By:vikash kumar (vicky)

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र का विशेष महत्व माना जाता है और वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है। नवरात्र के ये नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के लिए समर्पित होते हैं। नवरात्र का पहला दिन मां शैलपुत्री की आराधना का होता है, जिन्हें शक्ति, स्थिरता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मां शैलपुत्री की पूजा करने से जीवन में नई ऊर्जा आती है और सभी प्रकार की नकारात्मकता दूर होती है।

चैत्र नवरात्र को हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी माना जाता है। इस दिन से व्रत, पूजा, जप, तप और साधना का विशेष महत्व बढ़ जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार नवरात्र की शुरुआत शुभ योग में हो रही है, जिससे इसका महत्व और भी अधिक बढ़ गया है। भक्त पूरे नौ दिन तक व्रत रखकर मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

मां शैलपुत्री का स्वरूप
नवरात्र के पहले दिन पूजी जाने वाली मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। इन्हें नवदुर्गा का प्रथम स्वरूप कहा जाता है। मां शैलपुत्री के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल होता है और इनका वाहन वृषभ है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मां शैलपुत्री की पूजा करने से मन, शरीर और आत्मा शुद्ध होती है और जीवन में स्थिरता आती है।

पहले दिन पूजा का महत्व
नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना कर मां दुर्गा को घर में आमंत्रित किया जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से पूरे नौ दिनों तक देवी की कृपा बनी रहती है। मां शैलपुत्री को सफेद रंग प्रिय माना जाता है, इसलिए इस दिन सफेद वस्त्र पहनकर पूजा करना शुभ माना जाता है। भक्त फलाहार या व्रत रखकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

नवरात्र में क्या करें
नवरात्र के दिनों में घर की साफ-सफाई रखें और रोज मां दुर्गा की पूजा करें। सुबह और शाम दीपक जलाना शुभ माना जाता है। दुर्गा सप्तशती का पाठ, दुर्गा चालीसा और मंत्र जाप करने से विशेष फल मिलता है। इन दिनों में सात्विक भोजन करना चाहिए और क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए।

नवरात्र का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष के अनुसार नवरात्र का समय साधना और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का सबसे उत्तम समय माना जाता है। इस दौरान किए गए मंत्र जाप और पूजा का फल जल्दी मिलता है। मां दुर्गा की कृपा से बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सुख, शांति और सफलता आती है।

नवरात्र केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मबल बढ़ाने का भी समय होता है। इसलिए इन नौ दिनों में मन, वचन और कर्म को शुद्ध रखने की सलाह दी जाती है।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। विभिन्न स्थानों और परंपराओं के अनुसार पूजा विधि और मान्यताओं में अंतर हो सकता है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पहले जानकार विद्वान या पंडित से परामर्श अवश्य लें।
