लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने सोमवार को बड़ा राजनीतिक ऐलान करते हुए कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से नीतीश कुमार ही बिहार के मुख्यमंत्री पद के चेहरे होंगे। पासवान ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी के सभी विधायक नीतीश कुमार को ही समर्थन देंगे। इस घोषणा के साथ बिहार की राजनीति में कई अटकलों पर विराम लग गया है।
चिराग पासवान ने यह बयान पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि, “एनडीए एकजुट है और हमारे लिए विकास, सुशासन और स्थिर सरकार प्राथमिकता है। नीतीश कुमार ने बिहार के विकास में अहम भूमिका निभाई है और हम उन्हें ही मुख्यमंत्री पद के लिए अपना नेता मानते हैं।”
पासवान के इस बयान को एनडीए के भीतर स्थिरता और एकजुटता का संदेश माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में पिछले कुछ हफ्तों से यह चर्चा थी कि लोजपा (रामविलास) और जेडीयू के बीच मतभेद बढ़ सकते हैं, लेकिन इस घोषणा ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
एनडीए के भीतर एकता का संदेश:
एनडीए गठबंधन में भाजपा, जेडीयू, हम (हितधारक जनता दल), और लोजपा (रामविलास) शामिल हैं। आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को देखते हुए यह बयान काफी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घोषणा एनडीए में एकता की रणनीतिक कोशिश है ताकि विपक्षी महागठबंधन को मजबूत संदेश दिया जा सके।
नीतीश कुमार ने भी चिराग पासवान के इस बयान का स्वागत करते हुए कहा कि, “हम सब बिहार के विकास के लिए एकजुट हैं। जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।”
राजनीतिक पृष्ठभूमि और संदर्भ:
चिराग पासवान और नीतीश कुमार के बीच रिश्ते हमेशा से सुर्खियों में रहे हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव के दौरान चिराग ने जेडीयू के खिलाफ उम्मीदवार उतारकर एनडीए के भीतर हलचल मचा दी थी। उस समय लोजपा (रामविलास) अलग चुनाव लड़ रही थी और नीतीश कुमार के नेतृत्व पर सवाल उठा रही थी।
लेकिन बीते एक साल में दोनों नेताओं के बीच सियासी दूरियां घटती नजर आईं। चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भरोसा जताते हुए एनडीए में अपनी सक्रिय भूमिका फिर से मजबूत की है।
बीजेपी और अन्य सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया:
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि चिराग पासवान का यह कदम एनडीए के भीतर “सकारात्मक संकेत” है। उन्होंने कहा, “हम सभी दल मिलकर बिहार में स्थिर सरकार बनाना चाहते हैं। एनडीए का लक्ष्य 2025 में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करना है।” वहीं, जेडीयू नेताओं ने भी इस घोषणा का स्वागत किया और कहा कि यह एनडीए की मजबूती और आपसी विश्वास का प्रतीक है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया:
विपक्षी महागठबंधन (RJD, कांग्रेस और वामदल) ने इस घोषणा पर तंज कसते हुए कहा कि यह “चिराग पासवान का राजनीतिक यू-टर्न” है। आरजेडी प्रवक्ता ने कहा कि, “चिराग पासवान ने वही नीतीश कुमार को समर्थन दिया है, जिन पर पहले सवाल उठाते थे। यह सब सत्ता में हिस्सेदारी पाने की राजनीति है।” हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चिराग पासवान ने यह रणनीतिक निर्णय अपने राजनीतिक भविष्य को मजबूत करने के लिए लिया है, ताकि केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर एनडीए में उनकी स्थिति मजबूत बनी रहे।
जनता का रुख:
बिहार की जनता के बीच इस घोषणा को लेकर मिले-जुले प्रतिक्रिया सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे “स्थिर सरकार की दिशा में अच्छा कदम” बता रहे हैं, तो कुछ लोग इसे “राजनीतिक मजबूरी” करार दे रहे हैं।
पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. राकेश सिंह के अनुसार, “चिराग पासवान की घोषणा 2025 के चुनाव से पहले एनडीए के भीतर भ्रम की स्थिति को खत्म करने वाली है। यह कदम बीजेपी-जेडीयू-लोजपा की संयुक्त ताकत को प्रदर्शित करता है।”
आगे की रणनीति:
सूत्रों के मुताबिक, एनडीए अब नवंबर के पहले सप्ताह में एक संयुक्त रैली आयोजित कर सकता है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार और चिराग पासवान एक मंच पर नजर आएंगे। यह रैली बिहार चुनावी राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
चिराग पासवान की इस घोषणा ने बिहार की राजनीति में नई हलचल मचा दी है। एनडीए की एकजुटता के इस प्रदर्शन से साफ है कि गठबंधन अब चुनावी मोड में प्रवेश कर चुका है। नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित कर एनडीए ने विपक्ष को एक बड़ा राजनीतिक संदेश दे दिया है—कि सत्ता का केंद्र अभी भी उनके पास ही है।

