By: Vikash Kumar (Vicky)
अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के पूर्वी हिस्से से एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां स्थित रुबाया कोल्टन खदान में भारी बारिश के बाद अचानक भूस्खलन हो गया, जिसमें 200 से अधिक मजदूरों की मौत की आशंका जताई जा रही है। इस हादसे ने न सिर्फ कांगो बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, क्योंकि इस खदान से निकलने वाला कोल्टन वैश्विक टेक इंडस्ट्री की रीढ़ माना जाता है।

प्रशासन और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, भूस्खलन के समय बड़ी संख्या में मजदूर खदान के अंदर काम कर रहे थे। तेज बारिश के कारण मिट्टी और पत्थरों का बड़ा हिस्सा खिसक गया, जिससे मजदूर दब गए। राहत और बचाव कार्य अब भी जारी है, लेकिन दुर्गम इलाका और लगातार बारिश बचाव कार्य में बड़ी बाधा बन रही है।
क्या है कोल्टन और क्यों है यह इतना अहम
कोल्टन एक खनिज है, जिससे टैंटलम निकाला जाता है। टैंटलम का इस्तेमाल स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट, इलेक्ट्रिक कार, मेडिकल उपकरण और सैन्य तकनीक में होता है। यह धातु इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज में कैपेसिटर बनाने के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है।

दुनियाभर की टेक कंपनियां किसी न किसी रूप में कांगो से आने वाले कोल्टन पर निर्भर हैं। यही वजह है कि रुबाया खदान में हुआ यह हादसा सिर्फ मानवीय त्रासदी नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है।
दुनिया के कोल्टन बाजार में कांगो की बड़ी हिस्सेदारी
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो दुनिया के कोल्टन उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा सप्लाई करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर लंबे समय तक खनन कार्य प्रभावित रहता है, तो इसका सीधा असर स्मार्टफोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतों पर पड़ सकता है।
कई टेक कंपनियां पहले से ही कच्चे माल की कमी और बढ़ती लागत से जूझ रही हैं। ऐसे में कांगो की खदान में हुआ यह हादसा उत्पादन और सप्लाई को और ज्यादा प्रभावित कर सकता है।

असुरक्षित खदानें और मजदूरों की बदहाल हालत
स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, रुबाया खदान में काम करने वाले ज्यादातर मजदूर बेहद खराब और असुरक्षित हालात में काम करते हैं। सुरक्षा उपकरणों की कमी, अवैध खनन और कमजोर निगरानी व्यवस्था के चलते यहां पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि कांगो की खदानों में होने वाले ऐसे हादसे वैश्विक टेक इंडस्ट्री के उस काले सच को उजागर करते हैं, जहां सस्ते कच्चे माल के पीछे मजदूरों की जान जोखिम में डाल दी जाती है।

वैश्विक कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव
इस हादसे के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टेक कंपनियों पर यह दबाव बढ़ सकता है कि वे अपने कच्चे माल की सप्लाई चेन को ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनाएं। पहले भी कई बार कांगो के खनिजों को लेकर सवाल उठते रहे हैं कि क्या वे नैतिक और सुरक्षित तरीके से निकाले जा रहे हैं या नहीं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर ऐसी घटनाएं लगातार सामने आती रहीं, तो भविष्य में कंपनियों को वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं, जिससे उत्पादन लागत और ज्यादा बढ़ सकती है।

राहत कार्य जारी, मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि मलबे में अब भी कई मजदूर फंसे हो सकते हैं। ऐसे में मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका है। सरकार और राहत एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।
यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि आधुनिक तकनीक के पीछे छिपी कीमत कितनी भारी हो सकती है।
यह खबर अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स, स्थानीय प्रशासन और उपलब्ध जानकारियों पर आधारित है। राहत कार्य और मृतकों की संख्या को लेकर आधिकारिक आंकड़ों में बदलाव संभव है।

