बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज़ होती जा रही है। इसी कड़ी में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एक बड़ा बयान दिया है जिसने राज्य की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है।
उन्होंने मुस्लिम समुदाय को संबोधित करते हुए कहा —
“अब वक्त आ गया है कि आप बंधुआ वोट बैंक की मानसिकता से निकलें। जब तक आप एक पार्टी के भरोसे रहेंगे, तब तक असली राजनीतिक भागीदारी नहीं मिलेगी।”
चिराग पासवान का यह बयान उस समय आया है जब बिहार में सभी पार्टियां मुस्लिम वोटरों को साधने में जुटी हैं। जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस जैसी पार्टियां जहां पारंपरिक रूप से मुस्लिम वोट बैंक पर भरोसा करती रही हैं, वहीं एलजेपी (रामविलास) अब इस समीकरण में नई चुनौती पेश करने की कोशिश कर रही है।
चिराग पासवान का बयान: “हर वोट की कीमत बराबर है”
बिहार के सीवान जिले में आयोजित एक जनसभा के दौरान चिराग पासवान ने कहा कि आज देश बदल रहा है और राजनीति भी बदलनी चाहिए।
उन्होंने कहा —
“आप सिर्फ वोट देने तक सीमित मत रहिए, भागीदारी मांगिए। जो आपके बीच आता है, उससे सवाल पूछिए कि आपकी समस्याओं पर क्या काम हुआ है।”
चिराग ने मुस्लिम युवाओं से अपील की कि वे रोजगार, शिक्षा और विकास के मुद्दों पर सोचें, न कि केवल धर्म या जाति की राजनीति पर।
उन्होंने कहा कि “जिस दिन समाज के हर वर्ग का वोट सिर्फ जाति या धर्म के बजाय विकास के मुद्दे पर पड़ेगा, उस दिन राजनीति भी बदल जाएगी।”
एलजेपी (रामविलास) की नई रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, चिराग पासवान का यह बयान केवल चुनावी बयान नहीं बल्कि एक रणनीतिक राजनीतिक संदेश है।
एलजेपी (रामविलास) इस बार खुद को “विकास की राजनीति” के रूप में पेश कर रही है और युवाओं, महिलाओं तथा अल्पसंख्यकों पर विशेष फोकस कर रही है।
चिराग पासवान की पार्टी ने कई सीटों पर ऐसे प्रत्याशियों को टिकट देने का संकेत दिया है जो जमीनी स्तर पर काम कर चुके हैं और किसी एक जाति या धर्म की राजनीति से ऊपर उठकर विकास की बात करते हैं।
मुस्लिम वोट बैंक और बिहार की राजनीति
बिहार में मुस्लिम वोट बैंक का प्रतिशत लगभग 17% के आसपास है, जो कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है।
पिछले कई दशकों से यह वोट बैंक मुख्य रूप से आरजेडी और कांग्रेस के साथ रहा है।
लालू प्रसाद यादव का “MY फार्मूला” (मुस्लिम-यादव गठजोड़) लंबे समय तक बिहार की राजनीति का मूल आधार रहा।
लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।
नए मतदाता वर्ग और सोशल मीडिया के दौर में मुस्लिम युवाओं में राजनीतिक जागरूकता बढ़ी है।
ऐसे में चिराग पासवान का यह बयान इस वर्ग को एक नई दिशा देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
विपक्ष का पलटवार
हालांकि, आरजेडी और जेडीयू ने चिराग पासवान के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
आरजेडी प्रवक्ता ने कहा कि “चिराग पासवान बीजेपी की भाषा बोल रहे हैं और उनका मकसद केवल मुस्लिम वोटों को बांटना है।”
वहीं जेडीयू ने कहा कि “एलजेपी के पास कोई ठोस एजेंडा नहीं है, इसलिए ऐसे बयान दिए जा रहे हैं।”
इसके जवाब में एलजेपी (रामविलास) ने स्पष्ट किया कि पार्टी किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी को समान अवसर देने में विश्वास रखती है।
पार्टी प्रवक्ता ने कहा —
“हम किसी वोट बैंक की राजनीति नहीं करते। हमारा मकसद है हर वर्ग की आवाज़ बनना।”
मुस्लिम समाज में कैसी प्रतिक्रिया?
चिराग पासवान के बयान पर मुस्लिम समाज के भीतर भी मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
कुछ लोगों ने इसे “साहसिक” कदम बताया तो कुछ ने इसे “राजनीतिक स्टंट” करार दिया।
पटना के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा —
“चिराग पासवान ने जो कहा, वह सही है। मुस्लिम समाज को अब अपनी राजनीतिक दिशा पर दोबारा विचार करना चाहिए।”
वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि यह बयान चुनाव से पहले दिया गया है, इसलिए इसे राजनीतिक मकसद से जोड़ा जा रहा है।
चिराग पासवान की छवि और युवा वोटर बेस
चिराग पासवान की छवि एक युवा और आधुनिक नेता के रूप में उभर रही है।
वे अक्सर विकास, रोजगार और डिजिटल बिहार की बात करते हैं।
उनकी पार्टी एलजेपी (रामविलास) सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय है और युवाओं को सीधा जोड़ने की कोशिश कर रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चिराग पासवान का फोकस इस बार उन वोटरों पर है जो पारंपरिक राजनीति से थक चुके हैं और कुछ नया देखना चाहते हैं।
नया राजनीतिक संदेश या चुनावी दांव?
चिराग पासवान का यह बयान निस्संदेह बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर चुका है।
एक तरफ यह बयान मुस्लिम समाज को स्वतंत्र राजनीतिक सोच अपनाने की सलाह देता है, वहीं दूसरी ओर इसे एलजेपी (रामविलास) की रणनीतिक चाल भी कहा जा रहा है। आने वाले चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मुस्लिम वोटर वाकई पारंपरिक वोट बैंक से निकलकर नई दिशा में सोचेंगे या पुरानी राजनीतिक निष्ठाएं फिर से हावी होंगी।
चिराग पासवान ने बिहार में मुस्लिम वोटरों को “बंधुआ वोट बैंक” की मानसिकता से बाहर निकलने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि अब हर समुदाय को अपनी राजनीतिक भागीदारी खुद तय करनी होगी।
यह बयान एलजेपी (रामविलास) की नई राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो पारंपरिक वोट बैंक की राजनीति को चुनौती देने की कोशिश कर रही है।

