नई दिल्ली/पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी तेज हो चुकी है। इसी बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने शनिवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। यह मुलाकात राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच बिहार में NDA की सीट बंटवारे की रणनीति, चुनावी गठबंधन की मजबूती और प्रचार अभियान की दिशा को लेकर विस्तार से बातचीत हुई।
NDA में तालमेल और सीट शेयरिंग पर हुई चर्चा
जानकारी के अनुसार, अमित शाह और चिराग पासवान के बीच हुई यह बैठक करीब एक घंटे तक चली। इसमें मुख्य रूप से बिहार में NDA के घटक दलों के बीच सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय करने पर विचार किया गया। चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) राज्य की करीब 15 से 20 सीटों पर दावेदारी कर सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी चाहती है कि एनडीए के सभी दल एकजुट होकर विपक्षी गठबंधन (INDIA Bloc) के खिलाफ मजबूती से मैदान में उतरें।
चिराग पासवान की अहम भूमिका
बिहार की राजनीति में चिराग पासवान का कद लगातार बढ़ रहा है। 2020 के विधानसभा चुनाव में अलग राह पकड़ने के बावजूद, 2024 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया और एनडीए के साथ मजबूत वापसी की।
अब 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी, जेडीयू और लोजपा (रामविलास) के बीच तालमेल सबसे अहम मुद्दा बन गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चिराग पासवान बिहार में दलित वोट बैंक और युवा मतदाताओं को जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
बिहार के लिए रोडमैप तैयार
बैठक के बाद सूत्रों ने बताया कि अमित शाह और चिराग पासवान ने बिहार के लिए एक चुनावी रोडमैप पर भी चर्चा की। इसमें एनडीए की संयुक्त रैलियां, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी सभाएं और गठबंधन के प्रमुख चेहरों की प्रचार रणनीति को लेकर सहमति बनी है।
चिराग पासवान ने शाह को अपनी पार्टी के संगठन विस्तार और प्रदेशभर में चल रहे कार्यकर्ता सम्मेलन की जानकारी भी दी।
तेजस्वी यादव पर साधा निशाना
बैठक से पहले मीडिया से बात करते हुए चिराग पासवान ने राजद नेता तेजस्वी यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “बिहार के युवाओं को रोजगार देने की बात करने वाले लोग खुद 15 साल तक सत्ता में रहकर क्या कर पाए? जनता अब झूठे वादों में नहीं फंसने वाली।”
उनके इस बयान को बीजेपी के सुर में सुर मिलाने के रूप में देखा जा रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि लोजपा (रामविलास) पूरी तरह एनडीए के साथ मजबूती से खड़ी है।
राजनीतिक हलचल और विपक्ष की प्रतिक्रिया
अमित शाह और चिराग पासवान की मुलाकात के बाद विपक्षी महागठबंधन (INDIA Bloc) में भी हलचल मच गई है।
आरजेडी नेता मनोज झा ने कहा कि “यह मुलाकात बताती है कि बिहार में भाजपा अपने सहयोगियों को लेकर असमंजस में है।”
वहीं, जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि “एनडीए में सब कुछ ठीक है, और सभी दल एक साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे।”
चिराग पासवान की रणनीति: युवा और विकास का एजेंडा
लोजपा (रामविलास) ने इस बार बिहार चुनाव के लिए ‘बदलाव का संकल्प’ नारे के साथ युवा और रोजगार आधारित एजेंडा तैयार किया है। पार्टी का फोकस विकास, शिक्षा, रोजगार और दलित सशक्तिकरण पर होगा।
चिराग पासवान ने कहा कि “हम बिहार को फिर से विकास के पथ पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बिहार में परिवर्तन निश्चित है।”
विश्लेषण: NDA में मजबूती या सियासी दबाव?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात न सिर्फ रणनीतिक थी, बल्कि एनडीए के भीतर संतुलन साधने का प्रयास भी।
जेडीयू और लोजपा के बीच पिछले कुछ वर्षों से चल रहे तनाव के बाद यह मुलाकात भाजपा की मध्यस्थता से रिश्तों को सुधारने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
यह भी माना जा रहा है कि बीजेपी चाहती है कि चिराग पासवान को बिहार की राजनीति में युवा चेहरा और दलित नेता के रूप में आगे लाया जाए, जिससे गठबंधन को चुनावी लाभ मिले।
अमित शाह और चिराग पासवान की यह मुलाकात बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की नींव रख सकती है। एनडीए की एकजुटता और रणनीतिक समन्वय विपक्ष के लिए चुनौती बन सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सीट बंटवारे पर क्या समझौता होता है और लोजपा (रामविलास) को कितनी सीटें मिलती हैं

