
मांग में गिरावट, डिस्पैच पर भी असर
कोल इंडिया में हाल के महीनों में कोयले की मांग में लगभग पांच प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। साथ ही डिस्पैच के स्तर पर भी उल्लेखनीय कमी दिखाई दी है, जिसे कंपनी ने मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप बताया है। कोल इंडिया के कार्यवाहक चेयरमैन और कोयला मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सनोज कुमार झा ने समीक्षा बैठक के बाद बताया कि इस गिरावट का प्रमुख कारण बेहतर स्टॉक प्रबंधन और इस वर्ष का अत्यधिक सक्रिय मानसून है।
समीक्षा बैठक में सामने आई स्थिति
कोयला भवन में बुधवार को आयोजित बीसीसीएल की समीक्षा बैठक में चेयरमैन झा ने उत्पादन, डिस्पैच और वर्तमान स्टॉक की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मांग में कमी का मतलब यह नहीं है कि उत्पादन क्षमता घटी है, बल्कि देश के पावर प्लांटों और कोल इंडिया दोनों के पास अभी पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इस वर्ष मानसून के अधिक सक्रिय होने के कारण कई खदान क्षेत्रों में परिवहन और खनन कार्य प्रभावित हुआ, जिससे डिस्पैच में अस्थायी गिरावट दिखाई दी।
देश में कोयले की कोई कमी नहीं
चेयरमैन झा ने बताया कि पावर प्लांट्स के पास इस समय लगभग 51 मिलियन टन कोयले का भंडार है, जो फरवरी माह तक के लिए पर्याप्त है। वहीं, कोल इंडिया के पास 90 मिलियन टन का स्टॉक उपलब्ध है। ऐसे में देश में कोयले की कोई कमी नहीं है, बल्कि मांग में नरमी होने का प्रभाव उत्पादन और डिस्पैच के आंकड़ों पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और सभी कोल कंपनियाँ अपने वार्षिक लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में कार्य कर रही हैं।
कमर्शियल माइनिंग पर फिर से होगा आकलन
झा ने कहा कि कमर्शियल माइनिंग क्षेत्र का अभी समग्र मूल्यांकन किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि यह देखा जाएगा कि उत्पादन कितना बढ़ा या घटा है और इसका कोल इंडिया पर दीर्घकालिक प्रभाव क्या पड़ेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कोल इंडिया अपनी दक्षता और उत्पादन क्षमता के कारण अभी भी बेहतर स्थिति में है।
बीसीसीएल और सीएमपीडीआईएल के IPO की तैयारी तेज
बैठक के दौरान बीसीसीएल और सीएमपीडीआईएल के IPO को लेकर भी चर्चा हुई। चेयरमैन झा ने बताया कि इन दोनों इकाइयों के IPO पर काम तेज गति से जारी है और इसी वित्त वर्ष में इनके लॉन्च होने की संभावना है। सरकार भी इस प्रक्रिया पर लगातार निगरानी कर रही है। विभिन्न आंतरिक प्रक्रियाओं और दस्तावेज़ीकरण को जल्द पूरा किया जा रहा है।
वेतन विसंगति का मामला अदालत में लंबित
झा ने जानकारी दी कि कनिष्ठ स्तर के अधिकारियों की वेतन विसंगति का मुद्दा अभी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि न्यायालय के निर्देशों के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताया जाता है कि पिछले वेतन समझौते के बाद कर्मचारियों का वेतन बढ़ गया था, जबकि कनीय अधिकारियों का वेतन अपेक्षाकृत कम रह गया था। इसी कारण इस मामले को अदालत में ले जाया गया।
कंपनी कर रही है इन्वेंट्री और आपूर्ति का अनुकूलन
कोल इंडिया वर्तमान स्थिति में उत्पादन और आपूर्ति को संतुलित करने की रणनीति पर काम कर रही है। बेहतर इन्वेंट्री मैनेजमेंट और वास्तविक मांग के अनुसार आपूर्ति की योजना बनाई जा रही है, ताकि स्टॉक का कुशल प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। कंपनी का कहना है कि मांग के अनुसार उत्पादन को समायोजित किया जा रहा है और जल्द ही सभी परिचालन सामान्य रफ्तार में लौट आएंगे।
यह लेख कोल इंडिया के कार्यवाहक चेयरमैन द्वारा दी गई जानकारी, समीक्षा बैठक के विवरण और कोयला मंत्रालय के बयान के आधार पर तैयार किया गया है। आधिकारिक अपडेट की पुष्टि के लिए संबंधित सरकारी संचार और अधिसूचनाओं को देखें।

