि ये मतभेद जल्द नहीं सुलझे, तो इसका सीधा फायदा बीजेपी-एनडीए को मिल सकता है।
लालू यादव और तेजस्वी की भूमिका
राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव खुद सीट बंटवारे की बातचीत में हस्तक्षेप कर रहे हैं। लालू यादव ने स्पष्ट कहा है कि “हम सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं, लेकिन हर दल को अपने जनाधार और मेहनत के हिसाब से सीटें मिलनी चाहिए।”
वहीं तेजस्वी यादव ने कहा है कि इंडिया गठबंधन बीजेपी को हराने के लिए बना है, “हमारे बीच बातचीत चल रही है और जल्द ही सब कुछ सुलझा लिया जाएगा।” हालांकि अंदरखाने की खबर है कि कांग्रेस और राजद के बीच भरोसे की कमी एक बार फिर गठबंधन के तालमेल में बाधा बन रही है।
एनडीए कर रहा है रणनीतिक हमले
विपक्ष के भीतर चल रही इस खींचतान का फायदा उठाने के लिए एनडीए ने भी रणनीति तैयार कर ली है। बीजेपी, जेडीयू और एलजेपी (रामविलास) के बीच सीटों का बंटवारा लगभग तय हो चुका है और जल्द ही इसकी औपचारिक घोषणा की जाएगी।
बीजेपी नेता का कहना है कि “इंडिया गठबंधन के भीतर जिस तरह की फूट दिख रही है, उससे जनता का भरोसा पहले ही डगमगा चुका है। बिहार विकास चाहता है, विवाद नहीं।”
विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में इंडिया गठबंधन को एनडीए के मुकाबले मजबूत चुनौती देने के लिए एकजुट रहना बेहद जरूरी है। डॉ. संजय कुमार, (सीएसडीएस) के अनुसार, “अगर विपक्ष एक मंच पर नहीं आता या सीट बंटवारे में देरी करता है, तो इसका सीधा फायदा सत्तारूढ़ गठबंधन को मिलेगा। बिहार का मतदाता एकजुटता देखकर ही अपना रुख तय करता है।”
गठबंधन के भविष्य पर सवाल
इंडिया गठबंधन की अब तक की स्थिति को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह गठबंधन सीट बंटवारे से आगे बढ़कर चुनाव तक एकजुट रह पाएगा?
कई जगहों पर लोकल स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी नाराजगी देखने को मिल रही है।
अगर ये मतभेद नहीं सुलझे, तो 2025 का चुनाव गठबंधन के लिए वैसा ही साबित हो सकता है जैसा 2020 में हुआ था—जहां आखिरी वक्त की रणनीति ने पूरे समीकरण को बदल दिया था।
बिहार की सियासत हमेशा से अप्रत्याशित रही है। यहां का मतदाता जाति, विकास और नेतृत्व के समीकरणों को अच्छी तरह समझता है। ऐसे में अगर इंडिया गठबंधन सीट बंटवारे के मसले को जल्द नहीं सुलझाता, तो यह उसके लिए चुनावी हार की बड़ी वजह बन सकता है।
वहीं, एनडीए इस मौके का फायदा उठाकर अपनी स्थिति को और मजबूत करने में जुटा है। अब सबकी निगाहें अगले हफ्ते होने वाली इंडिया गठबंधन की निर्णायक बैठक पर टिकी हैं, जिसमें सीट बंटवारे को अंतिम रूप दिया जाना है।

