By:Vikash Kumar(Vicky)
बिहार में ज्वेलरी कारोबार से जुड़े व्यापारियों और ग्राहकों के लिए एक बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य में बढ़ती चोरी, लूट और आपराधिक घटनाओं को देखते हुए अब ज्वेलरी शॉप्स में ‘नो फेस कवर’ नियम लागू किया गया है। इस नए नियम के तहत अब कोई भी ग्राहक हिजाब, नकाब, मास्क या हेलमेट पहनकर ज्वेलरी शॉप के अंदर प्रवेश नहीं कर सकेगा। यह फैसला सुरक्षा कारणों से लिया गया है और इसे प्रदेश भर में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।

क्यों लिया गया यह फैसला?
बीते कुछ महीनों में बिहार के अलग-अलग जिलों से ज्वेलरी शॉप लूट की कई घटनाएं सामने आई हैं। अधिकांश मामलों में अपराधी हेलमेट, नकाब या चेहरा ढककर दुकान में घुसे और वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए। सीसीटीवी फुटेज में चेहरा स्पष्ट न होने के कारण पुलिस को जांच में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसी को ध्यान में रखते हुए ज्वेलर्स एसोसिएशन और स्थानीय प्रशासन के बीच बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से ‘नो फेस कवर’ रूल लागू करने का निर्णय लिया गया।
नियम के तहत क्या-क्या रहेगा प्रतिबंधित?
नए नियम के अनुसार, ज्वेलरी शॉप में प्रवेश के दौरान—
हेलमेट पहनकर एंट्री नहीं मिलेगी
नकाब या बुर्का से चेहरा ढकने की अनुमति नहीं होगी
मास्क से पूरा चेहरा ढकने पर भी रोक रहेगी
किसी भी तरह से चेहरा छुपाकर दुकान में घुसना मना होगा
हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाएगा, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से खरीदारी के दौरान पहचान जरूरी होगी।
व्यापारियों को क्या निर्देश दिए गए हैं?
ज्वेलरी दुकानदारों को कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं—
1.दुकान के बाहर स्पष्ट रूप से “No Face Cover Entry” का बोर्ड लगाना
2.सीसीटीवी कैमरे चालू और सही स्थिति में रखना
3.संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत पुलिस को सूचना देना
4.ग्राहकों से शालीनता के साथ नियम का पालन करवाना
व्यापारियों को यह भी कहा गया है कि नियम लागू करते समय किसी से दुर्व्यवहार न किया जाए।

पुलिस और प्रशासन का क्या कहना है?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कदम पूरी तरह सुरक्षा से जुड़ा हुआ है और इसका उद्देश्य किसी विशेष समुदाय या वर्ग को निशाना बनाना नहीं है। पुलिस के अनुसार, चेहरा ढका होने से अपराधी आसानी से पहचान से बच जाते हैं, जिससे अपराध बढ़ता है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा,
“ज्वेलरी शॉप्स हमेशा अपराधियों के निशाने पर रहती हैं। इस नियम से अपराध पर अंकुश लगेगा और व्यापारियों के साथ-साथ ग्राहकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।”
महिला ग्राहकों में क्या है चर्चा?
इस नियम को लेकर महिला ग्राहकों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ महिलाओं का कहना है कि सुरक्षा के लिए यह कदम जरूरी है, जबकि कुछ इसे निजता और धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देख रही हैं। हालांकि, कई दुकानदारों का कहना है कि खरीदारी के दौरान थोड़ी देर के लिए चेहरा दिखाने में कोई बड़ी परेशानी नहीं होनी चाहिए, खासकर जब मामला सुरक्षा का हो।
पहले भी लागू हो चुके हैं ऐसे नियम
बिहार ही नहीं, बल्कि देश के कई बड़े शहरों में पहले से ही ज्वेलरी शॉप्स, बैंक और हाई-सिक्योरिटी जोन में हेलमेट उतारकर एंट्री का नियम लागू है। कई राज्यों में पुलिस की सलाह पर ज्वेलर्स ने ऐसे नियम अपनाए हैं, जिससे अपराध में कमी भी देखने को मिली है।
कानूनी नजरिए से कितना सही है फैसला?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नियम सार्वजनिक सुरक्षा के उद्देश्य से लागू किया गया है और इसमें किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा, तो यह संवैधानिक दायरे में आता है। बशर्ते इसका पालन सम्मानजनक तरीके से कराया जाए।

आगे क्या होगा?
प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में इस नियम की समीक्षा की जाएगी। यदि इससे अपराधों में कमी आती है, तो इसे और सख्ती से लागू किया जा सकता है। साथ ही, जरूरत पड़ने पर अन्य संवेदनशील कारोबारों में भी ऐसे नियम लाए जा सकते हैं।
बिहार में ज्वेलरी शॉप्स के लिए लागू किया गया ‘नो फेस कवर’ रूल सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। जहां एक ओर यह व्यापारियों को राहत देगा, वहीं दूसरी ओर ग्राहकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा। हालांकि, इसका प्रभावी और संवेदनशील क्रियान्वयन ही इसकी सफलता तय करेगा।
