
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पहले चरण की वोटिंग के बाद अब दूसरे चरण में मतदाताओं का रुझान तय करेगा कि सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठेगा — नीतीश कुमार या तेजस्वी यादव। दूसरे चरण में 122 सीटों पर मुकाबला बेहद रोमांचक होने वाला है, क्योंकि इन सीटों पर राज्य के कई दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
दूसरे चरण की वोटिंग की तारीख और समय
दूसरे चरण के लिए मतदान 12 नवंबर 2025 (मंगलवार) को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा। चुनाव आयोग ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। 122 सीटों पर कुल 2.45 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें लगभग 1.28 करोड़ पुरुष, 1.17 करोड़ महिला और करीब 600 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं।
किन जिलों में होगी वोटिंग?
दूसरे चरण की वोटिंग बिहार के 17 जिलों में होगी। इनमें प्रमुख जिले हैं —
पटना, नालंदा, भोजपुर, आरा, गया, जहानाबाद, नवादा, औरंगाबाद, सासाराम, कैमूर, बक्सर, समस्तीपुर, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर।
इन जिलों की कई सीटें जातीय समीकरणों और स्थानीय मुद्दों पर टिकी हैं। एनडीए और इंडिया गठबंधन दोनों ने यहां अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
नीतीश बनाम तेजस्वी – सीधी टक्कर
बिहार के इस चुनावी चरण में जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव दोनों के लिए यह चरण अहम है।
नीतीश कुमार के लिए यह चरण उनकी सत्ता में वापसी या विदाई तय कर सकता है।
वहीं, तेजस्वी यादव के लिए यह मौका है खुद को मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार के रूप में स्थापित करने का।
आरजेडी ने इस बार युवाओं और बेरोजगारी को मुख्य मुद्दा बनाया है, जबकि एनडीए ने विकास, सड़क, बिजली, रोजगार और कानून व्यवस्था के अपने 20 साल के ट्रैक रिकॉर्ड पर जनता से वोट मांगे हैं।
प्रमुख नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर
इस चरण में कई बड़े नेताओं की साख दांव पर है —
नीतीश कुमार (नालंदा) की परंपरागत सीटें एनडीए के लिए प्रतिष्ठा की बात हैं।
तेजस्वी यादव (राघोपुर) से जुड़ी सीटों पर आरजेडी की पकड़ मजबूत मानी जा रही है।
गया, जहानाबाद, आरा और भोजपुर जैसे इलाकों में वाम दलों और आजाद उम्मीदवारों की भूमिका भी अहम रहेगी।
भाजपा, जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस सभी पार्टियों ने स्टार प्रचारकों को मैदान में उतारा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, और राहुल गांधी ने इस चरण की वोटिंग से पहले बड़ी रैलियां कीं।
मुकाबले का गणित
दूसरे चरण में एनडीए के पास 2015 और 2020 दोनों चुनावों का मिला-जुला अनुभव है।
पिछली बार इन 122 सीटों में से एनडीए को 63,
जबकि महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-लेफ्ट) को 56 सीटें मिली थीं।
इस बार दोनों गठबंधन इन आंकड़ों को पलटने की कोशिश में हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दलित-महादलित, यादव, कुर्मी, और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) का वोट बैंक इस चरण में निर्णायक साबित होगा।
चुनावी मुद्दे क्या हैं?
इस चरण के प्रचार अभियान में जिन मुद्दों ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं, वे हैं —
बेरोजगारी और नौकरी की कमी
शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं
बिजली, सड़क, पानी की समस्या
महिलाओं की सुरक्षा और स्व-सहायता समूह
युवाओं के पलायन और औद्योगिक विकास की कमी
तेजस्वी यादव ने अपने हर भाषण में 10 लाख नौकरियां देने का वादा दोहराया, जबकि नीतीश कुमार ने “विकसित बिहार” का नारा देते हुए कहा कि “हमने काम किया है, और आगे भी करेंगे।”
सुरक्षा और व्यवस्था
चुनाव आयोग के अनुसार, दूसरे चरण के मतदान के लिए 60,000 से अधिक जवानों की तैनाती की गई है। ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी रखी जाएगी। संवेदनशील और अति-संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात रहेंगे।
मतदाताओं की भूमिका अहम
राजनीतिक समीकरण चाहे जो भी हों, पर असली फैसला बिहार के मतदाता करेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले चरण में महिलाओं की भागीदारी रिकॉर्ड रही, और दूसरे चरण में भी महिला मतदाताओं के बढ़-चढ़कर मतदान करने की उम्मीद है।
आगे क्या?l
तीसरे और अंतिम चरण की वोटिंग 20 नवंबर को होगी। नतीजे 24 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। यानी अब हर वोट नीतीश और तेजस्वी की राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेगा।
बिहार चुनाव 2025 का दूसरा चरण न सिर्फ 122 सीटों पर बल्कि पूरे राज्य की सत्ता की तस्वीर तय करेगा। यह चरण इस सवाल का जवाब देगा — क्या नीतीश कुमार की साख कायम रहेगी या तेजस्वी यादव का नया युग शुरू होगा?

