By: Vikash Kumar (Vicky)

पश्चिम एशिया में हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच हुए सीजफायर के बाद भारत ने तेजी से कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में भारत सरकार ने ईरान से संपर्क साधते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में फंसे अपने 16 जहाजों को सुरक्षित वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन जहाजों में दो लाख टन से अधिक एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) लदी हुई है, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

सूत्रों के अनुसार, ईरान-अमेरिका के बीच तनाव के चलते पिछले कुछ दिनों से होर्मुज क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां बाधित हो गई थीं। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम मार्ग माना जाता है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस का परिवहन होता है। इस तनाव के कारण कई देशों के जहाज इस क्षेत्र में फंस गए थे, जिनमें भारत के भी 16 जहाज शामिल हैं।
भारत सरकार ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की। विदेश मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों से ईरान के अधिकारियों से संपर्क स्थापित किया गया। भारत का मुख्य उद्देश्य इन जहाजों को सुरक्षित तरीके से निकालना और ऊर्जा आपूर्ति को सुचारू बनाए रखना है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि इन जहाजों में मौजूद एलपीजी की मात्रा 2 लाख टन से अधिक है, जो घरेलू उपयोग के लिए बेहद जरूरी है। भारत में एलपीजी का उपयोग रसोई गैस के रूप में बड़े पैमाने पर किया जाता है, और इसकी आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा आम जनता पर सीधा असर डाल सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। यह जलमार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है और दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का लगभग 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक बाजार पर सीधा प्रभाव डालता है।

भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने को लेकर हमेशा सतर्क रहता है। यही वजह है कि सीजफायर की घोषणा होते ही भारत ने तुरंत सक्रियता दिखाई और अपने जहाजों की सुरक्षित वापसी के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए।
इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखने वाले अधिकारियों का कहना है कि स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और उम्मीद है कि जल्द ही इन जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा। हालांकि, अभी भी सुरक्षा के लिहाज से सावधानी बरती जा रही है।
भारत के लिए यह सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक मुद्दा भी है। ऊर्जा सुरक्षा किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता का अहम आधार होती है। ऐसे में भारत सरकार इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस सीजफायर का स्वागत किया गया है। कई देशों ने इसे क्षेत्रीय शांति की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है। यदि यह शांति कायम रहती है, तो इससे वैश्विक तेल और गैस बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है।

विश्लेषकों का मानना है कि भारत की यह त्वरित प्रतिक्रिया उसकी मजबूत विदेश नीति और संकट प्रबंधन क्षमता को दर्शाती है। ईरान के साथ भारत के लंबे समय से अच्छे संबंध रहे हैं, और इस स्थिति में वही संबंध काम आ रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत अपने सभी जहाजों को कितनी जल्दी और सुरक्षित तरीके से वापस ला पाता है। फिलहाल, सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि देश की ऊर्जा आपूर्ति पर कोई असर न पड़े और आम जनता को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

