
बिहार की राजनीति हमेशा से उतार-चढ़ाव और पलटवार की राजनीति के लिए जानी जाती है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बार-बार होने वाले ‘पलटवार’ और गठबंधन बदलने की आदत ने बिहार की जनता को कई बार चौंकाया है। वहीं, 2025 के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी पारा भी बढ़ता जा रहा है। इसी बीच एक नया सर्वे सामने आया है, जिसने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है।
ताजा सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि बिहार की सत्ता पर किसकी पकड़ मजबूत हो सकती है और किसका ‘पलटा’ इस बार भारी पड़ सकता है। सर्वे के मुताबिक, मुकाबला बेहद कांटे का नजर आ रहा है, लेकिन कुछ सीटों पर बाजी का रुख बदल सकता है।
सर्वे का बड़ा खुलासा
इस सर्वे के अनुसार, बिहार में जनता दल यूनाइटेड (JDU) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच फिर से तालमेल को लेकर चर्चाएं तेज हैं। वहीं, महागठबंधन जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां शामिल हैं, वह भी इस चुनाव को किसी भी कीमत पर जीतना चाहती हैं।
सर्वे के नतीजे बताते हैं कि अगर चुनाव आज हो जाएं, तो भाजपा और जेडीयू का गठबंधन मिलकर करीब 120-125 सीटों तक पहुंच सकता है। वहीं, महागठबंधन को 105-110 सीटों मिलने का अनुमान है। अन्य दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में 10-15 सीटें जा सकती हैं।

नीतीश कुमार का ‘पलटा फैक्टर’
बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का ‘पलटा’ हर बार चर्चा का विषय रहता है। चाहे भाजपा से अलग होकर RJD के साथ जाना हो या फिर वापस भाजपा के पाले में लौटना, नीतीश ने हर बार अपने फैसले से राज्य की राजनीति का गणित बदल दिया है।
सर्वे बताता है कि जनता अभी भी नीतीश कुमार को ‘गंभीर नेता’ मानती है, लेकिन बार-बार की राजनीतिक अदला-बदली ने उनकी छवि को कमजोर किया है। युवा वोटर अब बदलाव की ओर झुकते नजर आ रहे हैं।
युवा बन सकते हैं गेमचेंजर
इस बार बिहार के विधानसभा चुनाव में युवा वर्ग निर्णायक भूमिका निभाने वाला है। 18 से 35 साल की उम्र के वोटरों की संख्या कुल मतदाताओं का लगभग 58% है। सर्वे में यह बात सामने आई है कि रोजगार, शिक्षा और पलायन जैसे मुद्दे इस वर्ग के लिए सबसे अहम हैं।
महागठबंधन युवाओं को रोजगार और सरकारी भर्तियों के वादे के जरिए आकर्षित कर रहा है, वहीं भाजपा ‘डबल इंजन सरकार’ और विकास के एजेंडे पर चुनावी मैदान में उतरी है।
लालू परिवार बनाम भाजपा
सर्वे से साफ होता है कि बिहार में राजनीति अभी भी लालू यादव परिवार और भाजपा के इर्द-गिर्द घूमती है। तेजस्वी यादव को युवाओं के बीच अच्छा-खासा समर्थन मिल रहा है। उनकी छवि एक युवा नेता के तौर पर मजबूत हो रही है।
दूसरी ओर, भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और केंद्र सरकार की योजनाओं को सामने रखकर वोटरों को साधने में लगी है। आंकड़े बताते हैं कि मोदी का करिश्मा बिहार में अभी भी काफी असरदार है।

क्षेत्रवार समीकरण
उत्तरी बिहार: यहां RJD को मजबूत माना जा रहा है, खासकर यादव और मुस्लिम वोट बैंक के कारण।
दक्षिणी बिहार: भाजपा और जेडीयू का गठबंधन यहां मजबूत स्थिति में है।
मैदानी इलाका (मगध, भोजपुर): यहां मुकाबला बराबरी का है, लेकिन तेजस्वी यादव को थोड़ी बढ़त मिलती दिख रही है।
सीमांचल: मुस्लिम बहुल इलाकों में महागठबंधन को फायदा मिल सकता है।
जनता की राय
सर्वे में शामिल लोगों ने कहा कि वे सरकार से सबसे ज्यादा रोजगार, शिक्षा, कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे में सुधार की उम्मीद रखते हैं।
40% लोगों ने कहा कि नौकरी उनका सबसे बड़ा मुद्दा है।
25% लोगों ने महंगाई और भ्रष्टाचार को अहम बताया।
20% लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने की मांग रखी।
ताजा सर्वे बताता है कि बिहार में मुकाबला बेहद करीबी है। भाजपा-जेडीयू गठबंधन थोड़ी बढ़त बनाए हुए है, लेकिन महागठबंधन भी पीछे नहीं है। चुनाव की तारीख नजदीक आते-आते यह समीकरण और बदल सकते हैं।
इस बार चुनाव सिर्फ जातीय समीकरणों पर नहीं, बल्कि विकास और रोजगार जैसे मुद्दों पर लड़ा जाएगा। नीतीश कुमार का ‘पलटा’ कितना असर दिखा पाएगा और तेजस्वी यादव की युवा छवि क्या भाजपा की लहर को रोक पाएगी—यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।


