By: Vikash Kumar (Vicky)
बिहार में बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन गेमिंग की लत को लेकर राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। विधानसभा सत्र के दौरान बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि राज्य सरकार बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए नया कानून लाने की तैयारी कर रही है। यह प्रस्ताव विशेष रूप से मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर पर लंबे समय तक गेम खेलने और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग को नियंत्रित करने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है।

पटना स्थित बिहार विधानसभा में चल रहे सत्र के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के कई विधायकों ने बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत को गंभीर समस्या बताया। इस पर जवाब देते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि सरकार विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और मनोवैज्ञानिकों की सलाह लेकर एक ठोस नीति तैयार कर रही है।

पिछले कुछ वर्षों में स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुंच तेजी से बढ़ी है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बच्चे कम उम्र में ही मोबाइल गेम्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम से आंखों की समस्या, नींद की कमी, पढ़ाई में गिरावट और व्यवहार में बदलाव जैसी दिक्कतें सामने आ रही हैं।

संभावित प्रावधानों में नाबालिगों के लिए स्क्रीन टाइम सीमा, आयु सत्यापन, देर रात गेमिंग पर रोक और स्कूलों के लिए दिशा-निर्देश शामिल हो सकते हैं। सरकार अभिभावकों के लिए जागरूकता अभियान भी चला सकती है।

यदि यह कानून लागू होता है, तो ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को सख्त नियमों का पालन करना होगा। इससे बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
राज्य सरकार जल्द ही इस संबंध में विशेषज्ञ समिति का गठन कर सकती है और आगामी सत्र में विधेयक पेश किया जा सकता है।

