Chitragupta Puja 2025: कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को चित्रगुप्त पूजा का विशेष महत्व होता है। यह दिन भाई दूज के साथ ही मनाया जाता है। इस दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा की जाती है, जो भगवान ब्रह्मा के पुत्र और यमराज के लेखाकार माने जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि चित्रगुप्त जी मनुष्य के जन्म से मृत्यु तक के सभी कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। चित्रगुप्त पूजा का उद्देश्य अपने कर्मों के प्रति जागरूक होना और जीवन में सच्चाई, ईमानदारी और धर्म का पालन करने की प्रेरणा प्राप्त करना है।
चित्रगुप्त पूजा का महत्व
चित्रगुप्त महाराज को कलम-दवात के देवता के रूप में पूजा जाता है। इस दिन विशेष रूप से कायस्थ समाज के लोग बड़ी श्रद्धा के साथ पूजा करते हैं। माना जाता है कि चित्रगुप्त जी की आराधना करने से व्यक्ति को अपने पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सफलता व ज्ञान की प्राप्ति होती है। यह दिन लेखन, अध्ययन और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
चित्रगुप्त पूजा की विधि (Chitragupta Puja Vidhi)
सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ करें। पूजा स्थान पर चित्रगुप्त महाराज की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। एक लकड़ी के पाटे पर कलम-दवात, किताबें, हिसाब की बही और इंकपॉट रखें। इसके बाद धूप, दीप, चंदन, फूल, अक्षत, पान, सुपारी, नारियल और मिठाई चढ़ाएं। पूजा करते समय चित्रगुप्त जी के मंत्र का जाप करें –
मंत्र:
“ॐ चित्रगुप्ताय नमः”
इस दिन विद्यार्थी अपनी किताबों और व्यापारियों अपनी लेखा बही की पूजा करते हैं। पूजा के बाद चित्रगुप्त जी की कथा सुनना या पढ़ना शुभ माना जाता है।
चित्रगुप्त पूजा की कथा (Chitragupta Puja Katha)
एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना के बाद यह अनुभव किया कि मनुष्य अपने कर्मों के फल का लेखा-जोखा रखने वाला कोई नहीं है। तब उन्होंने अपने शरीर से एक तेजस्वी पुरुष को उत्पन्न किया और उनका नाम रखा चित्रगुप्त। ब्रह्मा जी ने उन्हें यह दायित्व सौंपा कि वे प्रत्येक जीव के अच्छे और बुरे कर्मों का लेखा रखें ताकि मृत्यु के बाद यमराज उसी के अनुसार निर्णय दे सकें।
दूसरी कथा के अनुसार, चित्रगुप्त जी धरती पर न्याय और सत्य के प्रतीक के रूप में अवतरित हुए। उन्होंने मनुष्य को धर्म, नीति और ईमानदारी का पाठ पढ़ाया। चित्रगुप्त पूजा के दिन जो लोग सच्चे मन से उनकी आराधना करते हैं, उन्हें उनके पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
चित्रगुप्त पूजा का शुभ मुहूर्त 2025 में
साल 2025 में चित्रगुप्त पूजा 23 अक्टूबर, गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन प्रातःकाल और मध्याह्न का समय पूजा के लिए अत्यंत शुभ रहेगा। भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा एक ही दिन मनाए जाने से इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है।
चित्रगुप्त पूजा से मिलने वाले लाभ
1. जीवन में ज्ञान, बुद्धि और विवेक की वृद्धि होती है।
2. व्यापार और करियर में सफलता के अवसर बढ़ते हैं।
3. पापों से मुक्ति और शुभ कर्मों की प्राप्ति होती है।
4. शिक्षा से जुड़े कार्यों में प्रगति मिलती है।
5. घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
चित्रगुप्त पूजा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन में सत्य, नीति और कर्म के महत्व को समझने का दिन है। इस दिन की गई पूजा से व्यक्ति को आत्मचिंतन का अवसर मिलता है और वह अपने कर्मों के प्रति अधिक जिम्मेदार बनता है। चित्रगुप्त महाराज की कृपा से जीवन में न्याय, ईमानदारी और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
यह लेख सामान्य ज्योतिषीय और पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है। इसमें बताए गए धार्मिक उपाय और विधियां व्यक्ति की आस्था पर निर्भर करती हैं। किसी भी विशेष अनुष्ठान या पूजा से पहले अपने पंडित या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

