By: Vikash Kumar (Vicky)
कोविड-19 महामारी के दौरान जहां एक ओर दुनिया भर में लोगों ने वैक्सीनेशन के जरिए खुद को सुरक्षित करने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें भी तेजी से फैलीं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हुई कि क्या कोरोना वैक्सीन लगवाने से महिलाओं की फर्टिलिटी यानी गर्भधारण की क्षमता कम हो रही है।

कई पोस्ट और वीडियो में दावा किया गया कि वैक्सीनेशन से महिलाएं बांझ हो सकती हैं और भविष्य में मां बनने की संभावना घट सकती है। लेकिन अब एक बड़े वैज्ञानिक अध्ययन ने इन दावों की सच्चाई सामने ला दी है और साफ कर दिया है कि कोरोना वैक्सीन और महिलाओं की फर्टिलिटी में कमी के बीच कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है।

हाल ही में प्रकाशित एक बड़े शोध में करीब 60 हजार महिलाओं के डेटा का विश्लेषण किया गया। यह अध्ययन स्वीडन में 18 से 45 वर्ष की महिलाओं पर आधारित था, जिनमें से लगभग 75 प्रतिशत महिलाओं ने वर्ष 2021 से 2024 के बीच कोविड-19 के खिलाफ एक या उससे अधिक डोज की वैक्सीन ली थी।
शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्य रिकॉर्ड के आधार पर बच्चे के जन्म, गर्भपात, वैक्सीनेशन और अन्य स्वास्थ्य कारकों का विस्तृत अध्ययन किया। कम्युनिकेशंस मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित इस रिसर्च के निष्कर्षों में पाया गया कि वैक्सीनेटेड और बिना वैक्सीनेटेड महिलाओं के बीच बच्चे के जन्म या गर्भपात की दर में कोई सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण अंतर नहीं था।

महामारी के बाद कुछ देशों, खासकर स्वीडन में जन्म दर में आई गिरावट ने कई लोगों के मन में शंका पैदा कर दी थी कि शायद इसका कारण नई mRNA वैक्सीन हो सकती है। लेकिन लिंकोपिंग यूनिवर्सिटी के सोशल मेडिसिन प्रोफेसर टॉमस टिम्पका ने स्पष्ट कहा कि उनके अध्ययन के अनुसार कोविड-19 वैक्सीन का जन्म दर में कमी से जुड़ाव होने की संभावना बेहद कम है। उन्होंने बताया कि महामारी के दौरान सामाजिक, आर्थिक और मानसिक तनाव जैसे कई अन्य कारक भी लोगों के परिवार नियोजन के फैसलों को प्रभावित करते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इस शोध की खास बात यह रही कि इसमें आम आबादी में गर्भधारण और गर्भावस्था के आंकड़ों का अध्ययन किया गया, जबकि पहले के कई शोध केवल फर्टिलिटी ट्रीटमेंट ले रहे जोड़ों तक सीमित थे। वैज्ञानिकों ने पहले से मौजूद बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य परिस्थितियों जैसे कारकों को भी ध्यान में रखते हुए निष्कर्ष निकाले ताकि परिणाम अधिक सटीक और भरोसेमंद हों। अध्ययन में यह भी सामने आया कि कोविड संक्रमण गर्भवती महिलाओं के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है, जबकि वैक्सीनेशन उस जोखिम को काफी हद तक कम करने में मदद करता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा वैज्ञानिक प्रमाण साफ तौर पर बताते हैं कि कोविड-19 वैक्सीन गंभीर बीमारी और जटिलताओं से सुरक्षा प्रदान करती है और इसके फायदे संभावित जोखिमों से कहीं ज्यादा हैं। जो महिलाएं परिवार शुरू करने की योजना बना रही हैं या भविष्य में मां बनना चाहती हैं, उन्हें केवल अफवाहों के आधार पर वैक्सीन से दूरी नहीं बनानी चाहिए।
डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार यह सलाह देते रहे हैं कि वैक्सीनेशन सुरक्षित है और गर्भधारण की क्षमता पर इसका कोई नकारात्मक असर साबित नहीं हुआ है।
महामारी के दौरान फैली गलत सूचनाओं ने कई लोगों के मन में डर पैदा किया, लेकिन नए और बड़े स्तर के वैज्ञानिक अध्ययन यह दिखा रहे हैं कि कोरोना वैक्सीन से बांझपन होने का दावा निराधार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों को सोशल मीडिया की अपुष्ट खबरों पर भरोसा करने के बजाय वैज्ञानिक शोध और आधिकारिक स्वास्थ्य संस्थानों की सलाह पर ध्यान देना चाहिए। सही जानकारी ही लोगों को सुरक्षित और स्वस्थ रखने में मदद करती है।
यह लेख उपलब्ध वैज्ञानिक शोध और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की जानकारी पर आधारित है। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी निर्णय से पहले अपने डॉक्टर या योग्य चिकित्सा विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई है।
